
सैलरी मिलने के बाद बचत के तरीके। फोटो: AI
Monthly Budget Planning: बढ़ती तनख्वाह को देखकर आपको भी लगता होगा कि हर महीने सैलरी आती है, अकाउंट में नंबर बड़ा दिखता है। लेकिन जैसे ही महीना खत्म होता है, बैलेंस देखकर होश उड़ जाते हैं। समझ में नहीं आता कि सैलरी जाती कहां है और इसे कैसे बचाया जाए? चार्टर्ड अकाउंटेंट मीना गोयल ने हाल ही में एक पोस्ट में यही सवाल उठाया कि जब 1.2 लाख रुपये महीने की सैलरी हो, तो आखिर पैसा जाता कहां है?
मीना गोयल के मुताबिक जिनकी सैलरी करीब 1.2 लाख रुपये प्रति महीने है, उनके खर्चों का ढांचा कुछ ऐसा होता है जो सुनने में मामूली लगता है लेकिन जोड़ने पर चौंका देता है। सबसे पहला और सबसे बड़ा खर्च है किराया, जो आमतौर पर 35,000 रुपये तक चला जाता है।
इसके बाद आती है EMI, जो हर महीने 30,000 रुपये तक खींच लेती है। यह चाहे होम लोन हो, कार लोन हो या पर्सनल लोन, किस्त तो आनी ही है। फिर है वो खर्च जो जरूरी नहीं होते लेकिन होते जरूर हैं, जैसे कि बाहर खाना, ओटीटी सब्सक्रिप्शन, शॉपिंग, वीकेंड घूमना, जो मिलाकर 20,000 रुपये से ज्यादा हो जाते हैं। इसके अलावा राशन, बिजली-पानी, मेडिकल और रोजमर्रा की जरूरतों पर 15,000 से 20,000 रुपये और खर्च हो जाते हैं। इन सबको जोड़ें तो सैलरी का बड़ा हिस्सा महीना शुरू होने से पहले ही खर्च हो चुका होता है।
यानी 1.2 लाख की सैलरी में से 85 फीसदी से ज्यादा हिस्सा खर्च हो जाता है और बमुश्किल 14 से 15 फीसदी यानी करीब 17,500 रुपये बचने की संभावना होती है। और अगर महीने में कोई एक अनचाहा खर्च आ जाए, तो यह बचत भी शून्य हो जाती है।
मीना गोयल के मुताबिक असली समस्या यह है कि लोग पहले खर्च करते हैं और जो बचता है उसे बचत मानते हैं। यह सोच बुनियादी रूप से गलत है। सच्ची वेल्थ क्रिएशन तब होती है जब सैलरी आते ही एक तय हिस्सा निवेश के लिए अलग कर दिया जाए, उसके बाद जो बचे उससे खर्च चलाया जाए। यह मामूली बदलाव सालों में बड़ा फर्क कर सकता है।
यह सुनने में छोटा आंकड़ा लग सकता है, लेकिन अगर हर महीने सिर्फ 5,000 रुपये एक्स्ट्रा बचाए जाएं, तो फर्क काफी बड़ा हो सकता है। यह बचत चाहे लाइफस्टाइल के खर्च को कम करके की जाए या EMI को रिस्ट्रक्चर करवाकर, नीचे देखें कि यह 5,000 रुपये की मासिक बचत अलग-अलग निवेश विकल्पों में साल भर में कितना बन सकती है।
| निवेश ऑप्शन | रिटर्न (%) | 1 साल में कुल जमा (₹) | ब्याज/रिटर्न (₹) | 1 साल बाद कुल राशि (₹) |
|---|---|---|---|---|
| सेविंग अकाउंट | 3.5% | 60,000 | 1,050 | 61,050 |
| FD (फिक्स्ड डिपॉजिट) | 7% | 60,000 | 2,100 | 62,100 |
| म्यूचुअल फंड SIP | 12% (अनुमानित) | 60,000 | 3,600 | 63,600 |
| इंडेक्स फंड SIP | 14% (अनुमानित) | 60,000 | 4,200 | 64,200 |
यानी सिर्फ 5,000 रुपये की अतिरिक्त बचत से एक साल में 60,000 से 64,200 रुपये तक का फंड तैयार हो सकता है। यह छोटा कदम आगे चलकर बड़े फाइनेंशियल गोल की नींव बन सकता है।
एक और पहलू जो अक्सर नजरअंदाज होता है, वह है लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन। जब सैलरी बढ़ती है तो खर्च भी उसी रफ्तार से बढ़ जाते हैं। नतीजा यह होता है कि इंसान अपने ही खर्चों के पीछे भागता रहता है और फाइनेंशियल स्टेबिलिटी कभी नहीं बन पाती। इसके साथ ही सिर्फ खर्च घटाने पर ध्यान देने की बजाय अपनी अर्निंग पोटेंशियल भी बढ़ानी चाहिए। नई स्किल सीखना, फ्रीलांस काम, या साइड इनकम के जरिए इनकम को बढ़ाना उतना ही जरूरी है।
Published on:
17 Apr 2026 10:34 am
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