
नेपानगरः एक तरफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश के हर गांव, इलाके में बिजली पहुंचाने के संकल्पित है, तो दूसरी तरफ मध्य प्रदेश विधुत मंडल के कुछ अधिकारी पद पर बैठकर पीएम के संकल्प का मखौल उड़ा रहे हैं। इसकी बानगी देखने को मिली बुरहानपुर के नेपानगर में, जहां ज्यादातर स्कूल अंधकार में अपना भविष्य बनाने को मजबूर हैं। यहां कई स्कूलों में बिजली नहीं है, लेकिन हैरानी की बात ये है कि, कई स्कूलों में बिजली तो छोड़िये बोर्ड, स्विच और बिजली की लाइन भी नहीं है बावजूद इसके यहां हर महीने तय समय पर बिजली का लंबा चौड़ा बिल आ रहा है।
गर्मी में पढ़ेगा क्या तभी बढ़ेगा इंडिया?
स्कूलों में बच्चे भीषण गर्मी और अंधेरे कमरो में पढ़कर अपना भविष्य सुनिश्चित करने को मजबूर हैं। कहीं बच्चे किताबों को पढ़ने के बजाए हवा करने के इस्तेमाल में लेते नजर आते हैं, तो कहीं गर्मी से जूझ रहे छात्र और शिक्षक गर्मी के भपके छोड़ती कक्षा में आने को ही तैयार नही हैं। हम आपको बता रहे हैं डवालीकला और डवालीखुर्द के स्कूल की कहानी। जहां, शिक्षकों का कहना है कि स्कूल में मीटर तक नहीं लगा, फिर भी हर महीने हजारों का बिल स्कूल के नाम पर थमाया जा रहा है। न तो शिक्षक गर्मी में पढ़ा पा रहे हैं और न हीं बच्चे पढ़ रहे हैं। वहीं, क्षेत्र के विधायक को ऐसे स्कूलों की जानकारी ही नहीं है, जहां बिजली नहीं, है, तो नेपानगर एसडीएम काशीराम बडौले जानकारी हासिल करने की बात कह रहे हैं।
कागजो में व्यवस्थित, हकीकत में अंधकार
बुरहानपुर जिला वैसे ही आजकल 43 डिग्री तापमान होने के कारण तप रहा है। ऐसे में यहां बिजली ना होने के कारण बच्चें और शिक्षक दोनो ही कक्षा में अपने तय समय नही रह पा रहे, उमस बढ़ते ही छात्र स्कूल कक्ष से मजबूरन बाहर निकल जाते है, क्षेत्र के आदिवासी इलाके वाले स्कूलों में कई स्कूलों के हालात ये हैं कि, कागजी तौर पर तो यहा बिजली है पर पर जमीनी हकीकत इन सारी व्यवस्थाओँ की पोल खोलती नजर आ रही है।
Published on:
05 May 2018 03:01 pm
बड़ी खबरें
View Allबुरहानपुर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
