
मनी मार्केट फंड्स में जमकर पैसा आ रहा है। (PC: AI)
Investment: बड़े निवेशक इस समय 'कैश इज किंग' ट्रेंड को फॉलो कर रहे हैं। मिडिल ईस्ट के बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक वित्तीय बाजारों में निवेशकों के व्यवहार में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और बढ़ती महंगाई की आशंकाओं के कारण निवेशक शेयर बाजार से दूरी बना रहे हैं। जबकि सोने जैसे पारंपरिक सुरक्षित निवेश विकल्प भी अपनी चमक खोते नजर आ रहे हैं। ऐसे अनिश्चितता वाले माहौल में कैश और उससे जुड़े निवेश इंस्ट्रूमेंट्स निवेशकों के लिए सबसे पसंदीदा विकल्प बनकर उभरे हैं।
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में बताया गया कि इन्वेस्टमेंट कंपनी इंस्टीट्यूट, जेपी मॉर्गन और Crane Data जैसे डेटा प्रोवाइडर्स के अनुसार मनी मार्केट फंड्स में निवेश रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। ये अल्ट्रा-शॉर्ट टर्म और अत्यधिक लिक्विड फंड्स इस समय करीब 8 ट्रिलियन डॉलर के एसेट्स संभाल रहे हैं। विभिन्न अनुमानों में यह आंकड़ा 7.8 ट्रिलियन से 8.1 ट्रिलियन डॉलर के बीच है। भले ही आंकड़ों में थोड़ा फर्क हो, लेकिन सभी इस बात पर सहमत हैं कि यह भू-राजनीतिक तनाव के दौर में नकदी का अभूतपूर्व जमाव है।
मनी मार्केट शॉर्ट टर्म फाइनेंशियल एसेट्स वाला मार्केट है। यहां एक साल या उससे कम अवधि के लिए पैसों का उधार लेना-देना होता है। यहां उच्च लिक्विडिटी होती है। निवेशक तुरंत अपने निवेश को कैश में बदल सकते हैं। वहीं, रिस्क काफी कम रहता है। मनी मार्केट में ट्रेजरी बिल, कमर्शियल पेपर, सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट्स, कॉल मनी, नोटिस मनी और रेपो के जरिए सरकार, कॉर्पोरेट्स और बैंकों को उधार दिया जाता है या वहां पैसा जमा कराया जाता है।
यह रुझान निवेशकों की 'वेट एंड वॉच' रणनीति को दर्शाता है। रिपोर्ट के अनुसार, निवेशक फिलहाल साइड में रहकर हालात पर नजर बनाए रखना चाहते हैं, क्योंकि उन्हें युद्ध और उसके आर्थिक प्रभावों की दिशा को लेकर अनिश्चितता है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी इस बदलाव का प्रमुख कारण बनी है, जिससे महंगाई और आर्थिक मंदी की आशंका बढ़ गई है।
तेल की बढ़ती कीमतों का असर कई एसेट क्लास पर दिख रहा है। कमोडिटी, करेंसी और कीमती धातुएं भी अब तेल के उतार-चढ़ाव के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो गई हैं। जैसे-जैसे जोखिम वाले निवेशों में अनिश्चितता बढ़ रही है, निवेशकों को भरोसेमंद हेजिंग विकल्प कम मिल रहे हैं, जिससे नकदी जैसे साधनों की मांग और बढ़ रही है।
मार्केट रणनीतिकारों का कहना है कि अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो यह वैश्विक आर्थिक विकास पर भारी दबाव डाल सकती हैं। रॉयटर्स के अनुसार, विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि बढ़ती ऊर्जा लागत उपभोक्ता खर्च को कम कर सकती है और कंपनियों के मुनाफे को प्रभावित कर सकती है, जिससे स्टैगफ्लेशन (महंगाई के साथ आर्थिक ठहराव) का खतरा बढ़ सकता है।
निवेशकों की चिंता का एक और कारण यह है कि पारंपरिक सुरक्षित विकल्प अब उतने प्रभावी नहीं रहे। सरकारी बॉन्ड और सोना दोनों ही शेयर बाजार की गिरावट के दौरान अपेक्षित सुरक्षा देने में नाकाम रहे हैं। बढ़ती महंगाई और बढ़ते वित्तीय घाटे की चिंता सरकारी ऋण पर भरोसा कमजोर कर रही है।
इसके विपरीत, मनी मार्केट फंड्स अपेक्षाकृत बेहतर रिटर्न दे रहे हैं। रॉयटर्स के मुताबिक, कुछ फंड्स 3% से अधिक और कुछ मामलों में 4% के करीब रिटर्न दे रहे हैं। बेहतर यील्ड, सुरक्षा और लिक्विडिटी के कारण निवेशक तेजी से इनकी ओर आकर्षित हो रहे हैं। हालांकि, वित्तीय सलाहकार संतुलन बनाए रखने की सलाह दे रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पूरी तरह नकद में निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। क्योंकि सही समय पर बाजार से निकलना और फिर दोबारा प्रवेश करना अनुभवी निवेशकों के लिए भी बेहद मुश्किल होता है।
जैसे-जैसे ईरान संघर्ष की स्थिति बदल रही है, वैश्विक निवेश परिदृश्य भी लगातार बदल रहा है। फिलहाल, मनी मार्केट फंड्स में बढ़ता निवेश इस बात का संकेत है कि बाजार में सतर्कता हावी है और निवेशक रिटर्न से ज्यादा पूंजी की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं। आने वाले समय में यह रणनीति सही साबित होगी या नहीं, यह पूरी तरह भू-राजनीतिक और आर्थिक हालात पर निर्भर करेगा।
Updated on:
24 Mar 2026 11:52 am
Published on:
24 Mar 2026 11:45 am
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