16 मार्च 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

US-Iran war: स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से कैसे निकले LPG से भरे 2 भारतीय जहाज, जानिए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने क्या कहा

US-Iran war: स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से दो भारतीय जहाज शिवालिक और नंदा देवी निकल गए हैं। इनमें 92,700 मीट्रिक टन एलपीजी भरी हुई है। कई और भारतीय जहाज इस रास्ते से आ सकते हैं।

2 min read
Google source verification

भारत

image

Pawan Jayaswal

Mar 16, 2026

US-Iran war

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से दो भारतीय जहाज निकले हैं। (PC: AI)

US-Iran war: ईरान ने युद्ध के बीच दो भारतीय ध्वज वाले एलपीजी गैस टैंकरों को हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति दी है। इससे एलपीजी संकट से जूझ रहे भारत को बड़ी राहत मिलने वाली है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इस पर कहा कि 'वार्ता से कुछ नतीजे निकले हैं और यह प्रक्रिया अभी भी जारी है।' डॉ. जयशंकर ने कहा, 'मैं इस समय उनसे बातचीत में लगा हुआ हूं और मेरी बातचीत से कुछ परिणाम भी मिले हैं। यह प्रक्रिया जारी है। अगर इससे परिणाम मिल रहे हैं, तो स्वाभाविक रूप से मैं इसे आगे भी जारी रखूंगा। भारत के नजरिए से बेहतर है कि हम तर्क और समन्वय के जरिए समाधान निकालें।'

हर जहाज की आवाजाही एक अलग मामला

विदेश मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय झंडे वाले जहाजों के लिए ईरान के साथ कोई सामूहिक व्यवस्था नहीं है और हर जहाज की आवाजाही एक अलग मामला है। उन्होंने यह भी कहा कि इसके बदले ईरान को कोई विशेष लाभ नहीं दिया गया है। उनके अनुसार, दिल्ली और तेहरान के बीच लंबे समय से संबंध रहे हैं और उसी आधार पर बातचीत हुई है। उन्होंने कहा,
'यह किसी तरह का लेन-देन नहीं है। भारत और ईरान के बीच रिश्ते हैं और हम इस संघर्ष को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण मानते हैं।'

कई और जहाज आने की उम्मीद

डॉ. जयशंकर ने आगे कहा, 'अभी यह शुरुआती दौर है। वहां अभी हमारे कई और जहाज हैं। इसलिए यह एक सकारात्मक कदम है, लेकिन बातचीत जारी है, क्योंकि अभी भी बहुत काम बाकी है।' इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन से फोन पर बात की थी और सामान तथा ऊर्जा की आवाजाही के मुद्दे पर चर्चा की थी।

भरी है 92,700 मीट्रिक टन एलपीजी

भारतीय झंडे वाले दो टैंक शिवालिक और नंदा देवी, जिनमें 92,700 मीट्रिक टन एलपीजी भरी हुई है, सुरक्षित रूप से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गुजर गए हैं। इनके अगले कुछ दिनों में मुंद्रा और कांडला बंदरगाह पहुंचने की उम्मीद है।

क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज फारस की खाड़ी से अरब सागर तक जाने का एकमात्र समुद्री रास्ता है। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण यह अब एक अहम रणनीतिक पॉइंट बन गया है। दुनिया के कुल कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के लगभग 20 प्रतिशत का परिवहन इसी रास्ते से होता है। अमेरिका और इजराइल के हमलों के जवाब में ईरान द्वारा इस रास्ते को बंद करने से भारत और चीन जैसे एशियाई देशों में ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) खरीदार और एलपीजी का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से खाना पकाने में होता है। यह गैस मुख्य रूप से मध्य पूर्व से आती है। आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंता के बीच सरकार ने पहले ही निर्देश दिया है कि घरेलू उपभोक्ताओं और परिवहन क्षेत्र को प्राथमिकता दी जाए। कई उद्योग खासतौर पर सिरेमिक टाइल बनाने वाले उद्योग गैस की कमी का सामना कर रहे हैं, जिससे उनका उत्पादन प्रभावित होने का खतरा है।