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70% कर्मचारियों ने माना नौकरी चली गई तो 6 महीने से ज्यादा नहीं चला पाएंगे घर का खर्चा, अस्पताल का बिल है सबसे बड़ा डर

Health insurance: टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी की नई स्टडी में खुलासा हुआ है कि 84% कर्मचारी एक्स्ट्रा हेल्थ इंश्योरेंस को जरूरी मानते हैं। फिर भी 45% के पास कोई अतिरिक्त कवर नहीं। ऐसे में एक बड़ी समस्या तब आती है जब नौकरी बदली जाती है।
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कर्मचारियों में अक्सर हेल्थ इंश्योरेंस को लेकर चिंता बनी रहती है। (PC: AI)

Health Protection Gap: अगर आप भी यह सोचकर बेफिक्र हैं कि आपकी कंपनी का हेल्थ इंश्योरेंस आपको मेडिकल इमरजेंसी में पूरी तरह सुरक्षित रखेगा, तो एक नई स्टडी आपकी यह सोच बदल सकती है। इस स्टडी में पता चला है कि 84 फीसदी कर्मचारी मानते हैं कि उन्हें कंपनी के इंश्योरेंस के अलावा एक्स्ट्रा हेल्थ कवर लेना चाहिए। लेकिन इसके बावजूद 45 फीसदी कर्मचारियों के पास आज भी कोई एक्स्ट्रा हेल्थ इंश्योरेंस नहीं है। यानी जानकारी होने के बावजूद आधे से ज्यादा लोग खुद को सुरक्षित करने में पीछे रह गए हैं।

हेल्थ इंश्योरेंस को लेकर रिपोर्ट के आंकड़े

सर्वे में सामने आई बातप्रतिशत
एम्पलॉयर के GMC के अलावा अतिरिक्त हेल्थ इंश्योरेंस जरूरी मानने वाले लोगों की संख्या84%
एम्पलॉयर के GMC के अलावा कोई अतिरिक्त हेल्थ इंश्योरेंस नहीं रखने वाले लोग45%
इमरजेंसी में अस्पताल में भर्ती होने पर सिर्फ कंपनी का GMC पर्याप्त नहीं है, ऐसा मानने वाले लोगों की संख्याकरीब 75%
कंपनी के GMC की सभी सुविधाओं और फायदों की पूरी जानकारी रखने वाले लोगों की संख्या41%
नौकरी बदलने के दौरान बिना किसी रुकावट के हेल्थ कवर जारी रहना जरूरी मानने वाले लोगों की संख्या88%
नौकरी बदलने के दौरान हेल्थ कवर जारी रखने वाले विकल्पों की जानकारी रखने वाले लोगों की संख्या40%
नौकरी जाने के बाद 6 महीने या उससे कम समय तक ही आर्थिक रूप से टिक सकते हैं।करीब 70%
नौकरी के बिना एक साल से ज्यादा समय तक आर्थिक रूप से गुजारा कर सकते हैं।12%
सर्वे में शामिल कॉरपोरेट कर्मचारियों की संख्या748+
Source:  TATA AIG’s The Corporate Health Protection Pulse 2026.

कैसे हुई यह स्टडी?

यह जानकारी टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी की रिपोर्ट 'द कॉरपोरेट हेल्थ प्रोटेक्शन पल्स 2026' से सामने आई है। इस सर्वे में मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, अहमदाबाद, पुणे और कोलकाता के 748 से ज्यादा कॉरपोरेट कर्मचारियों को शामिल किया गया, जिनकी उम्र 28 से 55 साल के बीच थी। ये सभी लोग अपनी कंपनी के ग्रुप मेडिकल कवर (GMC) के दायरे में आते हैं। स्टडी के मुताबिक ज्यादातर कर्मचारी अतिरिक्त हेल्थ कवर की जरूरत को समझते हैं, लेकिन फिर भी उसे खरीदने में देरी करते हैं। खासकर 28 से 34 साल के युवा कर्मचारियों में जानकारी की कमी और 'बाद में ले लेंगे' वाली सोच सबसे बड़ी वजह बनकर सामने आई है।

नौकरी बदलने पर होती है परेशानी

सबसे बड़ी समस्या नौकरी बदलते समय आती है, जिसमें कई प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों में GMC आमतौर पर लास्ट वर्किंग डे पर खत्म हो जाता है। ऐसे में नई कंपनी का कवर शुरू होने में कुछ दिन से लेकर कुछ हफ्ते तक का गैप पड़ सकता है। इस दौरान अगर अस्पताल जाना पड़े तो पूरा खर्च अपनी जेब से देना पड़ सकता है। ऐसे में सबसे पहले अपनी मौजूदा कंपनी की पॉलिसी को अच्छी तरह जांचना चाहिए और पता लगाएं कि क्या यह पॉलिसी उसी इंश्योरेंस कंपनी के इंडिविजुअल या फैमिली फ्लोटर प्लान में बदली (माइग्रेट) जा सकती है। IRDAI के नियमों के मुताबिक, ग्रुप हेल्थ पॉलिसी के मेंबर्स को लागू शर्तों के अधीन उसी इंश्योरर के साथ इंडिविजुअल या फैमिली फ्लोटर पॉलिसी में माइग्रेट करने का अधिकार मिलता है।