
एमएसएमई के लिए कई सरकारी योजनाएं हैं। (PC: AI)
Budget 2026: नीति आयोग ने एमएसएई कंपनियों की दक्षता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं को एकसाथ जोड़ने की सिफारिश की। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा, एमएसएमई से जुड़ी कई सरकारी योजनाओं में आपसी तालमेल की कमी है और काम का दोहराव हो रहा है। इससे योजनाओं का पूरा फायदा आम लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, अलग-अलग मंत्रालय और विभाग एमएसएमई के लिए योजनाएं चला रहे हैं।
कई योजनाओं के उद्देश्य एक जैसे हैं- जैसे कर्ज मदद, कौशल प्रशिक्षण, मार्केटिंग सहायता व तकनीकी सहयोग। क्योंकि ये योजनाएं अलग-अलग चलाई जाती हैं, इसलिए पैसा और संसाधन बिखर जाते हैं। कई बार एक ही काम दो बार किया जाता है। इससे योजनाओं की प्रभावशीलता कम हो जाती है। नीति आयोग के सदस्य अरविंद विरमानी ने इस रिपोर्ट को जारी किया है।
कुछ खास योजनाओं को पूरी तरह मिलाया नहीं जाना चाहिए। जैसे पीएम रोजगार सृजन कार्यक्रम और पीएम विश्वकर्मा योजना। इनका उद्देश्य खास वर्गों को सीधे लाभ पहुंचाना है।
सरकारी योजनाएं: एमएसएमई को 18 योजनाओं में से 4-5 की ही जानकारी। 10% इकाइयों ने ही निवेश मित्र, एनसीडी इंडिया और जेम पोर्टल का इस्तेमाल किया।
कुशल श्रमबल: 88% उद्यम कौशल विकास योजना का लाभ नहीं उठा रहे हैं। 31% प्रशिक्षण कार्यक्रम को प्रासंगिक नहीं मानते हैं।
फंडिंग: सस्ते कर्ज का अभाव, पूंजी बाजारों तक सीमित पहुंच फंडिंग में बड़ी बाधा हैं। बैंक इनसे बड़ी कंपनियों की तुलना में 4% अधिक ब्याज वसूलते हैं।
टेक्नोलॉजी: 60% छोटे उद्यम पुरानी मशीनरी इस्तेमाल करते हैं, जिससे उत्पादकता प्रभावित। अधिक लागत नई तकनीक अपनाने की राह में बाधा है।
Published on:
16 Jan 2026 01:26 pm
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