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Suzlon Energy Share: नया ऑर्डर मिलते ही उछला सुजलॉन एनर्जी का शेयर, 5 साल में दिया है 683% रिटर्न

Renewable Energy Stock: अपने नए विंड टरबाइन S175 के ऑर्डर के बाद कंपनी के शेयर में 1.7 फीसदी की तेजी आई। इस नए ऑर्डर के बाद कंपनी कर्नाटक के बिजापुर में 21 विंड टरबाइन लगाएगी।
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Suzlon Multibagger Share

Suzlon Energy के शेयर में तेजी आई है। (फोटो: AI)

Suzlon Multibagger Share: रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की कंपनी सुजलॉन एनर्जी (Sunsure Energy) के शेयर मंगलवार को चर्चा में हैं। इसके शेयर में करीब 1.7 फीसदी की तेजी देखने को मिली है। इस तेजी की मुख्य वजह कंपनी को मिला एक नया ऑर्डर है। दरअसल, कंपनी को अपनी नई लॉन्च की गई S175 (5.0 मेगावाट) विंड टरबाइन का पहला कमर्शियल ऑर्डर मिल गया है। 105 मेगावाट का यह ऑर्डर सन्स्योर एनर्जी ने दिया है। खास बात यह है कि कंपनी ने इस टरबाइन को लॉन्च करने के सिर्फ दो हफ्ते के भीतर ही यह ऑर्डर हासिल किया है।

लॉन्ग टर्म में मल्टीबैगर रिटर्न

ऑर्डर मिलने की घोषणा के बाद मंगलवार को बीएसई पर सुजलॉन का शेयर 1.7 फीसदी बढ़कर 58.15 रुपये के दिन के उच्च स्तर पर पहुंच गया। यह तेजी ऐसे समय आई जब शेयर बाजार में सुस्ती का माहौल था। पिछले तीन महीनों में कंपनी का शेयर 45 फीसदी, जबकि छह महीनों में 10 फीसदी चढ़ा है। हालांकि, पिछले एक साल में इसमें 15 फीसदी की गिरावट रही है। वहीं, पिछले पांच वर्षों में इस शेयर ने करीब 683 फीसदी का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। इसका 52 सप्ताह का उच्च स्तर 68.30 रुपये और निचला स्तर 38.17 रुपये है।

लॉन्च के दो हफ्ते में मिला पहला ऑर्डर

सुजलॉन ने बताया कि S175 (5.0 मेगावाट) भारत की सबसे ऊंची और सबसे ज्यादा क्षमता वाली विंड टरबाइन है। लॉन्च के दो सप्ताह के भीतर मिला यह पहला कमर्शियल ऑर्डर कंपनी की नई तकनीक पर ग्राहकों के भरोसे को दिखाता है। सन्स्योर एनर्जी ने पिछले 14 महीनों में सुजलॉन को तीसरी बार ऑर्डर दिया है। इसके साथ दोनों कंपनियों के बीच कुल ऑर्डर क्षमता बढ़कर 400.8 मेगावाट हो गई है।

कर्नाटक में लगाए जाएंगे 21 विंड टरबाइन

इस प्रोजेक्ट के तहत सुजलॉन कर्नाटक के बीजापुर जिले में अपनी S175 (5.0 मेगावाट) क्षमता वाली 21 विंड टरबाइन लगाएगी। कंपनी इन टरबाइनों की सप्लाई, इंस्टॉलेशन, कमीशनिंग और मेंटेनेंस का काम भी करेगी। यह टरबाइन 175 मीटर रोटर और 160 मीटर हाइब्रिड लैटिस टावर के साथ तैयार की गई है, जिससे तेज हवा वाले क्षेत्रों में ज्यादा बिजली उत्पादन संभव होगा।

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