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फूड डिलीवरी ऐप्स की लूट! रेस्टोरेंट में सस्ता लेकिन ऐप्स पर महंगा खाना; पढ़कर चौंक जाएंगे

LocalCircles Survey: सर्वे में 95% से ज्यादा लोगों ने डिलीवरी में पैकेजिंग और फूड क्वालिटी की शिकायत की है। जैसे कि खाना अक्सर ब्लैक प्लास्टिक कंटेनर्स में डिलीवर किया जाता है

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उपभोक्ताओं की शिकायत है कि फूड डिलीवरी ऐप्स कीमतें बढ़ा-चढ़ाकर दिखाते हैं। (PC: AI Chatgpt)

25 दिसंबर और 31 दिसंबर, 2025 को हुई गिग वर्कर्स की देशव्यापी हड़तालों ने फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स जैसे जोमैटो और स्विगी की मुश्किलें बढ़ा दीं हैं। वर्कर्स अपनी डिमांड्स को लेकर मुद्दा अभी गर्माया हुआ है। तो, दूसरी तरफ अब उपभोक्ताओं की नाराजगी भी सामने आ रही है। लोकलसर्कल्स के एक सर्वे में खुलासा हुआ है कि 55% उपभोक्ता मानते हैं कि ऐप पर खाने की कीमत रेस्टोरेंट्स से भी ज्यादा होती है।

गजब की लूट! ऐप्स पर महंगा, रेस्टोरेंट्स में सस्ता

उपभोक्ताओं की शिकायत है कि फूड डिलीवरी ऐप्स कीमतें बढ़ा-चढ़ाकर दिखाते हैं। लोकल सर्वे में 55% उपभोक्ताओं ने कहा कि ऐप पर खाने की जो कीमतें हैं, वो रेस्टोरेंट से भी ज्यादा हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि रेस्टोरेंट्स जोमैटो और स्विगी जैसे प्लेटफॉर्म्स को 20-30% कमीशन देते हैं, जिसका बोझ आखिर में उपभोक्ता की जेब पर पड़ता है। उपभोक्ताओं ने प्राइसिंग में ज्यादा पारदर्शिता की मांग की है, 87% उपभोक्ता चाहते हैं कि ऐप पर रेस्टोरेंट्स डाइन-इन, पिकअप और ऑनलाइन दोनों प्राइस दिखाएं जाएं। ताकि पारदर्शिता आए। डिस्काउंट्स के मामले में भी निराशा है। एक-तिहाई लोगों को ज्यादातर ऑर्डर्स पर डिस्काउंट मिला, लेकिन 45% को बैंक या रेस्टोरेंट डिस्काउंट से ज्यादा फायदा नहीं हुआ।

हिडेन चार्जेस को लेकर शिकायत

इसके अलावा हिडेन चार्जेस जैसे पैकेजिंग फीस, प्लेटफॉर्म फीस, डिलीवरी चार्ज और टैक्सेस अंत में फूड बिल को और महंगा कर देते हैं। सर्वे में 74% लोगों ने टैक्स, चार्जेस और हाई लिस्ट प्राइस को सबसे बड़ा मुद्दा बताया है। केवल 9% लोगों ने ही सिर्फ टैक्स, चार्जेस को और 10% ने सिर्फ हाई मेन्यू प्राइस की शिकायत की है, जिनके मुताबिक ऐप्स पर कीमतें ज्यादा हैं, रेस्टोरेंट के मुकाबले। जबकि 55% को दोनों में ही समस्या लगी। दिलचस्प बात यह कि 37% उपभोक्ताओं ने कहा कि कभी-कभी ऐप पर कुल बिल रेस्टोरेंट के बिल से कम आया। जिसमें से 17% ने कहा कि बिल कई बार कम आया तो 20% ने कहा कि 1 या 2 बार ही ऐसा हुआ।

पैकेजिंग और फूड क्वालिटी

सर्वे में 95% से ज्यादा लोगों ने डिलीवरी में पैकेजिंग और फूड क्वालिटी की शिकायत की है। जैसे कि खाना अक्सर ब्लैक प्लास्टिक कंटेनर्स में डिलीवर किया जाता है, जिसमें फ्थेलेट्स, फ्लेम रिटार्डेंट्स और हेवी मेटल्स जैसे हानिकारक केमिकल्स लेड, कैडमियम, निकल, क्रोमियम और मरक्यूरी शामिल हो सकते हैं। ये केमिकल्स खाने में घुल सकते हैं और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकते हैं, जिसमें कैंसर भी शामिल है। 56% तक उपभोक्ताओं ने बताया कि उन्हें डैमेज्ड, स्पिल्ड या स्पॉइल्ड कंटेनर्स में फूड मिला।

यह सर्वे 359 जिलों के 79,000 से ज्यादा उपभोक्ताओं से लिया गया। इसमें 61% पुरुष और 39% महिलाएं शामिल थीं। टियर-1 शहरों से 45%, टियर-2 से 33% और टियर-3,4 और ग्रामीण इलाकों से 22% रिस्पॉन्स आए। सर्वे से पता चला कि 75% लोग फूड डिलीवरी ऐप्स यूज करते हैं, जिनमें 58% महीने में 1-5 बार ऑर्डर करते हैं।