
iPhone की कीमतों में इजाफा हो सकता है। (PC: AI)
Apple Price Hike: सस्ते स्मार्टफोन्स के दिन अब लदते दिख रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग पैसा बचाने के लिए नए लॉन्च हुए फोन्स की बजाए पुराने मॉडल्स के फोन खरीदते हैं। लेकिन अब उन स्मार्टफोन्स की कीमतें भी बढ़ सकती हैं। एपल अपना आईफोन 18 सितंबर में लॉन्च करने वाला है। लेकिन ऐसी रिपोर्ट्स आ रही हैं कि इस लॉन्चिंग से पहले आने वाले कुछ हफ्तों में आईफोन 15, आईफोन 16 और आईफोन 17 महंगे हो सकते हैं। आइए जानते हैं कि इसके पीछे क्या कारण है।
एपल ने गुरुवार रात अपने MacBook, iPad और Apple TV महंगे कर दिये हैं। एपल ने अपने ज्यादातर प्रोडक्ट्स की कीमतें 20 फीसदी से अधिक बढ़ा दी है। हालांकि, अभी आईफोन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह राहत ज्यादा दिनों की नहीं है। एपल द्वारा कीमतें बढ़ाने की वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की तेजी से बढ़ती डिमांड है। इससे पूरी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री की सप्लाई चेन का गणित बदल गया है।
AI सर्वर बनाने के लिए हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) और एडवांस स्टोरेज चिप्स की भारी डिमांड है। चिप बनाने वाली कंपनियां अब इन्हीं प्रोडक्ट्स पर ज्यादा फोकस कर रही हैं, क्योंकि इनमें ज्यादा मुनाफा मिल रहा है। इसका असर यह हुआ कि स्मार्टफोन, लैपटॉप और टैबलेट में इस्तेमाल होने वाले मेमोरी और स्टोरेज पार्ट्स की सप्लाई कम हो गई। नतीजा, लागत बढ़ गई। कंसोल स्टोरेज और मेमोरी की कीमतें 2.5 गुना से अधिक बढ़ चुकी हैं। कीमतों में लगातार इजाफे की आशंका जताई जा रही है।
मेमोरी बनाने वाली कंपनी माइक्रोन ने इस बार 84.9 फीसदी का ग्रॉस मार्जिन दर्ज किया है, जो एक साल पहले के 39 फीसदी से काफी ज्यादा है। इससे एआई फोकस्ड प्रोडक्ट्स की प्रॉफिटैबिलिटी और इस तरफ इंडस्ट्री के कैपिटल अलोकेशन का पता चलता है। विश्लेषकों के अनुसार, मेमोरी चिप्स की जो महंगाई आई है, उसमें जल्द कमी आने वाली नहीं है।
एपल के सीईओ टिम कुक पहले ही संकेत दे चुके थे कि लगातार बढ़ती लागत को कंपनी हमेशा अपने ऊपर नहीं ले सकती। उनका कहना था कि कंपनी ने कीमतें बढ़ने से रोकने की पूरी कोशिश की, लेकिन अब ऐसा करना संभव नहीं रह गया। पिछले एक साल में एपल ने अपनी मजबूत सप्लाई चेन और बड़े ऑर्डर की ताकत के दम पर ग्राहकों को बढ़ी हुई लागत का असर महसूस नहीं होने दिया। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि मेमोरी चिप्स की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं, इसलिए कंपनियों के पास कीमतें बढ़ाने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं बचा है।
सायबर मीडिया रिसर्च के वाइस प्रेसिडेंट प्रभु राम का कहना है कि एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश के कारण मेमोरी चिप्स की सप्लाई का बड़ा हिस्सा वहीं जा रहा है। इससे कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों पर लागत का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले महीनों में दूसरी टेक कंपनियां भी अपने प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ा सकती हैं। जिन कंपनियों की सप्लाई चेन एपल जितनी मजबूत नहीं है, उन्हें और ज्यादा दबाव झेलना पड़ सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, एपल ने करीब दो तिमाही तक कीमतें बढ़ाने से बचने की कोशिश की। लेकिन अब कंपनी के लिए बढ़ी हुई लागत खुद उठाना मुश्किल हो गया है। उनका मानना है कि अगले दो साल तक हालात में ज्यादा सुधार की उम्मीद नहीं है।
एक्सपर्ट्स के अनुसार, जब सभी इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट महंगे होंगे तो ग्राहक लंबे समय तक चलने वाले प्रीमियम डिवाइस खरीदना पसंद कर सकते हैं। इससे एपल को फायदा मिल सकता है, क्योंकि उसके प्रीमियम प्रोडक्ट्स की मांग मजबूत बनी रह सकती है।
एपल ने फिलहाल आईफोन की कीमतों में बदलाव नहीं किया है। लेकिन मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि कुछ ही हफ्तों में कीमतें बढ़ सकती हैं। आईडीसी में एनालिस्ट नवकेंदर सिंह का कहना है कि भारत में पिछले कुछ हफ्तों से iPhone 15, iPhone 16 और iPhone 17 सीरीज की सप्लाई सीमित रही है। ऐसे में जुलाई के दौरान ही इन मॉडलों की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। उनका मानना है कि एपल शायद सितंबर में नए आईफोन लॉन्च से पहले ही मौजूदा मॉडल महंगे कर दे।
Published on:
26 Jun 2026 05:54 pm
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