
आठवें वेतन आयोग को लेकर नई अपडेट है। (PC: AI)
8th Pay Commission Latest News: एक करोड़ से ज्यादा केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजरें 8वें वेतन आयोग पर टिकी हैं। NCJCM ने जो मांगें रखी हैं, वो अगर मान ली गईं तो सरकारी कर्मचारियों की सैलरी की पूरी तस्वीर बदल जाएगी। 10 साल में एक बार वेतन आयोग आता है। 8वां वेतन आयोग अभी प्रस्तावित है, लेकिन केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नुमाइंदगी करने वाले राष्ट्रीय परिषद (संयुक्त सलाहकार तंत्र) यानी NCJCM ने अपनी मांगों का पूरा खाका तैयार कर लिया है और आयोग को सौंप दिया है। मांगें बड़ी हैं और उनके पीछे दलील भी पुख्ता है कि महंगाई, घर-खर्च और जीने का तरीका जिस तेजी से बदला है, उसी हिसाब से तनख्वाह भी बदलनी चाहिए।
सबसे पहली और सबसे बड़ी मांग न्यूनतम बेसिक वेतन 69,000 रुपए प्रति महीना करने की है। यह रकम यूं ही नहीं मांगी गई, इसके पीछे महंगाई, बाजार भाव और पांच लोगों के परिवार के खर्च का पूरा हिसाब जोड़ा गया है। साथ में एक समान फिटमेंट फैक्टर 3.83 की सिफारिश की गई है। यानी मौजूदा वेतन और पेंशन को इस गुणांक से गुणा करके नई रकम तय हो। इससे सभी स्तरों पर एक साथ संशोधन होगा और कोई पीछे नहीं छूटेगा।
अभी सालाना इंक्रीमेंट 3 फीसदी है। NCJCM चाहता है कि इसे दोगुना करके 6 फीसदी किया जाए। तर्क सीधा है। जब महंगाई हर साल 5 से 6 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रही हो तो 3 फीसदी इंक्रीमेंट असल में कमाई घटाने जैसा है।
मौजूदा वेतन ढांचे में बहुत सारे लेवल हैं, जो कई जगह उलझन पैदा करते हैं। NCJCM ने कुछ लेवल्स को आपस में मिलाने की मांग रखी है। लेवल 2 और 3 को मिलाकर लेवल 3 किया जाए, लेवल 4 और 5 को मिलाकर लेवल 5, लेवल 7 और 8 को मिलाकर लेवल 8, लेवल 9 और 10 को मिलाकर लेवल 10 किया जाए। इसके अलावा लेवल 5 वाले कर्मचारियों को एक बार लेवल 6 में अपग्रेड किया जाए। साथ ही लेवल 13 तक एक सरल और एकीकृत पे मैट्रिक्स बनाने की बात कही गई है, ताकि असमानताएं कम हों और प्रशासनिक पचड़ा भी घटे।
यह मांग थोड़ी अनोखी है, पर जरूरी भी। NCJCM ने कहा है कि वेतन ढांचे को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद यानी ICMR के पोषण मानकों से जोड़ा जाए। रोजाना 3,490 कैलोरी की जरूरत के हिसाब से वेतन तय हो, जिसमें प्रोटीन, डेयरी उत्पाद, फल और सब्जियां सब शामिल हों। मतलब जो तनख्वाह मिले वो कम से कम एक स्वस्थ जीवन जीने के लिए पर्याप्त हो।
वेतन के साथ-साथ भत्तों की संरचना बदलने की भी मांग है। मकान किराया भत्ते में 7.5 फीसदी हिस्सा, ईंधन, पानी और बिजली जैसी जरूरी चीजों के लिए 20 फीसदी, कौशल विकास के लिए 25 फीसदी और रोजमर्रा के खर्चों के लिए 25 फीसदी हिस्सा तय हो। यह ढांचा असल जिंदगी के खर्चों को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
NCJCM की यह तमाम सिफारिशें अगर आयोग ने मान लीं और सरकार ने लागू की, तो यह हाल के दशकों में वेतन ढांचे में सबसे बड़ा बदलाव होगा। लेकिन अभी राह लंबी है। आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा, सरकार उस पर विचार करेगी और फिर कोई फैसला होगा। फिलहाल करोड़ों कर्मचारी और पेंशनभोगी उम्मीद लगाए बैठे हैं।
Published on:
21 Apr 2026 05:16 pm
बड़ी खबरें
View Allकारोबार
ट्रेंडिंग
