
Gold Price: जून में सोने में 11% की गिरावट आई है।
Gold Price Outlook: अगर आप सोना या चांदी खरीदने की सोच रहे हैं, तो जल्दबाजी करने से पहले यह जानना जरूरी है कि आने वाले महीनों में किस धातु से ज्यादा कमाई की उम्मीद है। बाजार के जानकारों का मानना है कि साल 2026 की दूसरी छमाही में चांदी, सोने के मुकाबले बेहतर परफॉर्म कर सकती है। हालांकि, जोखिम से बचने वाले निवेशकों के लिए सोना अब भी मजबूत सहारा बना रहेगा। साल के पहले 6 महीनों में सोने में काफी गिरावट आई है। सोने की वैश्विक कीमत ने जनवरी में 5,594.82 डॉलर प्रति औंस के साथ रिकॉर्ड हाई बनाया था। इस स्तर से सोने का भाव करीब 30 फीसदी टूट चुका है। घरेलू कीमतों में भी काफी गिरावट आई है। गुड रिटर्न्स के अनुसार, मंगलवार को दिल्ली में सोने का हाजिर भाव 1,42,190 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है। वहीं, चांदी का हाजिर भाव 2,35,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया है।
पिछले कुछ महीनों से दोनों धातुओं पर दबाव बना हुआ है। जून में सोने की कीमतों में 11 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। यह लगातार चौथा महीना है जब सोना कमजोर रहा। सोने में साल 2013 के बाद सबसे बड़ी तिमाही गिरावट दर्ज हुई है। वहीं, चांदी में भी तेज गिरावट देखने को मिली है।
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव ने इस साल बाजार का समीकरण बदल दिया। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं, महंगाई को लेकर चिंता गहराई और निवेशकों ने यह मानना शुरू कर दिया कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में और बढ़ोतरी कर सकता है। फिलहाल बाजार इस साल तीन बार ब्याज दर बढ़ने की संभावना देख रहा है। अगर ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो सोने और चांदी जैसी बिना ब्याज वाले एसेट्स पर दबाव बना रह सकता है।
इंडसइंड सिक्योरिटीज के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट जिगर त्रिवेदी का मानना है कि आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 3,700 डॉलर प्रति औंस तक फिसल सकता है। हालांकि, भारत में त्योहारों के सीजन के दौरान ज्वेलरी की मांग बढ़ने से कीमतों को सपोर्ट मिल सकता है। उनके मुताबिक एमसीएक्स पर सोने के लिए 1,33,000 से 1,35,000 रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर मजबूत सपोर्ट माना जा सकता है। वहीं 1,50,000 रुपये के आसपास बड़ी रुकावट देखने को मिल सकती है।
पिछली तिमाही में 23 फीसदी से ज्यादा गिरने के बाद अब चांदी में वापसी की संभावना जताई जा रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि उद्योगों से बढ़ती मांग है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर, सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), बैटरी और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में चांदी की खपत लगातार बढ़ रही है। यही वजह है कि कई विश्लेषकों को उम्मीद है कि साल की दूसरी छमाही में चांदी बेहतर परफॉर्म कर सकती है।
त्रिवेदी के अनुसार, MCX पर चांदी के लिए 2 लाख रुपये प्रति किलो का स्तर मजबूत सपोर्ट हो सकता है, जबकि 2.50 लाख रुपये प्रति किलो के आसपास बड़ा रेजिस्टेंस रहेगा। उनका मानना है कि जुलाई में दबाव बना रह सकता है, लेकिन अगस्त से चांदी में मजबूत रिकवरी देखने को मिल सकती है।
चॉइस ब्रोकिंग की कमोडिटी एनालिस्ट कावेरी मोरे का कहना है कि अगर आगे चलकर अमेरिकी फेड ब्याज दरों में कटौती करता है और इंडस्ट्रीयल डिमांड मजबूत बनी रहती है, तो चांदी सोने से ज्यादा रिटर्न दे सकती है।
हालांकि, उनका मानना है कि सोना पोर्टफोलियो का अहम हिस्सा बना रहना चाहिए। केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी और वैश्विक अनिश्चितताओं के समय पूंजी को सुरक्षित रखने की इसकी क्षमता इसे खास बनाती है। उन्होंने कहा, 'जो निवेशक ज्यादा जोखिम उठा सकते हैं, वे चांदी में थोड़ा बड़ा निवेश करने पर विचार कर सकते हैं। वहीं, सतर्क निवेशकों के लिए सोना और चांदी दोनों का संतुलित मिश्रण बेहतर रणनीति हो सकती है।'
उधर केडिया एडवाइजरी के एमडी अजय केडिया ने पत्रिका डॉट कॉम को बताया कि अगले एक साल में दोनों धातुओं में अच्छी तेजी देखी जा सकती है। उन्होंने कहा, 'दोनों धातुओं में अगस्त-सितंबर से दोबारा तेजी शुरू हो सकती है। सालभर मे चांदी सवा तीन से साढ़े तीन लाख रुपये तक जा सकती है। वहीं, सोने में हम लगभग 2 लाख का लेवल फिर से देख सकते हैं।'
भारत के सोने के आयात में काफी गिरावट आई है। आरबीआई ने कहा है कि मई 2026 महीने में अप्रैल महीने की तुलना में सोने के आयात में काफी गिरावट आई है। बता दें कि पीएम मोदी ने 10 मई को देश की जनता से एक साल तक गोल्ड नहीं खरीदने की अपील की थी। इसके बाद गोल्ड डिमांड में कमी भी देखने को मिली थी। वहीं, IBJA की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल से जून 2026 तिमाही देशभर में करीब 50 टन पुराने सोने की बिक्री हुई है।
Published on:
30 Jun 2026 05:53 pm
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