
गोल्ड ओवरड्राफ्ट में क्रेडिट लिमिट मिलती है। (PC: AI)
Gold Overdraft: हर भारतीय घर में कुछ न कुछ सोना जरूर होता है। कहीं शादी के जेवर हैं, कहीं सिक्के हैं, कहीं मां की पुरानी चूड़ियां हैं। यह सोना अलमारी में बंद पड़ा रहता है। न इससे कुछ कमाई होती है, न यह किसी काम आता है। बस यह एक डर में रखा जाता है कि "बुरे वक्त में काम आएगा।" लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज उस सोने को बेचे बिना भी उससे पैसा निकाला जा सकता है? और यह काम करता है गोल्ड ओवरड्राफ्ट।
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय घरों में रखे सोने की कुल कीमत करीब 5 ट्रिलियन डॉलर है। यह उनकी गैर-संपत्ति दौलत का 65 फीसदी हिस्सा है। अर्था भारत इन्वेस्टमेंट के फाउंडर सचिन सावरीकर बताते हैं कि भारत में हर घर में औसतन 100 से 150 ग्राम सोना है जिसकी कीमत आज के भाव पर 15 से 20 लाख रुपये के बीच है।यह पैसा बस पड़ा है। न इस पर ब्याज मिलता है, न कोई रिटर्न। लेकिन जरूरत पड़ने पर यह तुरंत काम आ सकता है, बशर्ते आपको सही तरीका पता हो।
सीधे शब्दों में कहें तो गोल्ड ओवरड्राफ्ट ऐसी सुविधा है जिसमें आप अपना सोना बैंक या NBFC के पास गिरवी रखते हैं और बदले में एक क्रेडिट लिमिट मिलती है। यह बिल्कुल क्रेडिट कार्ड की तरह काम करता है। लिमिट मिल गई। जब चाहें पैसे निकालें। जितना निकाला उतने पर ब्याज। जितना नहीं निकाला उस पर कोई ब्याज नहीं। सोना आपका ही रहता है। बस बैंक के पास जमा रहता है।
यहीं पर ज्यादातर लोग उलझ जाते हैं। गोल्ड लोन में आप सोना गिरवी रखते हैं और पूरी रकम एक साथ मिल जाती है। मान लीजिए 5 लाख का लोन लिया तो 5 लाख खाते में आ जाते हैं। ब्याज 5 लाख पर पहले दिन से ही लगना शुरू हो जाता है। गोल्ड ओवरड्राफ्ट में 5 लाख की लिमिट मिली, लेकिन आपने सिर्फ 2 लाख निकाले, तो ब्याज सिर्फ 2 लाख पर और सिर्फ उतने दिनों के लिए जितने दिन वो पैसा आपके पास रहा।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के सीनियर इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट गिबिन जॉन कहते हैं कि अगर आपको एकमुश्त बड़ी रकम नहीं चाहिए, बल्कि थोड़े-थोड़े पैसे अलग-अलग वक्त पर चाहिए तो गोल्ड ओवरड्राफ्ट बेहतर है।
5 लाख से ज्यादा के लोन पर सोने की कीमत का 75 फीसदी तक मिल सकता है। यानी 20 लाख के सोने पर करीब 15 लाख तक की लिमिट। ब्याज दर की बात करें तो बड़े बैंकों में गोल्ड लोन 8.75 से 9.30 फीसदी सालाना के बीच है। गोल्ड ओवरड्राफ्ट की दरें भी इसी के आसपास हैं। हालांकि, प्रोसेसिंग चार्ज थोड़ा ज्यादा हो सकता है।
सावरीकर एक अच्छी बात कहते हैं कि जब सोना बैंक के पास जमा होता है तो उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी बैंक की हो जाती है। घर में लॉकर का झंझट नहीं, बीमा का खर्च नहीं। सोना आपका ही रहता है। कीमत बढ़ती है तो फायदा आपको। बस वो बैंक के पास रहता है। मेडिकल इमरजेंसी हो, बच्चे की फीस भरनी हो या कारोबार में अचानक पैसे की जरूरत पड़ जाए, गोल्ड ओवरड्राफ्ट उस वक्त काम आता है जब जेब खाली हो लेकिन सोना भरा हो।
हर चीज के दो पहलू होते हैं। गोल्ड ओवरड्राफ्ट की अवधि गोल्ड लोन से कम होती है और इसे समय-समय पर रिन्यू करवाना पड़ता है। तारीखें चूकीं तो जुर्माना लगेगा। अगर सोने की कीमत गिरी तो बैंक और सोना जमा करने को कह सकता है। सबसे बड़ा खतरा जो सावरीकर बताते हैं वो यह है कि आसान पैसे की सुविधा होने पर जरूरत से ज्यादा निकालने का लालच हो जाता है। अगर भुगतान नहीं हुआ तो बैंक सोना नीलाम भी कर सकता है। इसलिए जितना जरूरी हो उतना ही निकालें।
Published on:
07 Apr 2026 05:24 pm
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