
गाड़ी के साथ शोरूम से बीमा लेना जरूरी नहीं। फोटो: AI
Car Insurance Claim: अक्सर लोग नई कार या बाइक लेते समय मॉडल और कलर चुनने में तो घंटों बिताते हैं, लेकिन इंश्योरेंस के मामले में शोरूम वाले की बात पर आंख मूंदकर भरोसा कर लेते है। ग्राहकों को अक्सर 'ऑन-रोड' कीमत के नाम पर वह पॉलिसी थमा दी जाती है जिसमें डीलर का फायदा ज्यादा होता है। वाहन के लिए एक कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी ही खरीदें।
क्या डीलर से ही बीमा लेना जरूरी है?… कानूनी तौर पर वाहन का बीमा होना जरूरी है, लेकिन उसे डीलर से ही खरीदना अनिवार्य नहीं है। डीलर अक्सर ग्राहकों को यह कहकर डराते हैं कि बाहर से बीमा लेने पर क्लेम मिलने में दिक्कत होगी या वारंटी खत्म हो जाएगी, जबकि यह पूरी तरह गलत है। सच तो यह भी है कि डीलर को पॉलिसी बेचने पर मोटा कमीशन मिलता है, इसलिए वे अपनी पॉलिसी पर जोर देते हैं।
डीलरशिप पर अक्सर नो-क्लेम लबोनस की बात छिपाई जाती है। अगर आपने अपनी पुरानी गाड़ी पर कोई क्लेम नहीं लिया था, तो आप उस बोनस को अपनी नई गाड़ी के इंश्योरेंस में ट्रांसफर करा सकते हैं। इससे आपको प्रीमियम पर 20% से 50% तक की बड़ी छूट मिल सकती है। यह बोनस ड्राइवर का होता है, गाड़ी का नहीं।
कई बार डीलर की पॉलिसी सस्ती लगती है, लेकिन इसके लिए वे आइडीवी (इंश्योर्ड डेक्लेयर्ड वैल्यू) यानी वाहन की कीमत कम कर देते हैं। अगर गाड़ी चोरी हो जाए या पूरी तरह डैमेज हो जाए, तो आपको बाजार मूल्य से बहुत कम पैसा मिलेगा। इसके अलावा वे प्रीमियम घटाने के लिए जरूरी 'एड-ऑन्स' जैसे इंजन प्रोटेक्शन या कंज्यूमेबल्स कवर हटा देते हैं, जिसका खामियाजा यह है कि क्लेम के समय अपनी जेब से पैसा भुगतना करना पड़ता है।
पॉलिसी लेते समय सिर्फ कीमत नहीं देखें, बल्कि यह देखें कि उसमें आइडीवी कितनी है और क्या उसमें जीरो डेप्थ या इंजन कवर जैसे जरूरी फायदे शामिल हैं या नहीं। ऑनलाइन बीमा लेने पर पॉलिसी 10% तक सस्ती मिल सकती है। क्योंकि ऑनलाइन इंश्योरेंस में कोई एजेंट नहीं होता, इसलिए कंपनी कमीशन का पैसा सीधे ग्राहक को डिस्काउंट के तौर पर दे देती है. यह ऑफलाइन की तुलना में काफी सस्ता पड़ता है। इसके साथ ही आप एक ही स्क्रीन पर अलग-अलग कंपनियों के इंश्योरेंस की तुलना करके अपने लिए बेहतर प्लान चुन सकते हो।
Published on:
13 Apr 2026 11:34 am
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