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Hanuman murti – हनुमानजी की सबसे पुरानी प्रतिमा, अपने आप प्रकट हुई थी मूर्ति

हनुमानजी की सबसे पुरानी प्रतिमा

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Hanumanji ki sabse purani murti

Hanumanji ki sabse purani murti

बुरहानपुर. शहर से चार किमी दूर प्राचीन रोकडिय़ा हनुमान मंदिर में पौष पूर्णिमा पर रोकडिय़ा हनुमान जयंती मनाई जा रही है। इसको लेकर 9 जनवरी को सुबह 9 बजे से मंदिर में अखंड मानस पाठ शुरू हुआ था जिसका समापन 10 जनवरी को सुबह 5 बजे हुआ। इसके बाद रोकडिय़ा हनुमानजी को चोला चढ़ाया गया और सुबह 6 बजे आरती हुई। बाबा के दर्शन के लिए अलसुबह से रात 12 बजे तक हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए मंदिर पहुंचेंगे। श्रद्घालुओं को बूंदी की प्रसादी वितरित की जा रही है।


मंदिर परिसर में भरनेवाले इस मेला में बुरहानपुर सहित आसपास के जिले और अन्य जगहों से भी श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचेंगे। मेले को लेकर ट्रस्ट तैयारी में जुटा है। मंदिर सहित परिसर को रंग-बिरंगी लाइटिंग से सजाया गया। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए यहां पंडाल बनाया जा रहा है। मेले के लिए सुबह से यहां फूलमाला सहित अन्य दुकानें लगने लगी हैं। मंदिर पहुंच मार्ग की सफाई कराने के साथ यहां भी प्रकाश व्यवस्था कराई जा रही है। मंदिर परिसर में हर साल पूर्णिमा, हनुमान जयंती और रोकडिय़ा जयंती पर मेला लगता है।

बाबा की प्रतिमा 500 साल से अधिक प्राचीन, क्षेत्र की सबसे पुरानी हनुमान मूर्ति
ट्रस्ट प्रमुख नरेंद्र वाणी ने बताया कि मंदिर में बाबा की प्रतिमा 500 साल से अधिक प्राचीन है। यह क्षेत्र की सबसे पुरानी हनुमान मूर्ति मानी जाती है। 1962 में करीब ढाई फीट की थी। उतावली नदी पार उखड़ गांव में बाबा का प्राचीन मंदिर है। यहां बाबा की स्वयंभू प्रतिमा है। 56 साल पहले करीब आठ फीट का मंदिर था। दरवाजे की ऊंचाई ढाई फीट होने के कारण भक्तों को झुककर मंदिर में जाना पड़ता था। वर्तमान में यहां करीब एक करोड़ रुपए की लागत से बना 30 फीट से अधिक ऊंचा भव्य मंदिर बना है। सात हजार वर्गफीट में फैले परिसर में पर्यटन विभाग ने सभागृह बनाने के साथ गेट और ब्लॉक भी लगाए हैं।