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Mutual Fund Investment: सिर्फ 5 लाख के निवेश से भी बना सकते हैं 1 करोड़ का फंड, जानिए कैसे काम करती है कंपाउंडिंग

Mutual Fund Calculator: 5 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये का सफर सिर्फ ज्यादा बचत करने से पूरा नहीं होता। लंबे समय तक निवेश बनाए रखना और कंपाउंडिंग को समय देना अहम है। 12% अनुमानित रिटर्न पर 5 लाख की रकम 27 साल में करीब 1.07 करोड़ रुपये बन सकती है।
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भारत

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Pawan Jayaswal

Sep 10, 2026

Mutual Fund Investment

इन्वेस्टमेंट में कंपाउंडिंग की ताकत काफी मायने रखती है। (PC: AI)

Power of Compounding: क्या आप सिर्फ 5 लाख रुपये के निवेश से 1 करोड़ रुपये का फंड बना सकते हैं? जवाब है- यह संभव है। यहां असली खेल निवेश की अवधि और कंपाउंडिंग का है। शुरुआत में आपकी बचत पोर्टफोलियो को आगे बढ़ाती है, लेकिन जैसे-जैसे निवेश का आकार बढ़ता है, कमाई पर मिलने वाला रिटर्न भी तेजी से असर दिखाने लगता है। यही वजह है कि शुरुआती कुछ लाख रुपये जुटाना सबसे मुश्किल होता है। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता जाता है, रिटर्न पर रिटर्न मिलने का चक्र एक बड़ा फंड तैयार कर देता है।

5 लाख रुपये निवेश करके छोड़ दें तो क्या होगा?

मान लीजिए किसी निवेशक के पास पहले से 5 लाख रुपये हैं और वह इस रकम को लंबे समय के लिए म्यूचुअल फंड में निवेश कर देता है। अगर औसतन 12% सालाना रिटर्न मिलता है और निवेशक बीच में पैसा नहीं निकालता, तो कंपाउंडिंग का असर कई साल बाद काफी बड़ा हो सकता है। उदाहरण के तौर पर, 27 साल तक 12% सालाना अनुमानित रिटर्न पर 5 लाख रुपये की शुरुआती रकम करीब 1.07 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। इसमें करीब 1.02 करोड़ रुपये का हिस्सा अनुमानित रिटर्न का होगा।

विवरणआंकड़े
निवेश की रकम₹5 लाख
निवेश का तरीकाएकमुश्त निवेश
निवेश की अवधि27 साल
अनुमानित औसत सालाना रिटर्न12%
अनुमानित रिटर्न₹1.02 करोड़
मैच्योरिटी पर कुल रकम₹1.07 करोड़

यह सिर्फ एक उदाहरण है। म्यूचुअल फंड में रिटर्न तय नहीं होता और बाजार के उतार-चढ़ाव के कारण वास्तविक नतीजे अलग हो सकते हैं। टैक्स, फंड की लागत और महंगाई भी भविष्य में मिलने वाली रकम की वास्तविक कीमत पर असर डालेंगे।

समय जितना ज्यादा, कंपाउंडिंग का असर उतना बड़ा

इस उदाहरण की सबसे बड़ी सीख यही है कि निवेश को समय देने से पैसे से पैसा बनना शुरू हो जाता है। शुरुआत में रफ्तार धीमी दिख सकती है, लेकिन लंबे समय में रिटर्न पर मिलने वाला रिटर्न पोर्टफोलियो को तेजी से बढ़ा सकता है। यहां तक कि आप 5 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये का फंड तैयार कर सकते हैं।

जल्दी 1 करोड़ रुपये चाहिए तो सिर्फ 5 लाख काफी नहीं

अगर निवेशक 27 साल तक इंतजार नहीं करना चाहता और कम समय में 1 करोड़ रुपये जुटाना चाहता है, तो रणनीति बदलनी होगी। कम समय में 1 करोड़ रुपये का लक्ष्य हासिल करने के लिए शुरुआती रकम के साथ नियमित निवेश भी जरूरी हो सकता है। मान लीजिए कोई निवेशक 5 लाख रुपये से शुरुआत करता है और इसके साथ हर महीने 10,000 रुपये की SIP भी जारी रखता है। 18 साल तक 12% सालाना औसत अनुमानित रिटर्न मानें तो नियमित निवेश से पोर्टफोलियो की ग्रोथ काफी तेज हो सकती है।

10,000 रुपये की SIP से 18 साल में फंड

मान लीजिए कोई निवेशक 10,000 रुपये महीने की एसआईपी 18 साल तक करता है। यहां 18 साल में कुल निवेश रकम 21.6 लाख रुपये होगी। 12 फीसदी औसत सालाना रिटर्न मानें तो 18 साल में कुल अनुमानित रिटर्न 49.57 लाख रुपये हो सकता है। इस तरह मैच्योरिटी पर कुल 71.17 लाख रुपये का फंड जमा हो जाएगा।

विवरणआंकड़ा
मासिक SIP₹10,000
निवेश की अवधि18 साल
कुल निवेश₹21.60 लाख
अनुमानित सालाना रिटर्न12%
अनुमानित रिटर्न₹49.57 लाख
मैच्योरिटी पर कुल फंड₹71.17 लाख

18 साल तक 5 लाख के एकमुश्त निवेश पर रिटर्न

5 लाख रुपये के एकमुश्त म्यूचुअल फंड निवेश को आप 18 साल तक रखते हैं, तो सालाना औसत 12 फीसदी के रिटर्न के हिसाब से 33.45 लाख रुपये का अनुमानित रिटर्न जमा हो जाएगा। इस तरह इस एकमुश्त निवेश में मैच्योरिटी कॉर्पस 38.45 लाख रुपये हो जाएगा।

विवरणआंकड़ा
एकमुश्त निवेश₹5 लाख
निवेश की अवधि18 साल
अनुमानित सालाना रिटर्न12%
अनुमानित रिटर्न₹33.45 लाख
मैच्योरिटी पर कुल फंड₹38.45 लाख

अब 10,000 रुपये की एसआईपी और 5 लाख के एकमुश्त निवेश से बने फंड को जोड़ दें, तो कुल 1.09 करोड़ रुपये का फंड तैयार होता है। यानी इस तरह निवेश करने पर आप सिर्फ 18 साल में ही 1 करोड़ से अधिक की रकम जुटा सकते हैं।

निवेश का तरीकासमयमैच्योरिटी पर अनुमानित रकम
₹10,000 मासिक SIP18 साल₹71.17 लाख
₹5 लाख एकमुश्त निवेश18 साल₹38.45 लाख
कुल फंड₹1.09 करोड़

पहले बचत, फिर निवेश और आखिर में कंपाउंडिंग

सेबी रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार डॉ रवि सिंह के अनुसार, वेल्थ बनाने की प्रक्रिया को मोटे तौर पर तीन हिस्सों में समझा जा सकता है। पहला कदम है कमाई में से पर्याप्त पैसा बचाकर निवेश योग्य रकम तैयार करना। दूसरा कदम है उस रकम को नियमित निवेश से बढ़ाते रहना। तीसरा और सबसे अहम हिस्सा है समय के साथ उस निवेश पर मिलने वाले रिटर्न को दोबारा निवेश होने देना। यही कंपाउंडिंग का असली कमाल है।

(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश जोखिमभरा होता है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)