
शेयर बाजार में FPI की बिकवाली लगातार जारी है। (PC: AI)
Share Market Crash: भारतीय शेयर बाजार पर विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। साल 2026 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI ने जिस तेजी से पैसा निकाला है, उसने बाजार के साथ-साथ रुपये की हालत भी खराब कर दी है। हालात ऐसे हैं कि घरेलू निवेशकों की खरीदारी के बावजूद बाजार संभल नहीं पा रहा। एनएसडीएल के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल अब तक विदेशी निवेशक सेकेंडरी मार्केट से 2.16 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली कर चुके हैं। यह रकम पिछले पूरे साल 2025 के कुल आउटफ्लो से भी ज्यादा है। दूसरी तरफ प्राइमरी मार्केट में विदेशी निवेश सिर्फ 12,468 करोड़ रुपये के आसपास रहा है।
बाजार जानकारों का कहना है कि दुनियाभर का पैसा अब AI और अमेरिकी टेक कंपनियों की तरफ तेजी से जा रहा है। इसी वजह से भारत समेत कई उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी निकल रही है। हालांकि, अच्छी बात यह है कि घरेलू संस्थागत निवेशक यानी DII लगातार खरीदारी कर रहे हैं और अब भारतीय शेयर बाजार में उनकी हिस्सेदारी विदेशी निवेशकों से ज्यादा हो गई है।
आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय शेयर बाजार में FPI की हिस्सेदारी पिछले 10 साल में करीब 20 फीसदी से घटकर 15 फीसदी रह गई है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यह गिरावट और तेज हुई। उसी दौरान अमेरिकी टेक शेयरों में भी नई तेजी शुरू हुई थी। दिलचस्प बात यह है कि विदेशी निवेशकों की कुल हिस्सेदारी भले कम हुई हो, लेकिन जिन कंपनियों में उनकी 1 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी है, उनकी संख्या बढ़ गई है। पहले यह संख्या करीब 900 थी, जो अब बढ़कर 1300 के आसपास पहुंच गई है। यानी विदेशी निवेशक अब चुनिंदा शेयरों में ज्यादा फोकस कर रहे हैं।
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी के विजयकुमार का कहना है कि लंबे समय में बाजार सिर्फ विदेशी निवेशकों के भरोसे नहीं चलता। हालांकि, शॉर्ट टर्म के लिए उनकी बिकवाली बाजार का मूड जरूर बिगाड़ देती है। अभी भी यही हो रहा है। घरेलू निवेशकों की मजबूत खरीदारी के बावजूद बाजार कमजोर बना हुआ है। अप्रैल 2026 में विदेशी निवेशकों ने सबसे ज्यादा बिकवाली फाइनेंशियल सेक्टर में की थी। इसके अलावा हेल्थकेयर, ऑटो, एनर्जी और कंज्यूमर सेक्टर में भी जमकर पैसा निकाला गया।
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और बढ़ते करंट अकाउंट डेफिसिट का असर रुपये पर भी साफ दिखाई दे रहा है। साल की शुरुआत में डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 90 के स्तर पर था, लेकिन अब यह 96 के पार निकल चुका है। महंगे कच्चे तेल और मिडिल ईस्ट तनाव ने इस दबाव को और बढ़ा दिया है।
एसबीआई सिक्योरिटीज के सनी अग्रवाल का कहना है कि म्यूचुअल फंड SIP की लगातार आने वाली रकम बाजार को बड़ी गिरावट से बचाने में मदद कर रही है। अगर घरेलू निवेशकों का सपोर्ट नहीं होता, तो बाजार में और ज्यादा उथल-पुथल देखने को मिल सकती थी।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि फिलहाल जल्दबाजी में बड़े निवेश से बचना चाहिए। बाजार में अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। मिडिल ईस्ट संकट, महंगा कच्चा तेल और ग्लोबल तनाव आने वाले समय में और असर दिखा सकते हैं। कांतिलाल छगनलाल सिक्योरिटीज के महेश ओझा का कहना है कि यह गिरावट सिर्फ फंडामेंटल वजहों से नहीं, बल्कि डर और अनिश्चितता की वजह से है। उन्होंने सलाह दी है कि निवेशक अभी कैश ज्यादा रखें और इक्विटी के मुकाबले डेट या लिक्विड फंड पर ज्यादा ध्यान दें। हालांकि, SIP निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि गिरते बाजार में एवरेजिंग का फायदा मिलता है।
रिलिगेयर ब्रोकिंग के अजीत मिश्रा का मानना है कि जब तक वैश्विक हालात साफ नहीं होते, तब तक एकमुश्त निवेश से बचना बेहतर होगा। उन्होंने घरेलू मांग से जुड़े सेक्टर्स में धीरे-धीरे निवेश की सलाह दी है। उनके मुताबिक निफ्टी के लिए 23,150 का स्तर अहम सपोर्ट है, जबकि 22,000 के नीचे जाने पर बाजार में और दबाव बढ़ सकता है।
वहीं, ट्रेडर्स के लिए एक्सपर्ट का कहना है कि जब तक निफ्टी दोबारा 24,000 के स्तर को हासिल नहीं कर लेता, तब तक बाजार को लेकर निगेटिव नजरिया बनाए रखना चाहिए। मिश्रा ने कहा कि फिलहाल निफ्टी के लिए 23,150 के आसपास मजबूत सपोर्ट दिखाई दे रहा है, क्योंकि यह गैप एरिया है। उनके मुताबिक, अगर निफ्टी इस स्तर को बचाने में नाकाम रहता है, तो बाजार में गिरावट का अगला दौर शुरू हो सकता है। वहीं, अगर यह स्तर कायम रहता है, तो बाजार कुछ समय तक सीमित दायरे में यानी कंसोलिडेशन फेज में रह सकता है। वहीं, ओझा ने कहा कि मौजूदा हालात में ओवरनाइट पोजिशन लेना सही नहीं है। अगर आप ट्रेडर हैं, तो अपनी पोजिशन रोजाना के हिसाब से स्क्वायर ऑफ करें। वहीं, अगर पोजिशन कैरी फॉरवर्ड कर रहे हैं, तो हेजिंग जरूर करें, ताकि जोखिम कम किया जा सके।
Updated on:
18 May 2026 06:50 pm
Published on:
18 May 2026 06:50 pm
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