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ATF Price Hike: क्या दोगुना हो गई जेट फ्यूल की कीमत? इंडियन ऑयल ने बताया क्या है सच

ATF price hike: एटीएफ की कीमतों में 8.5 प्रतिशत बढ़ोतरी से एयरलाइंस की लागत बढ़ी है। सरकार और राज्य वैट कम करने पर विचार कर रहे हैं ताकि यात्रियों पर बोझ कम किया जा सके।

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IOC clarifies ATF price hike is only 8.5%, not 115%, but aviation sector challenges remain unresolved; learn the full impact

ATF 8.5% महंगा IndiGo, Air India के किराए और बढ़ेंगे। फोटो: एआइ

वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता का असर भारत के एविएशन सेक्टर पर लगातार देखने को मिल रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और सप्लाई चेन में बाधा के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव बना हुआ है। इसी बीच एटीएफ यानी एविएशन टरबाइन फ्यूल की कीमतों को लेकर सामने आई शुरुआती रिपोर्ट्स को अब संशोधित किया गया है, जिसमें बताया गया है कि बढ़ोतरी पहले बताए गए स्तर से काफी कम है।

एटीएफ कीमतों में वास्तविक बढ़ोतरी

पहले आई रिपोर्टो के मुताबिक दिल्ली में एटीएफ की कीमतें 2 लाख रुपये प्रति किलोलीटर के पार पहुंचने का अनुमान जताया गया था, यानी करीब 115 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की आशंका थी। लेकिन इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) ने स्पष्ट किया है कि वास्तविक बढ़ोतरी केवल 8.5 प्रतिशत है। इसके बाद अब एटीएफ की कीमत करीब 1.04 लाख रुपये प्रति किलोलीटर हो गई है।

यह बदलाव वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण हुआ है, जो ईरान अमेरिका और इजराइल के बीच जारी तनाव से प्रभावित है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) के अनुसार, एटीएफ पूरी तरह डिरेगुलेटेड प्रोडक्ट है और इसकी कीमतें अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क के आधार पर हर महीने तय होती हैं।

एयरलाइंस की लागत पर असर

भले ही बढ़ोतरी पहले की तुलना में कम हो, लेकिन इसका असर एयरलाइंस की लागत पर साफ दिख रहा है। एविएशन फ्यूल किसी भी एयरलाइन की कुल ऑपरेटिंग लागत का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा होता है। ऐसे में मामूली बढ़ोतरी भी कंपनियों के खर्च को काफी बढ़ा देती है। इंडिगो, एयर इंडिया और अकासा एयर जैसी एयरलाइंस ने पहले ही फ्यूल सरचार्ज में बदलाव शुरू कर दिया है और आगे भी किरायों में संशोधन की संभावना बनी हुई है।

एविएशन सेक्टर की अन्य चुनौतियां

नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) के मंत्री राम मोहन नायडू ने राज्यों से अपील की है कि वे एटीएफ पर लगने वाले वैट को कम करने पर विचार करें। दिल्ली, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों में यह टैक्स 18 से 29 प्रतिशत के बीच है, जिससे एयरलाइंस पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। इसके अलावा एविएशन सेक्टर पहले से ही लंबी उड़ानों और एयरस्पेस बंद होने के कारण अतिरिक्त ईंधन खर्च झेल रहा है, ऐसे में यह बढ़ोतरी उद्योग के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (IGI) और छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (CSMIA) जैसे प्रमुख हब भी इन परिस्थितियों से प्रभावित हो रहे हैं।