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PG Owner नहीं लौटा रहा Security Deposit तो क्या करें? जानिए किराएदार के कानूनी अधिकार

PG Tenant Rights: दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे के बाद PG में रहने वालों की सुरक्षा और सिक्योरिटी डिपॉजिट का मुद्दा चर्चा में है। किराएदारों को पीजी में रहने से पहले लिखित एग्रीमेंट जरूर बनवा लेना चाहिए।
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भारत

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Pawan Jayaswal

Sep 10, 2026

PG Security Deposit

किराएदारों के लिए लिखित एग्रीमेंट काफी उपयोगी रहता है। (PC: AI)

PG Security Deposit Refund: दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना ने एक बार फिर किराए के मकानों और PG में रहने वाले लोगों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। मामला सिर्फ जर्जर इमारतों तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो भी सामने आ रहे हैं, जिनमें PG मालिक छात्रों से सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस करने से इनकार करते नजर आ रहे हैं, जबकि छात्र असुरक्षित इमारत खाली करना चाहते हैं।

ऐसे में पीजी में रहने वाले छात्रों और नौकरीपेशा लोगों के लिए यह समझना जरूरी है कि मकान मालिक या पीजी संचालक मनमाने तरीके से उनके पैसे रोक नहीं सकता। किराएदार के कुछ बुनियादी अधिकार हैं, जिनकी जानकारी होना बेहद जरूरी है।

PG छोड़ते समय सिक्योरिटी डिपॉजिट का क्या होगा?

पीजी में एंट्री के समय आमतौर पर किराए के अलावा सिक्योरिटी डिपॉजिट लिया जाता है। यह रकम घर या कमरा खाली करने के बाद वापस की जानी चाहिए। मकान मालिक इसमें से सिर्फ वैध बकाया या वास्तविक नुकसान की रकम काट सकता है। सिर्फ कमरे में सामान्य इस्तेमाल से आए निशान या सामान्य टूट-फूट को आधार बनाकर पैसे काटना उचित नहीं माना जाता। अगर किसी नुकसान के नाम पर रकम काटी जा रही है, तो उसका उचित आधार और खर्च का प्रमाण होना चाहिए। अगर पीजी मालिक डिपॉजिट लौटाने से साफ इनकार करता है, तो किराएदार कानूनी नोटिस भेज सकता है। जरूरत पड़ने पर उपभोक्ता फोरम में भी शिकायत की जा सकती है।

PG का एग्रीमेंट बनवाना क्यों जरूरी?

कई लोग पीजी में रहते समय लिखित समझौते को ज्यादा महत्व नहीं देते। यही गलती बाद में भारी पड़ सकती है। कमरे में रहने से पहले एग्रीमेंट में किराए और दूसरी शर्तों को साफ-साफ लिखवाना बेहतर है। एग्रीमेंट में कम से कम इन बातों का उल्लेख होना चाहिए:

  • सिक्योरिटी डिपॉजिट की रकम
  • हर महीने का किराया
  • किराया जमा करने की तारीख और तरीका
  • सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस करने की शर्त
  • डिपॉजिट लौटाने की समय सीमा
  • रहने की अवधि
  • एग्रीमेंट बढ़ाने की शर्तें
  • PG के नियम
  • मेहमानों से जुड़े नियम
  • कमरा खाली करने का नोटिस पीरियड
  • किन परिस्थितियों में डिपॉजिट से रकम काटी जा सकती है

लिखित एग्रीमेंट होने से दोनों पक्षों की जिम्मेदारी स्पष्ट रहती है और विवाद होने पर किराएदार के पास मजबूत दस्तावेज भी रहता है।

सुरक्षित और साफ जगह में रहना किराएदार का अधिकार

पीजी में रहने वाला व्यक्ति सिर्फ एक कमरा किराए पर नहीं लेता, बल्कि उसे सुरक्षित और रहने लायक माहौल मिलना भी जरूरी है। कमरे में साफ-सफाई, पर्याप्त रोशनी और हवा, पीने का साफ पानी, बिजली और पानी की ठीक व्यवस्था जैसी बुनियादी सुविधाएं होनी चाहिए। इमारत में आग से बचाव के जरूरी इंतजाम होना भी अहम है। इसके अलावा बिजली और प्लंबिंग व्यवस्था ठीक होनी चाहिए और परिसर में कीड़े-मकौड़ों जैसी समस्या नहीं होनी चाहिए। संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा के साथ जीने का अधिकार मिलता है। इसी व्यापक अधिकार के संदर्भ में रहने की जगह का सुरक्षित होना भी महत्वपूर्ण है। अगर पीजी में बुनियादी सुरक्षा या स्वच्छता की गंभीर कमी है, तो किराएदार स्थानीय प्रशासन, नगर निकाय या उपभोक्ता अधिकार से जुड़े मंच पर शिकायत कर सकता है।

पीजी मालिक जबरन कमरा खाली नहीं करा सकता

पीजी में रहने वाले व्यक्ति को बिना वजह अचानक बाहर निकाल देना भी सही नहीं है। रहने की शर्तें और कमरा खाली कराने की प्रक्रिया आमतौर पर एग्रीमेंट में तय होती है। यानी मकान मालिक अपनी मर्जी से किसी किराएदार को रातों-रात बाहर करने या दबाव बनाने की कोशिश नहीं कर सकता। हालांकि, किसी भी विवाद में एग्रीमेंट की शर्तें और स्थानीय किराया कानून महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले में सिक्योरिटी डिपॉजिट पर क्या कहा गया?

22 मार्च 2024 के दिल्ली हाईकोर्ट के एक फैसले में लीज खत्म होने या समय से पहले समाप्त होने की स्थिति में सिक्योरिटी डिपॉजिट लौटाने से जुड़ी शर्तों पर चर्चा की गई थी। फैसले में कहा गया कि संपत्ति का खाली कब्जा मिलने के साथ सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस किया जाना चाहिए। हालांकि, किराए, सर्विस टैक्स, बकाया बिजली बिल और पानी के बकाया जैसे वैध भुगतान काटे जा सकते हैं।

अदालत ने यह भी माना कि अगर मकान मालिक सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस करने में डिफॉल्ट करता है, तो लीज की परिस्थितियों के अनुसार किराएदार को डिपॉजिट और उस पर देय ब्याज मिलने तक परिसर में रहने का अधिकार मिल सकता है। ऐसी स्थिति को सिर्फ इसी आधार पर अवैध कब्जा या अतिक्रमण नहीं माना जाएगा।

छात्रों को क्या करना चाहिए?

पीजी लेते समय सिर्फ किराया और लोकेशन देखकर फैसला करना समझदारी नहीं है। सबसे पहले कमरे और पूरी बिल्डिंग की सुरक्षा देखें। फायर सेफ्टी इंतजाम, बिजली की वायरिंग, सीढ़ियां, एंट्री-एग्जिट और साफ-सफाई जैसी चीजों पर ध्यान दें। साथ ही सिक्योरिटी डिपॉजिट और रिफंड की शर्तों को लिखित में जरूर लें। भुगतान की रसीद और एग्रीमेंट संभालकर रखें। अगर मकान मालिक पैसे रोकता है या असुरक्षित जगह खाली करने पर दबाव बनाता है, तो बातचीत के साथ-साथ सभी दस्तावेज और भुगतान के रिकॉर्ड सुरक्षित रखें। जरूरत पड़ने पर कानूनी मदद लेना बेहतर है।