
EPF यानी कर्मचारी भविष्य निधि (AI Generated Image)
यदि आप नौकरीपेशा हैं और हर महीने आपकी सैलरी से EPF (कर्मचारी भविष्य निधि) कटता है, तो यह जानकारी आपके लिए बेहद काम की साबित हो सकती है। आमतौर पर लोग EPF को सिर्फ टैक्स बचाने का जरिया मानते हैं, लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि इसी EPF के जरिए रिटायरमेंट के लिए एक बड़ा फंड भी तैयार किया जा सकता है।
अगर आप जोखिम से दूर रहकर सुरक्षित निवेश करना चाहते हैं, तो वॉलंटरी प्रोविडेंट फंड (VPF) आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। आइए जानते हैं कि यह कैसे काम करता है और इसके क्या फायदे हैं।
वॉलंटरी प्रोविडेंट फंड यानी VPF, EPF का ही हिस्सा होता है। फर्क सिर्फ इतना है कि जहां EPF में कर्मचारी की सैलरी का 12 फीसदी योगदान अनिवार्य होता है, वहीं VPF में कर्मचारी अपनी इच्छा से अतिरिक्त रकम जमा कर सकता है।
मतलब साफ है, आप जितना ज्यादा पैसा VPF में डालेंगे, रिटायरमेंट के समय उतना ही बड़ा फंड तैयार होगा। इसके लिए आपको अलग से कोई नया खाता खोलने की जरूरत नहीं होती। यह सुविधा खास तौर पर उन लोगों के लिए है, जो सुरक्षित निवेश के जरिए अपने भविष्य को मजबूत बनाना चाहते हैं।
EPF की तरह VPF पर भी वही ब्याज दर लागू होती है। फिलहाल EPF और VPF पर सालाना 8.25 फीसदी ब्याज दिया जा रहा है। खास बात यह है कि इस ब्याज दर का निर्धारण सरकार करती है, इसलिए इसमें किसी तरह का जोखिम नहीं होता। 8.25 फीसदी की यह दर कई बैंकों की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से भी ज्यादा है, जिससे यह निवेश के लिहाज से और आकर्षक बन जाता है।
VPF टैक्स प्लानिंग के लिहाज से भी काफी फायदेमंद है। इसमें जमा की गई रकम पर इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80C के तहत सालाना 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स छूट मिलती है। अगर EPF और VPF का कुल सालाना योगदान 2.5 लाख रुपये से कम है, तो उस पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स फ्री रहता है। वहीं, सरकारी कर्मचारियों के लिए यह सीमा 5 लाख रुपये तक है। इसके अलावा, अगर कोई कर्मचारी लगातार 5 साल तक नौकरी करता है, तो रिटायरमेंट या जरूरत के समय निकाली गई रकम भी टैक्स फ्री होती है। हालांकि, VPF को लंबी अवधि के निवेश के लिए ही बेहतर माना जाता है। बीच में रकम निकालने पर टैक्स और नियम लागू हो सकते हैं।
VPF शुरू करना बेहद आसान है। इसके लिए आपको अपनी कंपनी के HR या Payroll डिपार्टमेंट को यह बताना होगा कि आप VPF में योगदान करना चाहते हैं। इसके बाद एक फॉर्म भरना होता है, जिसमें यह तय किया जाता है कि सैलरी से कितनी अतिरिक्त राशि VPF में जमा की जाएगी। कई कंपनियां यह सुविधा अपने ऑनलाइन पोर्टल के जरिए भी देती हैं। प्रक्रिया पूरी होते ही हर महीने आपकी सैलरी से तय रकम VPF के रूप में कटने लगती है।
अगर आप नौकरी बदलते हैं, तो आपका EPF और VPF अकाउंट नए नियोक्ता के पास ट्रांसफर हो जाता है। यानी आपका पैसा पूरी तरह सुरक्षित रहता है और निवेश बिना रुके जारी रहता है। आप EPF पासबुक, UMANG ऐप या DigiLocker के जरिए कभी भी अपने खाते का बैलेंस चेक कर सकते हैं।
Published on:
11 Feb 2026 01:03 pm
