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कोख से ही बीमारी लेकर पैदा हो रहे बच्चे, कुपोषण के साथ टीबी, दिल में छेद की बीमारी

जिले से कुपोषण का दंश खत्म नहीं हो रहा है। आदिवासी बहुल गांव में जन्म से पांच साल तक के बच्चें कुपोषण के साथ टीबी,दिल में छेद से लेकर अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रस्त है। कई बच्चों का वजन जन्म के समय 2500 ग्राम से कम होने से कुपोषित पैदा हो रहे। ऐसे में एनएससीयू यूनिट में दबाव बढऩे के साथ भर्ती मरीजों की संख्या दोगुना हो गई है। नेपानगर में 174, खकनार परिजनो में 104 बच्चे अति कुपोषित की श्रेणी में शामिल है, जबकि कुछ तो आंगनवाड़ी के साथ सरकारी रिपोर्ट से बाहर है।

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Children born with diseases from the womb, malnutrition, tuberculosis, and hole in the heart

(कोख से ही बीमारी लेकर पैदा हो रहे बच्चे, कुपोषण के साथ टीबी, दिल में छेद की बीमारी)Children born with diseases from the womb, malnutrition, tuberculosis, and hole in the heart

485 बच्चें अति कुपोषित, 2670 कुपोषण का खतरा

नेपानगर, खकनार में सबसे अधिक कुपोषण

Burhanpur news: अमीर उद्दीन, जिले से कुपोषण का दंश खत्म नहीं हो रहा है। आदिवासी बहुल गांव में जन्म से पांच साल तक के बच्चें कुपोषण के साथ टीबी,दिल में छेद से लेकर अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रस्त है। कई बच्चों का वजन जन्म के समय 2500 ग्राम से कम होने से कुपोषित पैदा हो रहे। ऐसे में एनएससीयू यूनिट में दबाव बढऩे के साथ भर्ती मरीजों की संख्या दोगुना हो गई है। नेपानगर में 174, खकनार परिजनो में 104 बच्चे अति कुपोषित की श्रेणी में शामिल है, जबकि कुछ तो आंगनवाड़ी के साथ सरकारी रिपोर्ट से बाहर है।

कुपोषण की सबसे बड़ी वजह गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में खून की कमी (एनीमिया) एक गंभीर समस्या बनी हुई है, जो मां और शिशु दोनों के जीवन के लिए बड़ा खतरा पैदा कर रही है। जिले में लगभग 60 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से ग्रस्त हैं। यह स्थिति इतनी चिंताजनक है कि सीवियर एनीमिया के कारण प्रसव के दौरान सिजेरियन ऑपरेशन की आवश्यकता बढ़ जाती है, जिससे मां और बच्चे का जोखिम और भी बढ़ रहा है। जमीनीस्तर पर स्वास्थ्य और महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाएं औपचारिकता साबित हो रही है। महिलाओं और बच्चों को सुपोषित करने की योजनाएं केवल कागजों तक ही सिमट है।

गांव से अधिक आ रहे मामले

महिलाओं के एनीमिया और बच्चों में कुपोषण के ममाले ग्रामीण क्षेत्रों से अधिक आ रहे है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार नेपानगर, खकनार, धूलकोट क्षेत्र से आने वाली हर दूसरी से तीसरी महिला एनीमिक है। प्रसव के बाद बच्चों का वजन कम होने से उन्हे इलाज के लिए एसएनसीयू में भर्ती कराया जा रहा है। उम्र बढऩे के बाद भी बच्चों की हाइड, बजन और लंबाई नहीं बढऩे पर कुपोषित बच्चों को इलाज के लिए ब्लॉक एवं जिला अस्पताल के एनआरसी केंद्रों में इलाज के लिए भर्ती कर रहे है।

कमजोर शरीर से कही बीमारियों का खतरा

कुपोषित श्रेणी में शामिल बच्चों का वजन सामान्य बच्चों की तुलना में कम होता है। जन्म के समय जिनकी वजन 2500 ग्राम से कम है कही बार उम्र बढऩे के साथ शरीर मजबूत नहीं होता है। अत्यधिक दुबलापन, हाथ-पैर बहुत पतले दिखना, पसलियां या हड्डियां दिखना, और पैरों में सूजन होना कारण है जो कमजोर शरीर में खूनी की कमी और इम्यूनिटी कजमोर होने से टीबी, उल्टी, दस्त के साथ संक्रमित बीमारियां हो जाती है।करीब 50 से अधिक बच्चों को कुपोषण के साथ टीबी और दिल में छेद की समस्या है।

गर्मी बढऩे के साथ एनआरसी में बढी बच्चों की संख्या
गर्मी का तापमान बढऩे के साथ कुपोषित बच्चों की मुश्किलें बढ़ गई। उल्टी, दस्त के साथ शरीरिक कमजोरी होने पर बच्चों को इलाज के लिए एनआरसी में भर्ती किया जा रहा है। कही केस ऐेसे है जहां पर बच्चों का वजन डेढ़ से दो किलो तक रह गया। ऐसे में बच्चों का इलाज कर वजन बढ़ाने के साथ नियमित मॉनिटरिंग के लिए भर्ती किया जा रहा है। पोषित अनाज, दवाईयों के साथ शरीर की मालिश करने से कही बच्चों के वजन में बढ़ोतरी दर्ज की गई।

जिले में कुपोषिण की स्थिति
परियोजना कुपोषित
नेपानगर 174 785
बुरहानपुर ग्रामीण 108 577
खकनार 104 508
शाहपुर 45 340
शहरी 01 37 236
शहरी-02 17 224
जिला अस्पताल एनआरसी स्थिति
माह भर्ती स्वास्थ्य
जनवरी 33 31
फरवरी 30 28
मार्च 59 56
अप्रेल 50 49
मई 65 इलाज जारी

  • कुपोषित श्रेणी के बच्चें की आंगनवाड़ीस्तर पर मॉनिटरिंग की जाती है,गर्मी के समय बच्चे बीमार होने से वजन कम हो जाता है, इलाज के लिए एनआरसी में भर्ती कराया जाता है।सुषमा भदौरिया, डीपीओ, बुरहानपुर