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MWPA Act से प्रोटेक्ट करें अपनी इंश्योरेंस पॉलिसी, वरना बैंक ले जाएगा क्लेम का पूरा पैसा

What is MWPA Act: मैरिड वुमन प्रॉपर्टी एक्ट यह सुनिश्चित करता है कि बीमाधारक की मृत्यु के बाद इंश्योरेंस की राशि वाइफ और बच्चों को ही मिले। अगर आपका इंश्योरेंस MWPA प्रोटेक्ट नहीं है और आप पर कर्जा है, तो दिक्कत हो सकती है।

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What is MWPA Act

इंश्योरेंस पॉलिसी मैरिड वुमन प्रॉपर्टी एक्ट से प्रोटेक्ट होनी चाहिए। (PC: Gemini)

कोई व्यक्ति टर्म इंश्योरेंस इसलिए कराता है, ताकि आकस्मिक मृत्यु हो जाने पर परिवार को आर्थिक सुरक्षा मिले। अगर पॉलिसीधारक की मृत्यु उस वक्त हो जाती है, जब उस पर कर्ज हो, तब इंश्योरेंस के पैसे पर कर्जदाता की नजर गड़ जाती है। ऐसे में बीमा की रकम जो बच्चों की पढ़ाई या अन्य जरूरतों के लिए थी, कानूनी उलझनों में फंस जाती है। पर बीमा कराते समय मैरिड वुमन प्रॉपर्टी एक्ट (एमडब्ल्यूपीए) का क्लॉज जोड़कर इस स्थिति से बचा जा सकता है।

आसान लेकिन अनदेखा कानून

भारत में 10% से भी कम जीवन बीमा पॉलिसी एमडब्ल्यूपीए एक्ट के तहत ली जाती हैं। इसका कारण है- जानकारी की कमी। खास बात यह है कि इसके लिए कोई राशि नहीं चुकानी होती है। सिर्फ अपनी जागरूकता से सुनिश्चित कर सकते हैं कि बीमा का पूरा पैसा पत्नी और बच्चे को मिले। ज्यादातर लोग समझते हैं कि नॉमिनी बनाना या वसीयत काफी है, लेकिन सच यह है कि दोनों में कानूनी जोखिम रहते हैं।

MWPA एक्ट जानना बेहद जरूरी

मैरिड वुमन प्रॉपर्टी एक्ट ऐसा कानून है, जो विवाहित पुरुष को यह अधिकार देता है कि वह अपने जीवन बीमा की राशि सीधे अपनी पत्नी और बच्चों के नाम कर सके। जब बीमा एमडब्ल्यूपीए के तहत किया जाता है, तो वह रकम किसी भी कर्ज, रिश्तेदारों के दावे या कानूनी विवादों से सुरक्षित हो जाती है। यानी पति की मृत्यु के बाद बीमा की पूरी राशि सीधे पत्नी और बच्चों को मिलती है, बिना किसी देरी या कानूनी अड़चन के। यानी अगर पति ने कर्ज लिया है, तो भी बीमा की राशि पर उसका कोई प्रभाव नहीं होता है।

नामिनी संपत्ति का मालिक नहीं, सिर्फ ट्रस्टी

अक्सर लोग मानते हैं कि बैंक खाते, फिक्स्ड डिपॉजिट, बीमा या म्यूचुअल फंड में किसी को नॉमिनी बनाने से वह व्यक्ति मालिक बन जाता है। लेकिन यह गलतफहमी है। सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर राहुल अग्रवाल के अनुसार, नॉमिनी सिर्फ ट्रस्टी या राशि संभालने वाला कस्टोडियन है, न कि कानूनी मालिक। ऐसे में कानूनी वारिस के पास नॉमिनी से संपत्ति वापस लेने का अधिकार होता है। किसी एसेट के असली मालिक वे होते हैं, जिन्हें उत्तराधिकार कानून (जैसे हिंदू उत्तारधिकार अधिनियम 1956) के तहत अधिकार मिलता है। यानी नामांकन का मतलब मालिकाना हक नहीं है। यह सिर्फ पैसा जल्दी ट्रांसफर करने की सुविधा देता है।

उदाहरण से समझें….

मान लीजिए सुमित शर्मा के पास 15 लाख रुपए के निवेश थे। उन्होंने अपनी पत्नी को नॉमिनी बनाया। सुमित की मृत्यु के बाद पत्नी राशि ले सकती है, लेकिन कानूनी रूप से यह रकम पत्नी, दोनों बच्चों और मां में बराबर बंटेगी। अगर पत्नी ने राशि नहीं बांटी तो बच्चे या मां अदालत जा सकते हैं।

विवाद से कैसे बचें?

सिर्फ नॉमिनी बनना काफी नहीं है। स्पष्ट वसीयत बनाना जरूरी है, जिसमें लिखा हो कि संपत्ति किसे मिलेगी। साथ ही नामांकन भी करें ताकि ट्रांसफर आसान हो।