
Wealth Creation में 5 गलतियों को सुधारना जरूरी है। (PC: Freepik)
Wealth Creation Tips: अगर आप अपनी कमाई का सही इस्तेमाल करना सीख जाएं, तो कम उम्र में ही करोड़ों रुपये का फंड तैयार कर सकते हैं। आज भारत में अरबपतियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन आम मिडिल क्लास को फाइनेंशियल नॉलेज नहीं होने के कारण वह अमीर नहीं बन पा रहा। नेशनल सेंटर फॉर फाइनेंशियल एजुकेशन के अनुसार भारत में सिर्फ 27 फीसदी लोग ही वित्तीय रूप से साक्षर हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और वित्तीय साक्षरता के आंकड़े बताते हैं कि हमारी छोटी-छोटी आदतें हमें कर्ज के जाल में फंसा रही हैं।
आज की पीढ़ी अपने माता-पिता से ज्यादा कमा रही है, लेकिन उनके पास बचाने के लिए कुछ नहीं बच रहा। आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय परिवारों की वित्तीय बचत ऐतिहासिक रूप से सबसे निचले स्तर पर आ गई है। लोग फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) या स्मार्ट इन्वेस्टमेंट में पैसा लगाने के बजाय ईएमआई (EMI) और शॉपिंग पर ज्यादा खर्च कर रहे हैं।
पर्सनल लोन, अभी खरीदे बाद में भुगतान करें (बाय नाउ पे लेटर) जैसी स्कीम और लगातार बढ़ती ईएमआई युवाओं की कमाई को खा रही हैं। 24 फीसदी तक के भारी ब्याज वाले पर्सनल लोन जेब पर बहुत भारी पड़ते हैं। आज कई युवा एक साथ 5 से 6 लोन चला रहे हैं, जिससे वे कभी निवेश ही नहीं कर पाते।
नेशनल सेंटर फॉर फाइनेंशियल एजुकेशन के अनुसार, भारत में केवल 27 फीसदी लोग ही वित्तीय रूप से साक्षर हैं। चार में से तीन भारतीयों को महंगाई, कंपाउंडिंग और बचत-निवेश का अंतर ही नहीं पता। इसी वजह से एफडी में रखा पैसा महंगाई और टैक्स के कारण अपनी असली वैल्यू खो देता है।
भारतीय परिवारों की एक बड़ी गलती यह है कि वे इंश्योरेंस को निवेश समझ लेते हैं। मनी-बैक जैसी पारंपरिक पॉलिसियों में न तो अच्छा रिटर्न मिलता है और न ही पर्याप्त लाइफ कवर। समझदारी इसी में है कि सुरक्षा के लिए केवल 'प्योर टर्म इंश्योरेंस' लें और निवेश के लिए अलग से म्यूचुअल फंड में निवेश करें।
एक अनुमान के मुताबिक, भारत के 72 फीसदी परिवारों के पास तीन महीने के खर्च के बराबर भी इमरजेंसी फंड नहीं है। नौकरी जाने या मेडिकल इमरजेंसी के समय ऐसे लोगों को भारी ब्याज पर कर्ज लेना पड़ता है। हर परिवार के पास कम से कम 6 से 9 महीने के खर्च के बराबर लिक्विड इमरजेंसी फंड होना ही चाहिए।
अमीर बनने के लिए बड़ी सैलरी की नहीं, सही व्यवहार की जरूरत है। जैसे ही सैलरी आए, सबसे पहले एसआईपी (SIP) के जरिए निवेश को ऑटोमैटिक मोड पर डाल दें। एसआईपी की शुरुआत मात्र 100 रुपये से भी हो सकती है। अगर आप 35 की उम्र के बजाय 25 की उम्र में एसआईपी शुरू करते हैं, तो रिटायरमेंट तक सिर्फ समय के फायदे यानी कि कंपाउंडिंग की ताकत से ही 2 करोड़ रुपये से ज्यादा का अंतर आ सकता है।
Published on:
24 Jun 2026 06:46 pm
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