अमीर उद्दीन, बुरहानपुर. पावरलूम मशीनों के धागे से निकलने वाले बारीक रेशे बुरहानपुर के बुनकरों को टीबी का मरीज बना रहे है। शहर में यह बीमारी कोरोना की तरह तेजी से फैल रही है। पिछले 15 माह में 2588 नए मरीज सामने आने के साथ इस रोग से पीडि़त 51 लोगों की मौत भी चुकी है। टीबी के मरीजों में युवा, बुजुर्ग और महिलाएं भी शामिल है। पावरलूम, साइजिंग उद्योग, रुई और रजाई,गद्दे के व्यापार में शामिल मजदूर वर्ग के लोग अधिक है।
शहर की तंग गलियों से लेकर घरों के अंदर तक पावरलूम कारखाने चल रहे है। बुनकरों को इस जानलेवा बीमारी से बचाने एवं पावरलूम व्यापार को शहर से बाहर शिफ्ट करने के लिए शासन, प्रशासन का ध्यान नहीं है। यही कारण है कि 40 हजार पावरलूम मशीनों पर काम करने वाले हजारों मजदूर टीबी रोग का शिकार हो रहे है। धागे के बारीक रेशे 24 घंटे सांसों के साथ फेफड़ों तक पहुंचने से हर साल बुनकर टीबी के मरीज बन रहे हैं। बुनकरों और अन्य व्यापार में शामिल मजदूरों को इस बीमारी से बचाव के लिए जागरूक तक नहीं किया जा रहा है।
चार साल में 289 लोगों की मौत
सरकारी आंकड़ों के अनुसार बुरहानपुर में 2019 से लेकर 2022 के दरमियान टीबी रोग से पीडि़त 289 लोगों की उपचार के दौरान मौत हो चुकी है। जबकि यह आंकड़ा कोरोना काल में भी नहीं थमा। कोरोना महामारी के दौरान सबसे अधिक 2020 में 103, 2021 में 75 लोगों की मौतें हुई है। जबकि कई टीबी के मरीज एवं मौतें तो सरकारी रिकार्ड में दर्ज ही नहीं हो पाते है। हर साल जांच के दौरान 2 हजार से अधिक नए मरीज सामने आ रहे है।