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आपसी मतभेद, परिवारिक रिश्तों को जोडऩे की मजबूत डोर बनी, लोक अदालत

- एक साल में 5725 मामलों का कराया आपसी राजीनामा

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Lok Adalat has become a strong thread connecting mutual differences and family relationships

Lok Adalat has become a strong thread connecting mutual differences and family relationships


बुरहानपुर. जिला न्यायालय में वर्षाे से लंबित 5 हजार 725 लिटिगेशन एवं प्री-लिटिगेशन प्रकरणों का एक साल में नेशनल लोक अदालत के माध्यम से आपसी राजीनामा हो गया। इसमें न किसी की जीत हुइ न हार। टूट रहे रिश्तों को जोडऩे के साथ आपसी मतभेदों को खत्म करने की मजबूत डोर नेशनल लोक अदालत साबित हो रही है।
9 दिसंबर को साल की अंतिम नेशनल लोक अदालत को लेकर जिला न्यायालय में तैयारियां भी शुरू हो गई है। 12 खंडपीठों में 5 हजार से अधिक राजीनामा योग मामले रखे जाएंगे। अगर पिछली तीन लोक अदालत की बात करे तो न्यायालय में लंबित 1759 प्रकरणों का निराकरण किया गया। जबकि प्री-लिटिगेशन मामलों की बात करे तो 3966 प्रकरणों का समझौया कर आपसी विवाद को खत्म कराया गया है। 20 करोड़ 28 लाख 85 हजार 238 रुपए की अवार्ड राशि भी पारित की गई है। अंतिम लोक अदालत में रिकार्ड स्थापित करने के लिए अधिक से अधिक मामलों का राजीनामा हो इसलिए प्रयास शुरू कर दिए गए है। जिला न्यायाधीश से लेकर जिला अधिवक्ता संघ के लोग भी अपने पक्षकारों को तैयार कर रहे है।
लोक अदालत में नहीं होती हार,जीत
लोक अदालत एक ऐसा मंच है, जहां पर दोनों पक्षों की सहमति से विवाद का हल निकाला जाता है। लोक अदालत में सुलझाए गए विवादों का निर्णय अंतिम होता है। इसमें कोई अपील नहीं होती है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव एवं जिला न्यायाधीश आशुतोष शुक्ल ने बताया कि लोक अदालत के माध्यम से कई वर्षों पुराने विवाद भी सुलझ जाते हैं। लोक अदालत में होने वाले प्रकरणों के निराकरण में न किसी की जीत होती है न हार। मानसिक, शारीरिक एवं आर्थिक रूप परेशानी से छुटकारा मिलता है। इसलिए इस व्यवस्था का लाभ लोगों को उठाना चाहिए।
बॉक्स
लिटिगेशन
आपराधिक, चेक बाउंस, मोटर दुर्घटना, क्षतिपूर्ति दावा, पारिवारिक, भूमि अधिग्रहण प्रकरण, विद्युत प्रकरण, श्रम एवं रोजगार, बैंक मनी रिकवरी
लिटिगेशन
संपत्तिकर, बिजली व जल, बिजली बिल बकाया, बैंक का लोन, बीमा पॉलिसी सहित सभी राजीनामा योग्य प्रकरणों में छूट का लाभ