
यूएस फेड रेट बढ़ने की संभावनाएं तेज हो गई हैं। (PC: AI)
Gold Price Outlook: अमेरिका में ब्याज दरों में बढ़ोतरी को लेकर बाजार की उम्मीदें तेजी से ऊपर गई हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श की जैक्सन होल स्पीच के बाद सितंबर 2026 की बैठक में ब्याज दर बढ़ने की संभावना पर दांव काफी बढ़ गया है। इसका सीधा असर सोमवार को दुनियाभर के बाजारों पर देखने को मिल सकता है। सबसे ज्यादा नजर शेयर बाजार और सोने-चांदी की कीमतों पर रहेगी। अमेरिकी फेड अगर महंगाई को लेकर सख्त रुख अपनाता है, तो डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को सपोर्ट मिल सकता है। इससे सोना-चांदी जैसे बिना ब्याज वाले एसेट्स और शेयर बाजार जैसे रिस्की निवेश विकल्पों पर दबाव बढ़ सकता है।
सीएमई ग्रुप के फेडवॉच टूल के अनुसार, सितंबर की बैठक में अमेरिकी फेड द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की संभावना शुक्रवार के भाषण के बाद बढ़कर 55.7% हो गई। एक दिन पहले यह संभावना सिर्फ 35.4% थी। यानी एक ही दिन में बाजार का रुख काफी बदल गया। 25 बेसिस पॉइंट यानी 0.25 फीसदी की रेट हाइक को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। वॉर्श ने अपने भाषण में संकेत दिया कि अगर फेड के पॉलिसी मेकर इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं होते कि महंगाई धीरे-धीरे 2% के लक्ष्य की ओर लौट रही है, तो केंद्रीय बैंक को आगे और काम करना पड़ेगा।
सेबी रजिस्टर्ड मार्केट एक्सपर्ट अनुज गुप्ता के मुताबिक, केविन वॉर्श के बयान से दुनियाभर के शेयर बाजारों पर दबाव बन सकता है। इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ने की आशंका है। उनका कहना है कि सोमवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत फ्लैट से हल्की कमजोरी के साथ हो सकती है। Nifty 50, Sensex और Bank Nifty अपने मौजूदा सपोर्ट लेवल को परख सकते हैं। मॉर्निंगस्टार वेल्थ के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर फिलिप स्ट्रेहल ने रॉयटर्स से कहा कि छोटी कंपनियों और टेक्नोलॉजी शेयरों पर बढ़ती ब्याज दरों का असर ज्यादा पड़ता है। ऐसे शेयर ब्याज दरों में बदलाव के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
एंजल वन के चीफ मैनेजर (टेक्निकल एंड डेरिवेटिव रिसर्च) ओशो कृष्ण के मुताबिक, मौजूदा माहौल में निवेशकों को आक्रामक दांव लगाने से बचना चाहिए। इसके बजाय चुनिंदा शेयरों और सेक्टर पर ध्यान देना बेहतर हो सकता है। उनका मानना है कि बाजार में थीम और सेक्टर के आधार पर कुछ शेयर बाकी बाजार से बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। ऐसे में पूरे बाजार में एक साथ पैसा लगाने के बजाय चुनिंदा मौकों पर नजर रखना ज्यादा समझदारी हो सकती है।
अमेरिकी फेड की दर बढ़ने की संभावना सिर्फ शेयर बाजार के लिए चिंता की बात नहीं है। इसका असर सोने और चांदी पर भी पड़ सकता है। सेबी रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार डॉ रवि सिंह के अनुसार, सितंबर में 25 बेसिस पॉइंट की रेट हाइक की अटकलों के बीच अमेरिकी डॉलर और शॉर्ट टर्म अमेरिकी बॉन्ड में तेजी आई है। इससे सोना, चांदी, बिटकॉइन और इक्विटी जैसे दूसरे एसेट पर दबाव बन सकता है। ऐसे में सोमवार को सोने और चांदी में बिकवाली का सिलसिला जारी रहने की आशंका है।
सोने की वैश्विक कीमतों में शुक्रवार को जबरदस्त गिरावट दर्ज हुई। ब्लूमबर्ग के अनुसार, कॉमेक्स पर गोल्ड शुक्रवार को 2.88 फीसदी या 134 डॉलर गिरकर 4,529.90 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। गोल्ड स्पॉट में और ज्यादा गिरावट देखी गई। यह 3.13 फीसदी या 144 डॉलर गिरकर 4,455.11 डॉलर प्रति औंस पर आ गया है। इसी तरह चांदी की वैश्विक कीमतों में भी भारी गिरावट दर्ज हुई। कॉमेक्स पर चांदी का भाव 3.49 फीसदी या 2.45 डॉलर की गिरावट के साथ 67.79 डॉलर प्रति औंस रह गया। वहीं, सिल्वर स्पॉट 4.14 फीसदी या 2.87 डॉलर गिरकर 66.38 डॉलर प्रति औंस पर आ गई।
(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट/म्यूचुअल फंड में निवेश जोखिम भरा होता है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)
Updated on:
29 Aug 2026 12:15 pm
Published on:
29 Aug 2026 12:15 pm
