
प्रॉपर्टी की खरीदारी में टीडीएस का ध्यान जरूर रखें। (PC: Freepik)
Real Estate News: अगर आप प्रॉपर्टी खरीदने (Property Buying) की सोच रहे हैं या फिर अपनी प्रॉपर्टी को बेचने का प्लान कर रहे हैं, तो आपको इससे जुड़े टैक्स नियमों को समझना बेहद जरूरी है, क्योंकि जरा सी चूक आपके लिए भविष्य में मुश्किल पैदा कर सकती है। यहां पर हम बात करेंगे प्रॉपर्टी खरीद-बिक्री में TDS (Tax Deducted at Source) किस तरह से शामिल है। प्रॉपर्टी खरीदते समय TDS कैसे कटता है, कितना TDS कटता है, इसकी पूरी कैलकुलेशन भी समझेंगे और अगर आप TDS देने में कोई लापरवाही करते हैं, तो आप पर इसका क्या असर होगा, ये भी समझेंगे।
प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त में TDS एक अनिवार्य टैक्स होता है। इनकम टैक्स एक्ट 1961 के सेक्शन 194-IA के मुताबिक TDS को डिडक्ट करने की जिम्मेदारी प्रॉपर्टी खरीदार की होती है। खरीदार की ही जिम्मेदारी होती है कि वो TDS को सरकार के पास जमा भी कराए। इसके लिए खरीदार को डिडक्टेड अमाउंट फॉर्म 26QB भरकर जमा करना होता है। इसके बाद खरीदार की ये जिम्मेदारी होती है कि वो TDS जमा करने के बाद प्रॉपर्टी विक्रेता को फॉर्म 16B (TDS सर्टिफिकेट) मुहैया कराए। इसमें घर बेचने वाले की जिम्मेदारी ये होती है कि वो खरीदार को सभी जरूरी दस्तावेज मुहैया कराए, ताकि सही TDS का आंकलन किया जा सके।
TDS डिडक्ट होगा या नहीं, इस बात पर निर्भर है कि उस प्रॉपर्टी की वैल्यू कितनी है। TDS तभी कटेगा जब प्रॉपर्टी की वैल्यू 50 लाख रुपये से ज्यादा होती है, अगर उसकी वैल्यू एकदम 50 लाख रुपये भी है, तो भी TDS नहीं कटेगा। मतलब प्रॉपर्टी की वैल्यू 50 लाख रुपये या इससे कम है, तो TDS डिडक्ट नहीं होगा। इसलिए घर बेचने वाले और घर खरीदने वाले दोनों को ये सीमा पता होनी चाहिए, ताकि प्रॉपर्टी डील में कोई दिक्कत न आए।
TDS सभी रेजिडेंशियल प्रॉपर्टीज, कमर्शियल प्रॉपर्टीज और प्लॉट पर लागू होता है, लेकिन कृषि योग्य भूमि (agricultural land) पर कोई TDS नहीं कटता है। इसके अलावा, अगर प्रॉपर्टी को किसी रिश्तेदार (specified relatives) को ट्रांसफर किया जाता है तब भी TDS नहीं कटता है। TDS कटौती जिस महीने में की गई थी, उसके अंत से 30 दिनों के भीतर सरकार के पास जमा किया जाना चाहिए।
TDS को समय पर जमा नहीं करने किया तो आपके लिए मुश्किलें पैदा हो सकती हैं। खरीदार को TDS अमाउंट पर हर महीने 1.5% का अतिरिक्त ब्याज देना होगा। इसके अलावा नॉन-कंप्लायंस और देरी के लिए पेनल्टी भी लगाई जा सकती है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट सेक्शन 271C के तहत फाइन लगा सकता है और कानूनी कार्रवाई के लिए कदम उठा सकता है। TDS समय पर जमा नहीं हुआ, तो विक्रेता को फॉर्म 16B नहीं मिलेगा जिससे उसे इनकम टैक्स में राहत नहीं मिल सकेगी और डबल टैक्सेशन का सामना करना पड़ेगा।
Published on:
11 Nov 2025 12:27 pm
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