
ये स्टॉक अपनी साल की ऊंचाई से 50% फिसल चुका है (PC: AI)
अगर आपने 5 साल पहले इस शेयर में 1 लाख रुपये लगाए होते तो आज की तारीख में उसकी वैल्यू 14.5 लाख रुपये होती। इस शेयर का नाम है जुपिटर वैगंस (Jupiter Wagons Ltd.), ये रेलवे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की एक प्रमुख कंपनी है, एक मल्टीबैगर स्टॉक है जिसने पिछले पांच सालों में 1300% से ज्यादा का रिटर्न दिया है।
हालांकि बीते एक साल में इस कंपनी का ट्रैक रिकॉर्ड ज्यादा अच्छा नहीं रहा है। 2025 में ही इस स्टॉक ने 29% का निगेटिव रिटर्न दिया है। क्योंकि इसके पहले इस स्टॉक ने 5 साल में (2020-2025 के दौरान) 3,000% का भी रिटर्न दिया है। इस दौरान ये स्टॉक 15-16 रुपये के भाव से चढ़कर 524 रुपये तक पहुंच गया था।
पिछले साल 3 जनवरी 2025 को इस स्टॉक ने 524.35 रुपये का हाई बनाया था, बीच में ये कई बार फिसला, साल के आखिर में 9 दिसंबर 2025 को इसने 247.15 रुपये का साल का निचला स्तर छुआ, यानी कीमतों में 50% से ज्यादा का स्विंग देखने को मिला। हालांकि कंपनी ने बीते 5 सालों में 125% CAGR की प्रॉफिट ग्रोथ दिखाई है। जो कि बीते तीन सालों में ये घटकर 95% CAGR पर आ गई है।
जुपिटर वैगंस रेलवे फ्रेट वैगन्स, पैसेंजर कोच, वैगन कंपोनेंट्स, कास्ट मैंगनीज स्टील क्रॉसिंग्स और कास्टिंग्स की मैन्युफैक्चरर है। इसका मुख्यालय कोलकाता, पश्चिम बंगाल में है। कंपनी भारतीय रेलवे के साथ-साथ कई अन्य निजी कंपनियों के लिए भी कोच बनाती है।
सितंबर 2025 यानी Q2FY26 तक ऑर्डर बुक 5,538 करोड़ रुपये थी। यह पिछले सालों के मुकाबले कम है। 2024 में कंपनी की ऑर्डर बुक 7,000 करोड़ रुपये से ज्यादा थी। इसकी सबसे बड़ी वजह व्हीलसेट सप्लाई इश्यू और रेलवे टेंडर्स में देरी है। जुपिटर वैगंस की सब्सिडियरी को पिछले साल सितंबर में 9,000 LHB एक्सल के लिए 113 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला था। इसके अलावा कुछ और ऑर्डर्स भी मिले, जैसे कि 583 वैगन्स के लिए GATX से 242 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला। इनमें ज्यादातर ऑर्डर 1-2 साल में पूरा होने वाले, लेकिन Q1-Q2 में सप्लाई चेन प्रॉब्लम से धीमापन देखने को मिला है, लेकिन अब स्पीड सामान्य हो रही है।
उम्मीद की जा रही है इस बार बजट 2026 में रेलवे सेक्टर के लिए कुछ बड़ा ऐलान हो सकता है। दरअसल, भारतीय रेलवे पर सरकार का फोकस बीते कुछ सालों में तेजी से बढ़ा है। कई रिफॉर्म्स, इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड और मेक इन इंडिया प्रोग्राम के मजबूत सपोर्ट से पूरे रेलवे सेक्टर में ही जबरदस्त बदलाव आ रहा है। FY25 में भारत ने 1,681 लोकमोटिव बनाए, यह पिछले साल के मुकाबले 19% ज्यादा है। इससे भारत दुनिया में लोकमोटिव मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल लीडर बन गया, क्योंकि यह संख्या अमेरिका, यूरोप, साउथ अमेरिका, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के कुल प्रोडक्शन से ज्यादा है।
ये मेक इन इंडिया मिशन के लिए इतनी बड़ी उपलब्धि क्यों है, इसको ऐसे समझिए कि 2014 से पहले सालाना औसत 470 लोकमोटिव थे, अब 900 से ज्यादा हो गए। ज्यादातर मालगाड़ी के लिए हाई-पावर इलेक्ट्रिक लोकमोटिव बन रहे हैं, जैसे चित्तरंजन और बनारस लोकमोटिव वर्क्स से। ऐसे में रेलवे कंपनियों के लिए ढेरों मौके बने हैं।
यह तेज ग्रोथ रोलिंग स्टॉक, इंजीनियरिंग और ट्रांसपोर्ट मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों जैसे ज्यूपिटर वैगन्स के लिए बड़े ऑर्डर्स और ग्रोथ का मौका खोल रही है। वंदे भारत ट्रेनें, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और इलेक्ट्रिफिकेशन से आगे और बूम आएगा। भारतीय रेलवे अब सिर्फ देश के लिए नहीं, दुनिया के लिए मैन्युफैक्चरिंग हब बन रहा है।
ये शेयर अभी अपने साल की ऊंचाई से 50% से भी ज्यादा नीचे ट्रेड कर रहा है। बावजूद इसके इसका स्टॉक PE 50.4 पर है, यानी इसकी वैल्युएशन काफी ज्यादा है, ये स्टॉक महंगा लग रहा है। PE रेश्यो का मतलब ये है कि निवेशक कंपनी की 1 रुपये की कमाई के लिए कितने पैसे देने को तैयार हैं, तो यहां पर ये 50.4 रुपये है। मगर सिर्फ PE के हिसाब से ये तय नहीं करना चाहिए कि स्टॉक महंगा है या नहीं। इसलिए हम देखते हैं PEG रेश्यो (Price to Earnings to Growth Ratio). PEG अगर 1 से कम है तो स्टॉक अंडरवैल्यूड है यानी ग्रोथ के मुकाबले सस्ता है। 1 है तो ठीक है और 1 से ज्यादा है तो महंगा है। यहां पर PEG तो 0.53 है। यानी मार्केट ने कंपनी की फ्यूचर पोटेंशियल को कम आंका है। ऐसे स्टॉक को लंबी अवधि के निवेश के लिए बेस्ट माना जाता है।
डिस्क्लेमर: हमारी तरफ से किसी भी स्टॉक में खरीदने बेचने की सलाह नहीं है। ये सिर्फ डेटा और एनालिसिस पर आधारित आर्टिकल है। निवेश का फैसला अपने निवेश सलाहकार से पूछ कर करें।
Updated on:
05 Jan 2026 04:48 pm
Published on:
05 Jan 2026 04:47 pm
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