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Real Estate News: RERA ने दी बिल्डर्स को बड़ी राहत, अब देनी होगी सिर्फ इतनी ही पेनल्टी, क्या ग्राहकों पर पड़ेगा असर?

Real Estate News: रेरा ने लंबित तिमाही प्रोग्रेस रिपोर्ट नहीं देने वाले बिल्डर्स पर लगने वाली पेनल्टी की लिमिट तय की है। इन्हें अब 3 लाख रुपये से ज्यादा पेनल्टी नहीं देनी होगी।

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भारत

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Pawan Jayaswal

Aug 11, 2025

Real Estate News

रेरा ने बिल्डर्स पर लगने वाली पेनल्टी की लिमिट तय की है। (PC: Gemini)

Real Estate News: जनता को अपने आशियाने के निर्माण और प्रोजेक्ट की स्थिति नहीं बता रहे बिल्डर्स को रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) ने बड़ी राहत दे दी है। ऐसे बिल्डर डवलपर्स को अब अधिकतम 3 लाख रुपए तक की ही पेनल्टी चुकानी होगी। जबकि, पहले इस पर कोई कैपिंग नहीं थी। खास यह भी है कि रेरा ने ऐसे बिल्डर, डवलपर्स को इस वर्ष 31 अक्टूबर की मियाद दी है। इस समय सीमा में भी जो अपनी लंबित तिमाही प्रोग्रेस रिपोर्ट (QPR) दे देगा, उससे बतौर पेनल्टी केवल 2 लाख रुपए ही लिये जाएंगे। भले ही अब तक प्रावधान के अनुसार उसकी पेनल्टी राशि कई गुना हो गई हो।

ग्राहकों पर क्या पड़ेगा असर?

रेरा का राहत देने के पीछे तर्क है कि कई बिल्डर्स पर लाखों की देरी शुल्क लगने के बावजूद वे क्यूपीआर जमा नहीं करा रहे थे, जिससे खरीदारों को अपने घर के निर्माण की स्थिति की जानकारी नहीं मिल पा रही थी। अब बुकिंगकर्ताओं को अपने प्रोजेक्ट की नियमित प्रोग्रेस रिपोर्ट मिलने की संभावना ज्यादा बढ़ जाएगी। रेरा का यह तर्क बताता है कि पेनल्टी पर लिमिट लगने से ग्राहकों को आसानी होगी।

इस तरह मिली राहत

  1. प्रोजेक्ट की तिमाही प्रोग्रेस रिपोर्ट की देरी पर 5000 रुपए प्रति तिमाही प्रोसेसिंग चार्ज लगेगा। एक महीने के ग्रेस पीरियड के बाद देरी शुल्क लागू होगा।
  2. हर अतिरिक्त तिमाही की देरी पर 5000 रुपए जुड़ते जाएंगे। लेकिन कुल पेनल्टी 3 लाख रुपए से अधिक नहीं होगी।
  3. कम्प्लीशन सर्टिफिकेट, ओक्यूपेंसी सर्टिफिकेट, मोरगेज फ्री लेटर के लिए आवेदन तभी मान्य होंगे, जब बिल्डर, डवलपर लंबित क्यूपीआर पेनल्टी सहित जमा करा देगा। वहीं, पहले से सर्टिफिकेट दे चुके प्रोजेक्ट्स के लिए पेनल्टी की अधिकतम सीमा 1 लाख रुपए होगी।

रेरा का दावा

रेरा प्रबंधन का कहना है कि पेनल्टी की सीमा तय होने से बिल्डर, डवलपर्स पर वित्तीय दबाव कम होगा, जिससे वे लंबित रिपोर्ट समय पर जमा कराने के लिए प्रेरित होंगे। नियमित प्रोग्रेस रिपोर्ट से खरीदारों का भरोसा बढ़ेगा।

यहां सख्ती भी

यदि कोई प्रमोटर लगातार तिमाही प्रोग्रेस रिपोर्ट नहीं देगा, तो सिस्टम स्वतः ही नॉन- कंप्लायंस (पालना नहीं) की प्रक्रिया शुरू करेगा और प्रोजेक्ट को लैप्स भी घोषित किया जा सकता है।