
घर खरीदना किफायती हो सकता है। (PC: AI)
Real Estate News: देश में लाखों लोगों के लिए अपने घर का सपना अब पहले से कहीं ज्यादा आसान होने की उम्मीद जगी है। नीति आयोग ने किफायती आवास को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार किया है, जिसमें बिल्डर्स और घर खरीदारों के लिए टैक्स छूट, सस्ते लोन व स्टांप ड्यूटी में राहत जैसे कई वित्तीय प्रोत्साहनों का सुझाव दिया गया है। इसका मकसद तेजी से बढ़ती शहरी आबादी की जरूरतों को पूरा करना और सस्ते घरों की उपलब्धता बढ़ाना है।
आयोग ने सुझाव दिया है कि कम आय वाले लोगों के लिए क्रेडिट रिस्क गारंटी फंड योजना के तहत होम लोन की अधिकतम सीमा को 20 लाख रुपए से बढ़ाकर 40 लाख रुपए किया जाए, ताकि सस्ते घरों की बिक्री को ठीक से कवर किया जा सके। रीट्स के निवेशकों को भी बड़ी राहत देने का सुझाव दिया गया है। इसमें कैपिटल गेन और किराए से होने वाली आय पर टैक्स छूट शामिल है। इससे किफायती आवास सेक्टर में निवेश बढ़ेगा और प्रोजेक्ट्स के लिए फंड जुटाना आसान होगा।
नीति आयोग के मुताबिक, साल 2050 तक भारत की शहरी आबादी करीब 50% बढ़कर लगभग 85 करोड़ तक पहुंच सकती है। जबकि 2021 में यह आंकड़ा 50 करोड़ के आसपास था। ऐसे में आने वाले वर्षों में किफायती आवास की मांग तेजी से बढ़ने वाली हैं। इसी चुनौती को देखते हुए नीति आयोग ने आम बजट से पहले केंद्र सरकार को कई अहम नीतिगत सुझाव दिए हैं।
-किफायती आवास परियोजनाओं में शामिल डेवलपर्स के लिए 100% टैक्स छूट दोबारा लागू करने की सिफारिश
-रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (रीट्स) के निवेशकों के लिए कैपिटल गेन टैक्स और किराए से होने वाली आय पर टैक्स छूट देने की सिफारिश।
-सस्ते घरों को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय मदद की भी सिफारिश। इसमें स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज को पूरी तरह माफ करने या टोकन अमाउंट (1,000 रुपए तक) लेने का सुझाव।
-किफायती हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन के इस्तेमाल के नियमों में बदलाव किया जाए। इसमें फ्लोर एरिया रेश्यो में ढील देने की सिफारिश।
-'मॉडल टेनेंसी एक्ट' को तेजी से लागू करने की वकालत की गई है, ताकि खाली पड़े एक करोड़ मकानों को बाजार में लाया जा सके। इससे मकान मालिकों के साथ रेंटर्स को फायदा होगा।
नीति आयोग ने किफायती आवास परियोजनाओं में शामिल डेवलपर्स के लिए धारा 80- 1बीए के तहत 100% टैक्स छूट दोबारा लागू करने की सिफारिश की है। यह छूट पहले 'जून 2016 से मार्च 2022 तक लागू थी। सस्ते मकानों की नई सप्लाई वर्ष 2018 के 48% से घटकर अब केवल 12% रह गई है। इससे बाजार में सस्ते घरों की सप्लाई बढ़ेगी।
Updated on:
09 Jan 2026 12:45 pm
Published on:
09 Jan 2026 12:41 pm
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