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कर्ज से डर रहे युवा, होम लोन की मांग में 7% गिरावट

Financial Year 2025: वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही में होम लोन के वॉल्यूम में भी 7% की कमी आई, जो एक साल पहले इसी अवधि में 5% बढ़ी थी।

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भारत

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Devika Chatraj

Jun 25, 2025

होम लोन की मांग में गिरावट (प्रतीकात्मक इमेज)

टैरिफ वॉर और भू-राजनीतिक संकट के कारण अर्थव्यवस्था में संभावित सुस्ती के चलते शहरों और महानगरों में रहने वाले युवा कर्ज लेने से परहेज कर रहे हैं। इससे वित्त वर्ष 2024-25 की अंतिम यानी मार्च तिमाही के दौरान खुदरा कर्ज की वृद्धि दर घटकर 5% फीसदी रह गई, जो एक साल पहले की समान तिमाही में 12% थी। ट्रांसयूनियन सिबिल की रिपोर्ट के अनुसार, क्रेडिट कार्ड और कंज्यूमर ड्यूरेबल जैसे खुदरा ऋणों की मांग तेजी से घट रही है। 35 वर्ष से कम उम्र के ज्यादातर ग्राहक यही कर्ज लेते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, क्रेडिट कार्ड कर्ज में पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 32% की गिरावट आई है।

होम लोन की मांग 7% घटी

पर्सनल लोन की वृद्धि बीते वर्ष के 13% के मुकाबले 6% पर आ गई। कंज्यूमर ड्यूरेबल कर्ज भी 19% से घटकर सिर्फ 6% रह गए। 35 वर्ष या इससे कम आयु के ग्राहकों की मांग में कमी अधिक रही, जिससे नए ऋण स्रोत 3% घटकर 16% पर आ गए। वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही में होम लोन के वॉल्यूम में भी 7% की कमी आई, जो एक साल पहले इसी अवधि में 5% बढ़ी थी। हालांकि, एक करोड़ रुपए से अधिक के होम लोन में 9% की वृद्धि हुई। कार लोन में भी बड़े ऋण लेने को प्राथमिकता दी गई है। हालांकि इस साल रेपो रेट में 1% की कटौती होने से अब होम लोन और कार लोन के साथ पर्सनल लोन की मांग बढ़ने की उम्मीद है।

कहां बढ़ी क्रेडिट की मांग

देश के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में क्रेडिट मांग में मजबूती बनी हुई है। वहीं, मेट्रो और शहरी इलाकों में यह रुझान अपेक्षाकृत धीमा पड़ा है। ट्रांसयूनियन सिबिल डेटा के अनुसार, मार्च तिमाही में के दौरान ग्रामिण क्षेत्रों में क्रेडिट पूछताछ की हिस्सेदारी बढक़र 22% हो गई। यह 2023 में और 2024 में 20% थी। अर्ध- शहरी क्षेत्रों की हिस्सेदारी भी बढ़कर 30% हो गई। यह पिछले साल 29% थी और 2023 में 28% थी। इसकी तुलना में मेट्रो क्षेत्रों में यह मार्च 2023 के 32% से घटकर 29% रह गई। शहरी क्षेत्रों ने 19 से 20% की स्थिर हिस्सेदारी बनाए रखी।

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