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Income Tax: ITR-1 फॉर्म में हुए हैं 3 बड़े बदलाव, जानिए कब आपको भरना पड़ेगा आईटीआर-2 फॉर्म

Income Tax ITR-1 Form: अगर आपकी कुल सालाना इनकम 50 लाख रुपये से अधिक है, तो आपको आईटीआर-2 फॉर्म भरना होगा। अगर आपका शेयर मार्केट से लॉन्ग टर्म मुनाफा 1.25 लाख रुपए से ज्यादा है, तो भी आईटीआर-2 भरना होगा।

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भारत

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Pawan Jayaswal

Apr 07, 2026

Income Tax ITR 1 Form

आईटीआर-1 फॉर्म में बदलाव हुए हैं। (PC: AI)

Income Tax: आयकर विभाग ने टैक्सपेयर्स को राहत देते हुए आकलन वर्ष 2026-27 के लिए आइटीआर-1 फॉर्म में अहम बदलाव किए हैं। अब दो मकानों से होने वाली किराए की आय आइटीआर-1 में दिखाई जा सकती है। यानी जिन लोगों के दो घर हैं और रूम रेंट से आमदनी होती है, उन्हें अब आइटीआर-2 भरने की जरूरत नहीं होगी। यह उन लोगों के लिए बहुत बड़ी राहत हैं, जिन्होंने सेवानिवृत्ति के बाद निवेश के तौर पर दूसरा घर खरीदा है और उससे किराया कमा रहे हैं। हालांकि, इसके लिए टैक्सपेयर की कुल सालाना कमाई 50 लाख रुपए से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। पुराने नियमों में यदि किसी करदाता के पास दो घर हैं और दोनों से किराया आ रहा है, तो वह आईटीआर-1 नहीं भर सकता था।

सावधानी बरतनी होगी

हालांकि, दो मकानों से आय वाले करदाताओं को किराए से हुए आय, नगर निगम को दिया टैक्स और टैक्स कटौती का पूरा विवरण 'वार्षिक कर सूचना (AIS)' से हूबहू मिलना चाहिए। यदि एआईएस में दर्ज जानकारी और आईटीआर में विसंगति पाई गई, तो विभाग का एआई सिस्टम तुरंत नोटिस जारी कर देगा।

इन मामलों में आइटीआर-2 ही भरें

  1. अगर टैक्सपेयर की कुल सालाना आय 50 लाख से एक रुपये भी अधिक है।
  2. अगर शेयर मार्केट से आपका लॉन्ग टर्म मुनाफा 1.25 लाख रुपए से ज्यादा है।
  3. अगर आपने शेयर बेचकर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन कमाया है तो आइटीआर-2 हीभरना होगा।
  4. अगर आपके पास विदेश में कोई संपत्ति है या विदेशी बैंक में खाता है।
  5. अगर आप किसी कंपनी में निदेशक हैं या आपके पास अनलिस्टेड शेयर हैं।
  6. यदि टैक्सपेयर की कृषि आय 5000 रुपये से अधिक है।

म्यूचुअल फंड का मुनाफा दिखा सकेंगे

अब तक का नियम यह था कि अगर कमाई वेतन के अलावा शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड के मुनाफे (पूंजीगत लाभ) से होती थी, तो करदाता को अनिवार्य रूप से आइटीआर-2 फॉर्म भरना पड़ता था। लेकिन इस साल से टैक्सपेयर शेयरों और म्यूचुअल फंड से होने वाले लॉन टर्म कैपिटल गेन को भी आइटीआर-1 में दिखा सकते हैं। हालांकि, शर्त यह है कि सालाना मुनाफा 1.25 लाख रुपए तक ही होना चाहिए। यदि आपका मुनाफा इस सीमा से एक रुपया भी ज्यादा हुआ तो आइटीआर-2 भरना होगा। अब आपके एआइएस में 'कंसोलिडेटेड टीडीएस कोड' दिखाई देंगे, जिसका मतलब है कि ब्याज से लेकर डिविडेंड तक का पैसा विभाग की नजर में है।