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88 रुपये का 10 ग्राम सोना, ढाई रुपये किलो घी, 25 पैसे किलो आलू और 27 पैसे में एक लीटर पेट्रोल… एक दौर वह भी था

Gold Price in 1947: जब देश आजाद हुआ था, उस समय सोने की कीमत सिर्फ 88 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। 27 रुपये में एक लीटर पेट्रोल मिल जाता था। उस समय दिल्ली से मुंबई की फ्लाइट का किराया सिर्फ 140 रुपये था।

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Aug 15, 2025
1947 में सोना 88 रुपये प्रति 10 ग्राम में बिकता था। (PC: Gemini)

दुनियाभर में मौजूद हर एक भारतीय आज 79वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। हमारे देश को आजाद हुए आज 78 साल पूरे हो चुके हैं। 15 अगस्त 1947 को भारत को ब्रिटिश राज से आजादी मिली थी। इसके बाद से भारत ने एक लंबी इकोनॉमिक जर्नी पूरी की है। भारत आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। हमारी जीडीपी 4 लाख करोड़ डॉलर के आंकड़े को पार कर गई है। 78 साल के इस लंबे अंतराल में वस्तुओं की कीमतें भी काफी बढ़ गई हैं।

उस दौर में आना, पाई और पैसे जैसे सिक्के खूब चला करते थे, आज ये प्रचलन में नहीं है। आज एक रुपये से कम में कोई सामान नहीं मिलता है। आजादी के समय 1 रुपये में आप 4 किलो आलू खरीद सकते थे।

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ढाई रुपये में 1 किलो घी

1947 और 2025 में वस्तुओं की कीमतों को देखें, तो जमीन-आसमान का अंतर आपको दिखेगा। 1947 का दौर आज के समय से बिल्कुल अलग था। उस समय सिर्फ ढाई रुपये में एक किलो प्योर घी मिल जाता था। दूध की कीमत सिर्फ 12 पैसे प्रति लीटर थी। सिर्फ 40 पैसे में आप एक किलो चीनी खरीद सकते थे। 25 पैसे में एक किलो आलू मिल जाते थे। गेंहू की कीमतें तो काफी कम थी। 1 रुपये में आप कई किलो खरीद सकते थे। उस समय सिर्फ 4 रुपये में महीने भर का घर का राशन आ जाता था।

सिर्फ 88 रुपये में 10 ग्राम सोना

आज सोने का भाव 1 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार है। क्या आप सोच सकते हैं कि साल 1947 में सोना किस भाव मिलता था। उस समय सोने की कीमत सिर्फ 8.8 रुपये प्रति ग्राम थी। यानी 88 रुपये में 10 ग्राम सोना मिल जाता था। उस समय सोने की कीमत ग्लोबल फिक्स्ड गोल्ड स्टैंडर्ड सिस्टम से प्रभावित होती थी और करीब-करीब स्टेबल रहती थी। इसके बाद इकोनॉमी को मैनेज करने के लिए गोल्ड आयात में धीरे-धीरे सख्ती लाने और विदेशी मुद्रा भंडार में सोना रखने से सोने की सप्लाई प्रभावित हुई।

27 पैसे में एक लीटर पेट्रोल

साल 1947 में सिर्फ 27 पैसे में एक लीटर पेट्रोल आ जाता था। उस समय दिल्ली से मुंबई की फ्लाइट का किराया सिर्फ 140 रुपये था। उस समय भारत में सिर्फ एयर इंडिया ही एक एयरलाइन थी।

तेजी से क्यों बढ़े भाव?

1990 के दशक में आर्थिक उदारीकरण, महंगाई में बदलाव और डिमांड पैटर्न में बदलाव के कारण कीमतों में तेजी आई। इसके साथ ही महंगाई, करेंसी वैल्यूएशंस और भू-राजनीतिक तनाव जैसे वैश्विक कारक भी कीमतों को प्रभावित करने लगे।

Published on:
15 Aug 2025 03:41 pm
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