
बुरहानपुर. असीरगढ़ किले के 600 साल पुराने दरवाने को शरारती तत्वों ने आग लगाकर जला दिया। आगजनी की घटना को छिपाने के लिए किला प्रबंधन ने दरवाजों को टीन शेड से ढंक दिया, और जिला प्रशासन को इसकी प्राथमिक रिपोर्ट भी नहीं भेजी, हालांकि मामले की शिकायत निंबोला थाने में भी की गई है। पुलिस ने केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
केंद्रीय पुरातत्व अधिकारी विपुल मेश्राम ने बताया कि 17 दिसंबर की रात्रि में अज्ञात बदमाशों ने किले के मुख्य गेट को आग लगाकर नुकसान पहुंचाया। 18 दिसंबर को कर्मचारी पहुंचे तो गेट आग से जल रहा था। पानी की मदद से आग को बुझाने का प्रयास किया गया। प्राचीन किले की दरवाजे को नुकसान पहुंचाने पर निंबोला थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है। गेट की लकड़ी जल गई है, लेकिन लोहे का सामान शेष है, इसलिए गेट का संरक्षण कर फिर से गेट को तैयार कराया जाएगा।
जिला पुरातत्व को भी नहीं दी जानकारी
असीरगढ़ किले का मुख्य दरवाजे को जलाने की घटना 4 दिन पुरानी होने के बाद भी पुरातत्व विभाग की तरफ से मामले प्रशासन सहित जिला पुरातत्व समिति को भी घटना की जानकारी नहीं दी गई। ग्रामीण जब किले पर पहुंचे तब मामले की जानकारी मीडिया को दी। पुरातत्व समिति के कमरूद्दीन फलक, मोहम्मद नौशाद ने बताया कि असीरगढ़ किले पर फारूखी शासन के समय सागोन के अंदर लोहे की कीलें, मजबूत सकलियों और लोहे की पट्टियों से गेट बनाया गया था। 600 साल पुराने गेट पर कई तोपों के गोले दागने के बाद भी असर नहीं हुआ। आशंका है कि बदमाशों ने गेट पर लगे लोहे को चोरी करने की नीयत से गेट में आग लगा दी ।
पहले गिरी थी किले की दीवार
किले पर मुख्य गेट के पास ही लगभग दो माह से प्राचीन दीवार गिरने की घटना भी हुई थी, दीवार को मलबे को उठाने के बाद मरम्मत का काम भी शुरू नहीं किया गया। गेट भी जलने से किले को काफी नुकसान पहुंचा है। गेट के ऊपर रखी प्राचीन तोप भी गिरने की आशंका है, इसलिए तोप को गेट से उतारने की मांग भी की जा रही है।
Published on:
22 Dec 2021 05:28 pm
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