मैं संजय काशीनाथ सोनवणे अपने पूरे होशो-हवास में लिखता हूं कि मैं अपनी शारीरिक तकलीफ से परेशान होकर यह कदम उठा रहा हूं। मेरा सिर और आंख तक इतना दर्द करता है कि वह सहनशक्ति के बाहर है। आंखों में हाईमायोपिया है। दिखना एकदम कम हो गया है। साथ ही दिमाग में सेरेब्रल एंड सेरेबेलर एट्रॉफी है। जिसके कारण दिखना कम हो गया है। चलते समय चला नहीं बनता है। चक्कर आते हैं। ड्यूटी करना असंभव सा हो गया है। मैं अपने माता, पिता, पत्नी एवं बच्चों से माफी मांगता हूं। कि मैं अपने दायित्व नहीं निभा सकता। किंतु मुझे वास्तव में इतनी ज्यादा तकलीफ है कि मैं इसे बयां नहीं कर सकता। काश कोई मेरी तकलीफ महसूस कर सकता। मेरे माता, पिता, भाई, बहन बहुत अच्छे हैं। मेरे जीजाजी बहुत अच्छे हैं। मेरी पत्नी जैसा जीवनसाथी नसीबों से मिलता है। मेरी पत्नी एवं बेटी हर्षा, पुत्र कृष्णा बहुत अच्छे हैं। मैं अपनी पत्नी से विशेषकर माफी मांगता हूं।