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Hospital Charges: अस्पतालों में ट्रीटमेंट की प्राइस लिस्ट की जाए डिस्प्ले, सरकार ने दिये निर्देश, मरीजों को होगा फायदा

Hospital Price List: केंद्र सरकार ने राज्यों से अस्पतालों में इलाज, जांच और दूसरी स्वास्थ्य सेवाओं की दरें प्रमुखता से प्रदर्शित कराने को कहा है। इसका मकसद मरीजों को खर्च की जानकारी देना और बिलिंग विवाद कम करना है।
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भारत

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Pawan Jayaswal

•

Oct 12, 2026

Hospital Treatment Rates

सरकार ने हॉस्पिटल्स से रेट लिस्ट डिस्प्ले करने को कहा है। (PC: AI)

अस्पताल में इलाज कराने से पहले मरीजों को यह पता होना चाहिए कि डॉक्टर की फीस कितनी है, जांच पर कितना खर्च आएगा और कमरे का किराया क्या होगा। इसी मकसद से केंद्र सरकार ने राज्यों को अस्पतालों में इलाज और दूसरी स्वास्थ्य सेवाओं की दरें साफ-साफ डिस्प्ले कराने के निर्देश दिए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोमवार को राज्यों से कहा कि वे अस्पतालों और अन्य क्लिनिकल संस्थानों में सेवाओं और सुविधाओं की दरें प्रमुखता से प्रदर्शित करने से जुड़े नियमों को प्रभावी तरीके से लागू कराएं। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर नियमों के पालन की समीक्षा करने और जरूरत के मुताबिक कार्रवाई करने को कहा है।

मंत्रालय के मुताबिक, इस कदम का मकसद मरीजों और उनके परिवारों को इलाज से जुड़े फैसले लेने में मदद करना, खर्च की योजना बनाने का मौका देना और बिल को लेकर होने वाले विवाद कम करना है।

अस्पतालों में रेट लिस्ट लगाना क्यों जरूरी?

इलाज का खर्च पहले से पता होना मरीजों के लिए बड़ी राहत हो सकता है। खासकर निजी अस्पतालों में भर्ती होने पर डॉक्टर की फीस, जांच, दवाइयों, कमरे और दूसरी सुविधाओं का खर्च मिलकर बड़ा बिल बन जाता है। ऐसे में अगर अस्पताल अपनी सेवाओं की दरें स्पष्ट रूप से बताए, तो मरीज अलग-अलग अस्पतालों के खर्च की तुलना कर सकते हैं।

क्या कहता है नियम

क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स (रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) एक्ट, 2010 और क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स (सेंट्रल गवर्नमेंट) रूल्स, 2012 के तहत उन राज्यों में, जहां केंद्रीय कानून लागू है, अस्पतालों और संबंधित संस्थानों को अपनी सेवाओं और उपलब्ध सुविधाओं की दरें ऐसी जगह प्रदर्शित करनी होती हैं, जहां मरीज आसानी से उन्हें देख सकें। दरें स्थानीय भाषा और अंग्रेजी, दोनों में होनी चाहिए। जिन राज्यों में केंद्रीय कानून लागू नहीं है, वहां स्वास्थ्य संस्थानों को संबंधित राज्य के कानूनों और नियमों का पालन करना होता है। कई राज्यों के अपने नियमों में भी इलाज की दरें प्रदर्शित करने का प्रावधान है।

विदेशी मरीजों के लिए पैकेज रेट हों डिस्प्ले

स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों से यह भी कहा है कि वे मेडिकल या आयुष वीजा पर भारत आने वाले विदेशी मरीजों के लिए अस्पतालों में पैकेज रेट प्रमुखता से प्रदर्शित करने को बढ़ावा दें। सरकार का मानना है कि इलाज की कीमतों में पारदर्शिता बढ़ने से भारत का मेडिकल टूरिज्म सेक्टर मजबूत हो सकता है। विदेश से आने वाले मरीजों को अगर इलाज और अस्पताल की सुविधाओं पर होने वाले संभावित खर्च की जानकारी पहले मिल जाए, तो उनके लिए योजना बनाना आसान होगा।

पैकेज रेट में छिपी शर्तें भी समझनी होंगी

कई अस्पताल सर्जरी या किसी खास बीमारी के इलाज के लिए पैकेज उपलब्ध कराते हैं। लेकिन हर पैकेज में सभी सेवाएं शामिल हों, यह जरूरी नहीं है। कुछ पैकेज में दवाइयां, अतिरिक्त जांच, आईसीयू में भर्ती या इलाज के दौरान पैदा होने वाली जटिलताओं का खर्च शामिल नहीं होता। ऐसे में मरीज को एक अस्पताल का पैकेज सस्ता और दूसरे का महंगा दिखाई दे सकता है, जबकि दोनों में मिलने वाली सुविधाएं अलग हों। इसलिए पैकेज की कीमत के साथ यह जानना भी जरूरी है कि उसमें क्या-क्या शामिल है और किन सेवाओं के लिए अलग से भुगतान करना होगा।