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Why Share Market Fall Today: निवेशकों को बड़ा नुकसान, सेंसेक्स 550 अंक टूटकर हुआ बंद, जानिए इस गिरावट के 5 बड़े कारण

Stock Market News: भारतीय शेयर बाजार में गिरावट के पीछे अमेरिकी और भारतीय बॉन्ड यील्ड में उछाल, विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली, मिडिल ईस्ट का तनाव और कमजोर वैश्विक संकेत प्रमुख वजहें हैं।
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भारत

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Pawan Jayaswal

•

Oct 12, 2026

Stock Market Today

शेयर बाजार भारी गिरावट के साथ बंद हुआ है। (PC: AI)

Stock Market Today: भारतीय शेयर बाजार आज हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारी गिरावट के साथ बंद हुआ है। बीएसई सेंसेक्स आज 0.76 फीसदी या 547 अंक की गिरावट के साथ 71,924 पर बंद हुआ है। कारोबार के दौरान यह न्यूनतम 71,676 अंक तक गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक निफ्टी-50 आज 0.7 फीसदी या 157 अंक की गिरावट के साथ 22,363 पर बंद हुआ है।

सेंसेक्स के शेयरों का हाल

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसके साथ ही एशियाई बाजारों की कमजोरी और पिछले सप्ताह की तेजी के बाद मुनाफावसूली ने भी बाजार पर दबाव बनाया है। आइए जानते हैं कि बाजार में आई इस गिरावट की बड़ी वजहें क्या हैं:

  1. अमेरिकी और भारतीय बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल

बॉन्ड बाजार में बिकवाली बढ़ने से अमेरिका में सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न तेजी से ऊपर गया है। जब सरकारी बॉन्ड से ज्यादा रिटर्न मिलने लगता है, तो कुछ निवेशक शेयरों के बजाय अपेक्षाकृत कम जोखिम वाले बॉन्ड में पैसा लगाना पसंद करते हैं। इससे शेयर बाजार में निवेश की डिमांड घट सकती है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर में समाप्त तिमाही के दौरान अमेरिकी 10 साल के ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड में 21वीं सदी की सबसे बड़ी तिमाही बढ़ोतरी दर्ज की गई। 10 साल की यील्ड 5.3% के पार पहुंच गई, जो 2007 के उच्च स्तर से भी ऊपर थी। यह 2002 की शुरुआत के बाद का सबसे ऊंचा स्तर बताया गया। वहीं, 30 साल के अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड 5.6% तक पहुंच गई। भारत में भी सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 7.37% हो गई, जो तीन साल का उच्च स्तर है। इसके पीछे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त नकदी कम करने का फैसला भी एक वजह है।

2. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली

शेयर बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली है। अक्टूबर के शुरुआती छह कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 45,125 करोड़ रुपये निकाले। यह रकम सितंबर के पूरे महीने में दर्ज 45,536 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली के लगभग बराबर है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार के मुताबिक, अक्टूबर में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली तेज होने से 2026 में अब तक भारतीय शेयरों से कुल निकासी 3.60 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गई है।

  1. मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष ने वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ा दी है। ईरान ने युद्ध खत्म करने के प्रस्ताव पर अमेरिका के ताजा जवाब को अपर्याप्त बताया है। ईरान ने यह चेतावनी भी दी है कि अगर लड़ाई दोबारा तेज होती है, तो क्षेत्र के डेटा सेंटर और केबल उसके निशाने पर आ सकते हैं। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख मोहसेन रेजाई ने कहा कि वॉशिंगटन को उन मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, जिन पर तेहरान को अब भी जवाब चाहिए।

इसी बीच, यमन के हूती विद्रोहियों ने शनिवार को रियाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हमले की जिम्मेदारी ली। खबर के मुताबिक, इस हमले में 13 लोगों की मौत हुई और 300 से ज्यादा लोग घायल हुए। सऊदी अधिकारियों ने रविवार को हवाई अड्डे पर एक अन्य हमले में भी लोगों के घायल होने की जानकारी दी। मिडिल ईस्ट का तनाव निवेशकों के लिए इसलिए भी अहम है, क्योंकि इससे कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है।

  1. एशियाई बाजारों से कमजोर संकेत

भारतीय बाजार में गिरावट के साथ एशिया के दूसरे शेयर बाजारों में भी कमजोरी दिखी। दक्षिण कोरिया का कोस्पी करीब 4% गिर गया, जबकि जापान का निक्केई भी नुकसान में कारोबार करता दिखा। चीन के शंघाई कंपोजिट और ताइवान वेटेड इंडेक्स में भी गिरावट दर्ज की गई। जब दुनिया के बड़े बाजारों में निवेशकों का भरोसा कमजोर होता है, तो उसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है। विदेशी फंड्स की गतिविधियां और वैश्विक जोखिम लेने की क्षमता बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं।

  1. पिछले सप्ताह की तेजी के बाद मुनाफावसूली

शेयर बाजार में गिरावट की एक और वजह मुनाफावसूली हो सकती है। पिछले सप्ताह सेंसेक्स और निफ्टी ने आठ सप्ताह से जारी गिरावट का सिलसिला तोड़ते हुए बढ़त दर्ज की थी। लगातार गिरावट के बाद बाजार में तेजी आने पर कुछ निवेशक अपने शेयर बेचकर मुनाफा सुरक्षित कर लेते हैं। हालांकि, केवल मुनाफावसूली को गिरावट की पूरी वजह नहीं माना जा सकता। बॉन्ड यील्ड, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और मिडिल ईस्ट के हालात जैसे फैक्टर भी बाजार की चाल को प्रभावित कर रहे हैं।

(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट/म्यूचुअल फंड में निवेश जोखिम भरा होता है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)