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50 पाड़ों ने दिखाया दमखम, रुद्राक्ष ने राजू को नदी में पटका, पुष्पराज के आगे कोई नहीं टिका

पाड़ों की टक्कर देखने पहुंची जबर्दस्त भीड़, जनप्रतिनिधि भी हुए शामिल।नदी में लड़ते रहे पाड़े,

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नदी में लड़ते रहे पाड़े

बुरहानपुर-शाहपुर. अमरावती नदी के तट पर दिवाली के दूसरे दिन पड़वे पर मेला लगा। वर्षों से चली आ रही परंपरा के तहत पाड़ों की टक्कर का आयोजन भी हुआ। इसमें मध्यप्रदेश सहित महाराष्ट्र से पहुंचे 50 से अधिक पाड़ों के बीच कांटे का मुकाबला हुआ। टक्कर देखने के लिए बुरहानपुर और महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग शाहपुर पहुंचे।

पाड़ों को मालिकों ने पाड़ों केा पुष्पराज, रुद्राक्ष, राजू, शिवभक्त, बंधु सहित अन्य नाम दिए थे। नदी पर पाड़ों की लड़ाई के बीच भगदड़ की स्थिति भी बनी लेकिन इस बार भीड़ को नियंत्रित करने के लिए तार फेंसिंग होने से बड़ा हादसा नहीं हुआ। दोपहर 2 से शाम 6 बजे तक 50 से अधिक पाड़ों ने दमखम दिखाया। लोगों की तालियां बजी, तो कभी भगदड़ होने पर अपनी जान बचाई। पंड़वा पर हर साल शाहपुर में मेले पर पाड़ों की टक्कर कराने की परंपरा पुरानी है। मेले में सांसद ज्ञानेश्वर पाटील, विधायक सुरेंद्र सिंह पूर्व मंत्री अर्चना चिटनीस भी शमिल हुईं।

मकानों की छत पर चढ़कर बैठे लोग
कोविड के दो साल बाद मेले की पाबंदिया खत्म हुई तो बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। पाड़ों की टक्कर देखने लोग पेड़ सहित आसपास के घरों की छतों तक पर बैठ गए। नदी में पानी होने के बाद भी पाड़े लड़ते हुए नदी में पहुंचे। पाड़ा मालिकों द्वारा उन्हें वापस मैदान में लाया गया। मुकाबले में पाड़ों की जीत, हार का फैसला मेला समिति द्वारा किया जाएगा।

मेले में लगी दुकानें- झूले
दिवाली के बाद नगर में लगने वाले मेले में झूले, दुकानें लगी। नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों से पहुंचे ग्रामीणों ने मेले का आनंद लिया। रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया। शाहपुर के बड़ा बाजार में कव्वाली का आयोजन हुआ। बड़ी संख्या में लोग कव्वाली देखने के लिए पहुंचे। मेला एवं पाड़ों की टक्कर में सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस बल भी तैनात रहा। लोगों की संख्या अधिक होने से ट्रैफिक का दबाव अधिक रहा। नगर में कई घंटे तक जाम लगा रहा।

पाड़े के जीतने पर मिलेगा इनाम
नदी के तट पर पाड़ों की टक्कर खत्म होने के बाद मेला समिति द्वारा सबसे दमदार एवं सबसे अधिक समय तक लड़ाई लडऩे वाले पाड़ों को विजेता घोषित किया जाता है। मेला समिति बैठक लेकर एक नवंबर को अपने परिणाम घोषित करेगी। विजेता पाड़े के मालिक को फ्रीज, एलइडी टीवी, सोफा कवर, कूलर, पंखा सहित नगद राशि भी इनाम के रूप में मेला समिति द्वारा देकर सम्मानित किया जाता है।

शुद्ध घी, ड्राइफ्रूट खिलाकर तैयार करते हैं पाड़े
पाड़ों को टक्कर के लिए ड्राइफ्रूट, चना खिलाकर तैयार किया जाता है। पाड़ों के मालिक एक साल तक पाड़ों पर विशेष ध्यान देते है। कई पाड़ों को शुद्ध घी, अंडा, चारा, भूसा, सरसों के तेल से मालिश होती है। मौसम अनुसार इलाज भी करते है। पाड़ों की टक्कर प्रतिबंध होने के बाद भी वर्षो से नगर में परंपरा के नाम पर पाड़ों को एक दूसरे से लड़ाया जाता है।