
Burhanpur news. जिले में 250 से अधिक प्राथमिक-माध्यमिक स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा पर लापरवाही बरती जा रही है। यहां पर सुविधाओं की कमी के साथ बाउंड्रीवाल तक नहीं है। स्कूल के समय परिसर में आवारा मवेशियों के साथ आसामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है। सुरक्षा दीवार नहीं होने से रात के समय नशे की सामग्री फेंककर चले जाते हैं। स्कूल खुले मैदान की तरह संचालित हो रहे हैं, जहां बच्चों की सुरक्षा पूरी तरह भगवान भरोसे है।
इसका खुलासा सरकार द्वारा मांगी गई स्कूलों की रिपोर्ट के आधार पर हुआ है। जिलेभर में 535 शासकीय प्राथमिक, माध्यमिक स्कूलेंं संचालित हो रही है। शहरी सहित ग्रामीण क्षेत्रों की 250 से अधिक स्कूलों में सुरक्षा के लिए पक्की बाउंड्रीवाल नहीं है। कही जगहों पर बाउंड्रीवाल टूट चुकी है। जिससे यह स्पष्ट कर रही है कि जिम्मेदार विभाग बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है। शासकीय स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा मानकों की अनदेखी जाहिर हो रही है। पढ़ाई या दोपहर की छुट्टी के दौरान बच्चों को बाहर जाने को लेकर डर बना रहता है।
लाखों का बजट, सुरक्षा पंचायत के भरोसे
सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने के लिए शासन हर साल लाखों रुपए का बजट तो दे रहा है, लेकिन इसका उपयोग सही नहीं हो रहा है। जिसकी वजह से सरकारी स्कूलों की अधोसंंरचना नहीं सुधर पा रही है। कई स्कूल हैं जहां भवन बनने के बाद भी अधूरे है। स्कूलों की सुरक्षा के लिए बाउंड्रीवॉल निर्माण की जिम्मेदारी पंचायत विभाग को सौंप दी गई है। ऐसे में पंचायतों के पास मनरेगा में बजट नहीं होने से काम अधूरे पड़े है तो कुछ जगहों पर प्रस्ताव एवं बजट स्वीकृत होने के बाद भी आगे का काम शुरू नहीं हुआ। बाउंड्रीवॉल नहीं होने से मैदानों पर कब्जा एवं अतिक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है।
सुरक्षा दीवार नहीं होने से यह खतरा
-: स्कूल परिसर में बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश
-: पशुओं के आने-जाने से गंदगी, बच्चों को चोटिल होने का भय
-: फर्नीचर, कंप्यूटर सहित सामग्री चोरी और खिड़कियों की तोडफ़ोड़ का डर
-: पढ़ाई, दोपहर छुट्टी के दौरान बच्चों के परिसर से बाहर जाने का डर
-: स्कूलों के खाली भूमि पर कचरा फेंकना या मवेशियों को बांधना
-: मैदान में अतिक्रमण होने का डर
Published on:
09 Apr 2026 08:24 pm
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