
महिलाएं उद्योग जगत में तेजी से आगे आ रही हैं। (PC: AI)
भारतीय उद्योग जगत में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। टियर-2 और टियर-3 शहरों से बड़ी संख्या में युवा महिलाएं अब उन सेक्टर्स में कदम रख रही हैं, जिन्हें पहले पुरुष-प्रधान माना जाता था। इनमें डिवाइस रिपेयर, अकाउंटिंग और कंप्लायंस सर्विस जैसे सेक्टर शामिल हैं। बिजनेस मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म टाइड द्वारा जारी नए आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई है।
टाइड प्लेटफॉर्म पर 27 से 31 वर्ष की महिलाएं नए बिजनेस ओनर्स का एक बड़ा हिस्सा हैं। 1.8 लाख से अधिक महिला उद्यमियों के साथ, टाइड इंडिया के कुल मेंबर बेस में महिलाओं की हिस्सेदारी 18.7% है। यह आयु वर्ग भारत का सबसे बड़ा जनसांख्यिकीय समूह है और डिजिटल बिजनेस प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से उभर रहा है।
यह उछाल महानगरों के बाहर ज्यादा साफ दिखाई देता है। उत्तर प्रदेश के गुलहरिया और बिसरख, महाराष्ट्र के हरनूल और मध्य प्रदेश के इंदौर जैसे छोटे शहरों में महिलाएं डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए स्किल-आधारित और सर्विस-आधारित व्यवसायों को औपचारिक रूप दे रही हैं। 20 के अंतिम और 30 के शुरुआती दशक की महिलाएं प्रमुख रूप से नजर आ रही हैं, लेकिन यह वृद्धि सभी कामकाजी उम्र की महिलाओं में उद्यमिता की ओर एक संरचनात्मक बदलाव को दर्शाती है।
जहां सिलाई और ब्यूटी सर्विसेज जैसे सेक्टर पहले से महिलाओं के दबदबे में रहे हैं, वहीं अब महिलाएं स्किल्ड सर्विसेज और टेक-ड्रिवन कैटेगरी में भी तेजी से आगे बढ़ रही हैं। इनमें शामिल हैं:
मोबाइल, टैबलेट और कंप्यूटर रिपेयर- खासकर पश्चिम बंगाल और टियर-2 शहरों में
अकाउंटिंग और टैक्स सर्विसेज- जहां युवा महिलाएं वित्तीय और कंप्लायंस-आधारित भूमिकाएं निभा रही हैं।
नर्सिंग और पर्सनल केयर सर्विसेज- मध्य प्रदेश में मजबूती के साथ उभर रही हैं।
सिलाई मशीन और माइक्रो-मैन्युफैक्चरिंग- यहां अब डिजिटल पेमेंट और अकाउंटिंग टूल्स का उपयोग हो रहा है।
यह बदलाव दिखाता है कि भारतीय महिलाएं पारंपरिक पेशागत धारणाओं को तोड़ते हुए पुरुष-प्रधान माने जाने वाले क्षेत्रों में प्रवेश कर रही हैं और डिजिटल टूल्स की मदद से अपनी आय बढ़ा रही हैं।
महिला-नेतृत्व वाले व्यवसायों में यह वृद्धि डिजिटल अपनाने से जुड़ी है। आंकड़ों के मुताबिक, मार्च से नवंबर 2025 के बीच नए महिला-नेतृत्व वाले बिजनेस में 111% की बढ़ोतरी हुई है। यह संकेत देता है कि महिलाएं तेजी से फॉर्मलाइजेशन, डिजिटल पेमेंट और रेगुलेटेड बिजनेस प्रैक्टिसेज की ओर बढ़ रही हैं। यह रुझान खास तौर पर उन महिलाओं में मजबूत हुआ है, जो अपने करियर की शुरुआत में हैं और परिवार, देखभाल की जिम्मेदारियों या फ्लेक्सिबल वर्क अरेंजमेंट्स के साथ सोलो बिजनेस चला रही हैं। इससे उनकी क्रेडिट विजिबिलिटी बढ़ रही है और उन्हें बिजनेस ग्रोथ के लिए जरूरी वित्तीय उत्पादों तक पहुंच मिल रही है।
इंडस्ट्री में महिलाएं सिर्फ संख्या में ही नहीं बढ़ रहीं, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का सक्रिय रूप से उपयोग भी कर रही हैं। महिलाओं द्वारा सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले तीन प्रोडक्ट्स हैं:
महिला उद्यमी रोजमर्रा के बिजनेस खर्चों को मैनेज करने के लिए डेबिट सर्विसेज का सक्रिय उपयोग कर रही हैं। रियल-टाइम ट्रैकिंग और सुरक्षित लेनदेन से उन्हें वित्तीय नियंत्रण में मदद मिलती है।
यूटिलिटी बिल, वेंडर पेमेंट और नियमित खर्चों के लिए डिजिटल बिल पेमेंट अपनाने से उनका फाइनेंशियल रिकॉर्ड साफ रहता है और क्रेडिटवर्थिनेस बेहतर होती है।
3. QR कोड के जरिए पेमेंट एक्सेप्टेंस
QR-आधारित पेमेंट ने सिलाई की दुकानों, रिपेयर सर्विसेज और होम-बेस्ड बिजनेस जैसे महिला-चालित माइक्रोबिजनेस के लिए कैश-डिपेंडेंसी खत्म कर दी है और बिजनेस की विजिबिलिटी बढ़ाई है।
Published on:
09 Jan 2026 11:39 am
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