
IDBI बैंक। फोटो: पत्रिका
भारत में सरकारी बैंकों के विनिवेश को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही है। केंद्र सरकार पिछले कुछ वर्षों से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में अपनी हिस्सेदारी घटाने की रणनीति पर काम कर रही है। इसी क्रम में IDBI बैंक में बहुमत हिस्सेदारी बेचने की योजना बनाई गई थी।
लेकिन सोमवार को बाजार में अचानक आई खबर ने निवेशकों को चौंका दिया। रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार ने IDBI बैंक की हिस्सेदारी बेचने की योजना फिलहाल रद्द करने का फैसला किया है, जिसके बाद बैंक के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई।
सोमवार 16 मार्च को शेयर बाजार में IDBI बैंक के स्टॉक में तेज बिकवाली देखने को मिली। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर बैंक का शेयर इंट्राडे ट्रेड में लगभग 15.34 प्रतिशत गिरकर 78.05 रुपये तक पहुंच गया। यह स्तर बैंक के पिछले एक साल के निचले स्तर 72.04 रुपये के काफी करीब माना जा रहा है।
ट्रेडिंग के दौरान स्टॉक में सामान्य दिनों की तुलना में अधिक वॉल्यूम भी देखा गया। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि विनिवेश रद्द होने की खबर ने निवेशकों को निराश कर दिया, जिसके कारण कई निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी।
केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) ने वर्ष 2022 में IDBI बैंक में अपनी संयुक्त हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया शुरू की थी। इस योजना के तहत बैंक में लगभग 60.7 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने का प्रस्ताव था।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार विनिवेश प्रक्रिया में आए प्रस्ताव सरकार की तय न्यूनतम कीमत से कम थे। इसलिए मौजूदा बिक्री प्रक्रिया को रद्द करने का निर्णय लिया गया है। इस खबर ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी, क्योंकि निवेशक लंबे समय से बैंक में रणनीतिक निवेशक आने की उम्मीद कर रहे थे।
हालांकि सरकार की ओर से इस मामले में आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है, लेकिन खबरों ने बाजार में नकारात्मक माहौल बना दिया।
पिछली रिपोर्ट्स के अनुसार IDBI बैंक में हिस्सेदारी खरीदने के लिए कुछ अंतरराष्ट्रीय निवेशकों ने रुचि दिखाई थी। इनमें कनाडा का निवेश समूह फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स (FFH) और दुबई स्थित अमीरात एनबीडी बैंक (ENBD) का नाम प्रमुख रूप से सामने आया था।
वित्त वर्ष 2025-26 की दिसंबर तिमाही तक IDBI बैंक में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी लगभग 45.48 प्रतिशत और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की 49.24 प्रतिशत थी। इस तरह बैंक में प्रमोटर समूह की कुल हिस्सेदारी करीब 94.71 प्रतिशत रही।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विनिवेश प्रक्रिया में देरी होती है तो निकट अवधि में स्टॉक पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि दीर्घकाल में बैंक की फाइनेंशियल स्थिति और बिजनेस ग्रोथ निवेशकों के लिए अहम कारक रहेंगे।
Updated on:
16 Mar 2026 10:26 am
Published on:
16 Mar 2026 10:25 am
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