
एक महीने में तेल की आग ने दुनिया को झुलसाया। फोटो: एआइ
वेस्ट एशिया में चल रही जंग की सबसे बड़ी मार दुनिया की एनर्जी सप्लाई पर पड़ रही है। तेल की कीमतों में सिर्फ 30 दिनों में 60 फीसदी का उछाल देखने को मिला है। ब्रेंट क्रूड जंग शुरू होने से पहले 70 डॉलर प्रति बैरल के करीब था जो आज 112 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। होर्मुज की खाड़ी बाधित होना, इराक का तेल उत्पादन 73 फीसदी गिर जाना और कतर की गैस सप्लाई पर हमले होना इसके बड़े कारण है।
जंग शुरू होने से पहले ब्रेंट क्रूड करीब 70 डॉलर प्रति बैरल पर था। आज ब्रेंट 112 डॉलर प्रति बैरल पर है यानी महज एक महीने में 60 फीसदी से ज्यादा की उछाल। अमेरिकी क्रूड WTI भी 98.75 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है जो पिछले सत्र में 2.27 फीसदी की बढ़त के बाद और 52 सेंट ऊपर चढ़ा। भारत में MCX पर क्रूड 9,360 रुपये प्रति बैरल पर है जो 1.12 फीसदी ऊपर है।
गोल्डमैन साच्स (Goldman Sachs) ने मार्च और अप्रैल के लिए ब्रेंट का औसत अनुमान 98 डॉलर से बढ़ाकर 110 डॉलर कर दिया है और पूरे 2026 के लिए औसत अनुमान 77 से बढ़ाकर 85 डॉलर प्रति बैरल किया है। Kotak Securities के अनिंद्य बनर्जी के मुताबिक जब तक तेल 100 डॉलर के ऊपर टिका रहे तो तेजी का ढांचा बना रहेगा और 120 डॉलर पार हुआ तो 130-135 डॉलर का रास्ता खुल जाएगा।
इस पूरे संकट में सबसे ज्यादा चिंता की बात है इराक का फोर्स मेजर। इराक ने विदेशी कंपनियों द्वारा संचालित अपने सभी तेल क्षेत्रों पर फोर्स मेजर घोषित कर दिया है। फोर्स मेजर का मतलब है कि युद्ध के कारण कंपनियां अपने कॉन्ट्रैक्ट की शर्तें पूरी करने में असमर्थ हैं, यानी सप्लाई की कोई गारंटी नहीं है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक इराक के तेल मंत्री हयान अब्देल-घनी ने पुष्टि की है कि बसरा ऑयल कंपनी का उत्पादन 33 लाख बैरल प्रतिदिन से घटकर महज 9 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया है। यानी एक झटके में 73 फीसदी की गिरावट। इराक OPEC देशों का दूसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक है और यह गिरावट ग्लोबल सप्लाई के लिए एक और बड़ा झटका है। होर्मुज की बाधा के साथ इराक का यह संकट मिलकर ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को दोहरी चोट पहुंचा रहा है।
ईरान के हमलों ने कतर के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचाया है जिससे कतर की करीब 17 फीसदी LNG एक्सपोर्ट कैपेसिटी प्रभावित हुई है। कतर दुनिया के सबसे बड़े LNG एक्सपोर्टर्स में से एक है और यूरोप तथा एशिया दोनों उस पर भारी निर्भर हैं। भारत भी कतर से बड़ी मात्रा में LNG आयात करता है जो बिजली उत्पादन और उद्योगों के लिए इस्तेमाल होती है। 17 फीसदी कैपेसिटी का नुकसान छोटा लग सकता है लेकिन ग्लोबल LNG मार्केट पहले से टाइट है और इतनी बड़ी कमी की भरपाई आसान नहीं है।
Published on:
23 Mar 2026 12:52 pm
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