
Osho's brother Swami Shailendra Saraswati said do not follow sheep's tricks
बुरहानपुर. भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है स्व धर्म में जीयो। जो हमारे छुपी हुई प्रतिभा वह कैसे प्रकट हो जाए। हमें दूसरे की नकल करके नहीं जीना है। हमें हमारे विवेक से जीना है। स्व धर्म में जीना चाहिए। इसके लिए बहुत संकल्प और साहस की जरूरत है। भेड़ चाल में न चले। इसमें चलने के लिए संकल्प और सहास नहीं चाहिए, लकीर से फकीर होकर नहीं इंटीलीजेंस होकर जीना। अभाव पर दृष्टि न हो भाव पर दृष्टि हो, जो हो उस पर हमारी नजर हो।
यह बात दुनियाभर में प्रसिद्धि पा चुके ओशो के भाई स्वामी शैलेंद्र सरस्वती ने कही। वे गुरुवार को मेक्रो विजन एकेडमी बुरहानपुर पहुंचे। यहां पर चार दिवीय आयोजन होना है। जो 29 दिसंबर से 1 जनवरी तक चलेगा। इसमें ओशो ध्यान शिविर होगा। जहां देशभर से अनुयायी आएंगे।
हमारे मन की स्थितियां बदलनी होगी
उन्होंने कहा कि सबसे पहली बात है बाहर की परिस्थितियां नहीं हमें हमारी मन स्थितियां बदलनी होगी। अगर मैं एक दुखी व्यक्ति हूं, चिंतित व्यक्ति, नकारात्मक मेरी सोच है, तो दुनिया में मुझे सब कुछ वैसे ही दिखाई देगा। ऐसी कौन सी चीज है जो हमारी दुनिया बदल जाए। वह है हमारा नजरिया।
ओशो को उनके निधन का पहले ही पता चल गया था
दुनियाभर में प्रसिद्धी पा चुके ओशो के भाई स्वामी शेलेंद्र सरस्वती अपनी पत्नी मां अम्रित प्रिया के साथ बुरहानपुर पहुंचे। जहां स्वामी शैलेंद्र सरस्वती ने ओशो के निधन के सवाल पर भी बात रखी। कहा कि ओशो की स्वाभाविक मृत्यु हुई थी। 58 साल की उम्र में उनकी मृत्यु हुई थी। ओशो को अपनी देह त्यागने का करीब 10 महीने पहले पता लग गया था। यह तभी होता है जब नेचुरल डेथ होने वाली हो। अगर कोई एक्सीडेंट, मर्डर में पता नहीं चलता।
उन्होंने कहा कि महर्षि पतंजलि ने अपने योग शास्त्र में लिखा है। एक जागृत व्यक्ति को उतने दिन पहले अपनी मृत्यु का एहसास हो जाता है। जितने दिन वह अपनी मां के गर्भ में रहा हो। ओशो ने इस बात की पुष्टि की थी। 284 तक वह मां के गर्भ में रहे। इस दौरान मेक्रो विजन एकेडमी के संचालक आनंद प्रकाश चौकसे, मंजूषा चौकसे, कबीर चौकसे आदि मौजूद रहे।
Published on:
29 Dec 2023 12:49 pm
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