
RBI के पास काफी पैसा ऐसा पड़ा है, जिसका कोई दावेदार नहीं है। (PC: AI)
Unclaimed Bank Deposits: देश के बैंकों में बड़ी रकम ऐसी पड़ी है, जिस पर लंबे समय से किसी ने दावा नहीं किया है। सरकार की ओर से संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक, 31 जनवरी 2026 तक करीब 98,073 करोड़ रुपये की रकम आरबीआई के डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड यानी DEA Fund में ट्रांसफर की जा चुकी थी। यह आंकड़ा बताता है कि भूले-बिसरे बैंक खातों में कितनी बड़ी रकम फंसी हुई है। 30 जून 2025 तक यह राशि 90,545 करोड़ रुपये थी।
सरकार के मुताबिक, पुराने या गलत मोबाइल नंबर व पते, बैंक खाते को भूल जाना और खाताधारक की मौत इसके बड़े कारण हैं। कई मामलों में परिवार के लोगों या नॉमिनी को खाते की जानकारी ही नहीं होती। कुछ मामलों में नॉमिनी या कानूनी वारिस के पास रकम पर दावा करने के लिए जरूरी दस्तावेज भी नहीं होते। नतीजा यह होता है कि पैसा बैंक में पड़ा रहता है और धीरे-धीरे अनक्लेम्ड डिपॉजिट की कैटेगरी में चला जाता है।
अगर सेविंग या करंट अकाउंट में ग्राहक की तरफ से दो साल से ज्यादा समय तक कोई लेनदेन नहीं होता है, तो उसे आम तौर पर इनऑपरेटिव अकाउंट माना जाता है। अगर इसके बाद भी जमा रकम पर 10 साल तक कोई दावा नहीं किया जाता, तो बैंक को पात्र राशि आरबीआई के डीईए फंड में ट्रांसफर करनी होती है। लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है। आरबीआई के फंड में पैसा ट्रांसफर होने का मतलब यह नहीं है कि आपका पैसा खत्म हो गया।
खाताधारक, नॉमिनी या कानूनी वारिस बाद में भी संबंधित बैंक से संपर्क कर रकम पर दावा कर सकता है। दावा सही पाए जाने और प्रक्रिया पूरी होने के बाद बैंक को आरबीआई के डीईए फंड से रकम वापस मिल जाती है और ग्राहक को उसका पैसा दिया जाता है।
आरबीआई ने अनक्लेम्ड डिपॉजिट को सही व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए बैंकों को कई कदम उठाने को कहा है। बैंकों को खाताधारकों, नॉमिनी और कानूनी वारिसों का पता लगाने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। बैंकों को अपनी वेबसाइट पर अनक्लेम्ड डिपॉजिट की जानकारी भी समय-समय पर पब्लिश करनी होती है। अगर ग्राहक की संपर्क जानकारी उपलब्ध है, तो बैंक को पत्र, ईमेल या SMS के जरिए संपर्क करना होता है। ईमेल और SMS के जरिए संपर्क हर तिमाही किया जाता है।
आरबीआई ने अक्टूबर 2025 में बैंकों के लिए एक प्रोत्साहन योजना भी शुरू की थी। इसके तहत सफलतापूर्वक किसी अनक्लेम्ड डिपॉजिट का दावा निपटाने पर बैंक को रकम का 5% से 7.5% तक प्रोत्साहन मिल सकता है। हालांकि, इसके लिए एक तय सीमा भी रखी गई है। इस योजना का मकसद है कि बैंक खुद आगे बढ़कर सही खाताधारक या उसके परिवार तक पहुंचें और पुराने दावों का जल्द निपटारा करें।
अगर आपको लगता है कि आपका या परिवार के किसी सदस्य का पुराना बैंक खाता है, लेकिन उसकी जानकारी नहीं मिल रही, तो RBI का UDGAM पोर्टल काम आ सकता है। इस पोर्टल के जरिए बैंकों में मौजूद अनक्लेम्ड डिपॉजिट की जानकारी खोजी जा सकती है। हालांकि, UDGAM सिर्फ रकम खोजने की सुविधा देता है। यहां से सीधे पैसे का भुगतान नहीं होता। अगर कोई जमा राशि मिलती है तो संबंधित बैंक से संपर्क करके उसकी क्लेम प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
अगर परिवार में किसी सदस्य की मौत हो चुकी है, तो उसके पुराने बैंक खातों और जमा रकम की जानकारी जरूर जांचनी चाहिए। खासकर उन खातों को लेकर सतर्क रहें, जिनमें नॉमिनी की जानकारी अपडेट नहीं है। बैंक खाते, नॉमिनेशन और उत्तराधिकार से जुड़े दस्तावेजों को समय-समय पर अपडेट रखना भी जरूरी है। थोड़ी सी सावधानी से आपकी मेहनत की कमाई को लंबे समय तक बैंक में बिना दावे के पड़े रहने से बचाया जा सकता है।
Updated on:
12 Aug 2026 02:38 pm
Published on:
12 Aug 2026 02:38 pm
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