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वोडाफोन, यस बैंक और सुजलॉन के शेयर में भारी बिकवाली, उधर गिरते बाजार में 13% उछल गया यह स्टॉक

वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में गिरावट जारी रही। Vodafone Idea, YES Bank और Suzlon Energy जैसे स्टॉक्स में भारी ट्रेडिंग हुई, जबकि KNR Constructions ने मजबूत प्रदर्शन किया।

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शेयर मार्केट में गिरावट। फोटो: एआइ

बिगड़ते वैश्विक हालात के कारण भारतीय शेयर बाजार में लगातार दबाव बना हुआ है। निवेशकों के बीच अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है, जिससे बाजार की दिशा कमजोर नजर आ रही है। सोमवार सुबह NSE पर कई प्रमुख स्टॉक्स में भारी ट्रेडिंग देखने को मिली, जहां वोडाफोन आइडिया, येस बैंक और सुजलॉन एनर्जी जैसे शेयर सबसे ज्यादा सक्रिय रहे।

इसके अलावा आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर, एचडीएफसी बैंक, जयप्रकाश पावर वेंचर्स और श्री रेणुका शुगर्स जैसे स्टॉक भी सक्रिय रहे। रिलायंस पावर, ओएनजीसी, सेल और ओला इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जैसे स्टॉक में भी अच्छी स्टॉक ट्रेडिंग देखी गई।

900 स्टॉक्स 52 सप्ताह के निचले स्तर पर

सोमवार सुबह के कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में लगभग 1.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट के दौरान NSE पर 900 से ज्यादा स्टॉक्स अपने 52 सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गए। बाजार की इस कमजोरी के बीच कुछ स्टॉक्स में भारी वॉल्यूम के साथ ट्रेडिंग हुई।

वोडाफोन आइडिया (Vodafone Idea) में 20 करोड़ से ज्यादा शेयरों का कारोबार हुआ, हालांकि स्टॉक करीब 3 प्रतिशत गिरा। येस बैंक (YES Bank) में 7 करोड़ से ज्यादा शेयर ट्रेड हुए और इसमें लगभग 4 प्रतिशत की गिरावट आई। सुजलॉन एनर्जी (Suzlon Energy) में भी 5 करोड़ से अधिक शेयरों का लेनदेन हुआ और स्टॉक करीब 3 प्रतिशत कमजोर हुआ।

केएनआर कंस्ट्रक्शंस ने किया उलट प्रदर्शन

जहां अधिकांश स्टॉक्स में गिरावट रही, वहीं केएनआर कंस्ट्रक्शंस (KNR Constructions) ने बाजार के ट्रेंड के विपरीत प्रदर्शन किया। इस स्टॉक में 6 करोड़ से ज्यादा शेयरों का कारोबार हुआ और यह करीब 13 प्रतिशत तक चढ़ गया। कंपनी को नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट के लिए 1,734 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा।

ग्लोबल संकट का असर

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अमेरिका-ईरान विवाद के बढ़ते प्रभाव ने वैश्विक बाजारों को हिला दिया है। यमन के हूती समूह के इस संघर्ष में शामिल होने से स्थिति और जटिल हो गई है। इसका सीधा असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा है, जहां निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। कच्चे तेल की कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं, जिससे महंगाई और आर्थिक दबाव की चिंता बढ़ गई है। विदेशी निवेशक लगातार भारतीय शेयरों से पैसा निकाल रहे हैं, जिससे बाजार में बिकवाली तेज हो गई है।