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चमत्कार : 500 साल बाद हनुमानजी ने अपना चोला छोड़ा

महाजनापेठ में काली चौदस के एक दिन पहले यह चमत्कार देख सभी हैरत में

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Miracle: 500 years later Hanumanji left his uncle

Miracle: 500 years later Hanumanji left his uncle

बुरहानपुर. शहर में कई चमत्कार देखने को मिल रहे हैं। तीन दिन पहले शहर में जगह-जगह मजार हिलने का मामला सामने आया था अब हनुमानजी का चोला अपने आप निकलने की बात सामने आई है। यह बात जब क्षेत्र में फैली तो देखने वालों की भीड़ लग गई। इसे लोग चमत्कार मान रहे हैं, जो महाजनापेठ के हनुमान मंदिर में देखने को मिली।
मंगलवार को भगवान श्रीराम के अन्यय भक्त श्री हनुमानजी का चमत्कार देखने को मिला। इस चमत्कार को देखने के लिए श्रद्धालुओ का हुजुम उमड़ पड़ा। यह वाक्या महाजनापेठ स्थित अति प्राचीन हनुमानजी के मंदिर का है। जहां हनुमानजी ने 500 वर्ष बाद अपना चोला छोड़ा।
ज्ञात हो की महाजनापेठ नाथ गली में स्थित हनुमान मंदिर करीब 500 वर्ष पुराना है। मंदिर में जो हनुमान जी की मुर्ति है उसपर वर्षो से श्रद्धालुओं द्वारा सिंदूर चढ़ाया जाता रहा। उस कारण प्रतिमा पर करीब 2 क्विंटल से अधिक सिंदूर की परत चढ़ गई। ऐसी मान्यता है कि जब तक हनुमान जी ना चाहे तब तक सिंदूर का चोला नहीं निकाला जा सकता। इस मंदिर में भी पूर्व में कुछ लोगों द्वारा चोला निकलने का प्रयास किया गया किन्तु वे असफल रहे। महाजनापेठ के ही एक युवा हनुमान भक्त विक्की कटियारे जो कि कई वर्षों से नियमित इस मंदिर में भगवान की आराधना कर हनुमान चालीसा का पाठ करते आ रहे है। उसे आभास हुआ कि काली चौदस की पूजा के पूर्व हनुमान जी चोला छोडऩा चाह रहे है। उसने यह बात भजन मंडल चलाने वाले डाकवाडी निवासी बालाराम भाई को बताई। दोनों ही हनुमान मंदिर जाकर हनुमान जी से प्रार्थना की और चोला निकालने का प्रयास कियाए 10 मिनिट के भीतर ही हनुमान जी ने अपने ऊपर लगभग 2 क्विंटल का जो चोला था उसे छोड़ दिया। यह बात पता लगते ही भक्तों की भीड़ मंदिर में लगने लगी। महाजनापेठ के मुर्तिकार बालाराम औतारी द्वारा हनुमानजी का श्रंृगार किया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मूर्ति बालाजी स्वरूप में हैए कान में बड़े कुण्डल गले में हारए कमर में पट्टा लगा हुआ है। यह प्रतिमा काले पत्थर से निर्मित की गई है।