
सोने-चांदी के लिए मार्च महीना काफी बुरा रहा है। (PC: AI)
Gold Price Outlook: सोने में कई वर्षों की सबसे बड़ी मंथली गिरावट दर्ज हुई है। मार्च महीना सोने-चांदी के लिए काल साबित हुआ है। एमसीएक्स पर सोने का भाव आज 1,45,849 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा है। एक महीने में सोने के भाव 20,810 रुपये टूट गए हैं। वहीं, चांदी 2,26,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड करती दिखी है। एक महीने में चांदी 56,144 रुपये टूट गई है।
जब दुनिया में तबाही मचती है, तो लोग सोने में पैसा लगाते हैं। दशकों से यही परंपरा रही है। लेकिन इस बार उल्टा हो गया। ईरान-इजराइल-अमेरिका युद्ध के बीच सोना और चांदी शेयर बाजार से भी ज़्यादा टूट गए। यह झटका बड़ा था।
देश का सबसे बड़ा गोल्ड ईटीएफ Nippon India ETF Gold BeES 2 मार्च के बाद से 18 फीसदी गिर चुका है। चांदी तो और बुरे हाल में है। Nippon India Silver ETF ने 27 फीसदी की चोट खाई। तुलना के लिए बता दें कि इसी दौरान BSE सेंसेक्स 9 फीसदी गिरा। यानी जिसे "सेफ हेवन" कहते हैं, वो सबसे ज्यादा टूट गया। 29 जनवरी के हाई लेवल से देखें तो सोना 22 फीसदी और चांदी 44 फीसदी नीचे आ चुके हैं।
2024 और 2025 में सोने और चांदी ने ज़बरदस्त तेज़ी देखी थी। जियोपॉलिटिकल तनाव बढ़ा तो "रिस्क प्रीमियम" बढ़ा और दाम चढ़ते गए। लेकिन इस बार उसी तनाव ने इन्हें तोड़ा। वजह है अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड। युद्ध की वजह से तेल महंगा हुआ, महंगाई का डर बढ़ा, ब्याज दर कटौती की उम्मीदें कम हुईं और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड उछल गई। अब जब अमेरिकी 10 साल के बॉन्ड पर 4 से 5 फीसदी का बिना जोखिम वाला रिटर्न मिल रहा हो, तो कोई क्यों सोने में पैसा रखेगा जो कोई ब्याज नहीं देता? पैसा वहीं जाता है, जहां फायदा ज़्यादा हो।
ऊपर से मार्जिन कॉल का दबाव। जिन निवेशकों ने दूसरी जगह नुकसान उठाया, उन्होंने सोना-चांदी बेचकर नुकसान पूरा किया। इससे बिकवाली और बढ़ी। मिरे एसेट के फंड मैनेजर सिद्धार्थ श्रीवास्तव कहते हैं कि जियोपॉलिटिकल हालात से आमतौर पर सोने की मांग बढ़ती है लेकिन इस बार लिक्विडिटी की जरूरत और एसेट रोटेशन ने सोने की पोजिशन खुलवा दी।
नहीं। बिल्कुल नहीं। साल 2025 की शुरुआत में गोल्ड-सिल्वर रेश्यो 100 के पास था जो जनवरी 2026 के अंत तक 44 पर आ गया। परंपरागत रूप से जब यह अनुपात 40 से 50 के बीच आता है, तो कीमती धातुएं सांस लेती हैं और फिर अगली तेजी की तैयारी करती हैं। यह एक "कूलिंग ऑफ फेज" है। घबराने की नहीं, धैर्य रखने की जरूरत है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि जो लोग पहले से सोने या चांदी में पैसा लगाए बैठे हैं वो घबराएं नहीं। एसेट अलोकेशन पर भरोसा बनाए रखें। DSP Mutual Fund के साहिल कपूर साफ कहते हैं कि ज़्यादातर निवेशकों के लिए सिर्फ सोना ही सही है। SIP जारी रखें। चांदी में SIP बंद कर दें, क्योंकि चांदी मौद्रिक संपत्ति नहीं है। मिरे एसेट के श्रीवास्तव का सुझाव है कि मौजूदा स्तर पर सोना और चांदी थोड़ा-थोड़ा करके खरीदा जा सकता है, लेकिन जोखिम और रिटर्न के अनुपात में सोना बेहतर दिखता है। एक बात और। कीमतें चाहे बहुत गिर गई हों, लेकिन अभी भी सोना सस्ता नहीं है। इसलिए एकमुश्त पैसा मत लगाइए, धीरे-धीरे लगाइए।
Updated on:
30 Mar 2026 11:51 am
Published on:
30 Mar 2026 11:50 am
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