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Venezuela Crisis: वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले से रूस में दहशत, क्यों सता रहा है ‘भूखे मरने’ का डर?

Russia fears oil price crash: रूस के लोगों को डर सता रहा है कि वेनेजुएला के तेल भंडार पर नियंत्रण के बाद अमेरिका उनके लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। रूस की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो सकती है।

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USA Venezuela Crisis

रूस को तेल की कीमतों में गिरावट का अंदेशा है। (PC: AI)

Russia reacts to Maduro detention: अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को बंधक बनाए जाने से रूस की धड़कनें बढ़ गई हैं। मादुरो को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का सहयोगी माना जाता है। ऐसे में इस कार्रवाई के चलते रूस ने दक्षिण अमेरिका में अपना एक दोस्त खो दिया है। हालांकि, रूस की चिंता केवल एक दोस्त खोने को लेकर ही नहीं है, बल्कि इस बदलाव से तेल की कीमतों में होने वाले बदलाव से जुड़ी है। रूसी आवाम के मन में यह डर बैठ गया है कि वे भूख से मर जाएंगे।

Russia की अर्थव्यवस्था होगी प्रभावित

रूस ने अमेरिका के इस कदम की कड़ी निंदा की है। क्रेमलिन की तरफ से कहा गया है कि वेनेजुएला पर अमेरिकी हमला बेहद चिंताजनक है। दुनिया के कई दूसरे देशों ने भी यूएस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इसके लिए आलोचना की है। चीन और उत्तर कोरिया जैसे देश इससे भड़के हुए हैं। लेकिन रूस की अपनी अलग चिंता है। उसे अपना तेल का कारोबार बुरी तरह प्रभावित होने का डर सता रहा है। रूस के लोगों ने ऑनलाइन अपनी यह चिंता जाहिर भी की है। मिरर यूके की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश रूसियों को लगता है कि अब तेल की कीमतें गिर जाएंगी और देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा, जो एनर्जी एक्सपोर्ट पर काफी हद तक निर्भर है।

रूसी अरबपति ने जताई चिंता

रूस के अरबपति ओलेग डेरिपास्का (Oleg Deripaska) का कहना है कि वेनेजुएला के तेल भंडार पर अमेरिकी नियंत्रण के गंभीर नतीजे हो सकते हैं। उन्होंने अपने टेलीग्राम चैनल पर लिखा: अगर अमेरिका हमारे सहयोगी वेनेजुएला के तेल क्षेत्रों तक पहुंच जाता है (वो पहले ही गुयाना तक पहुंच चुका है), तो दुनिया के आधे से अधिक तेल भंडार को अमेरिका ही नियंत्रित करेगा। उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका यह सुनिश्चित करना चाहता है कि रूसी तेल की कीमत 50 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा न बढ़े। इसका मतलब है कि रूस के लिए सब कुछ पहले जैसा रखना मुश्किल होगा।

तेल की कीमतें प्रभावित करेगा US

वहीं, क्रेमलिन समर्थक एक सैन्य अधिकारी ने इसे बुरा सपना बताते हुए कहा कि परिणाम गंभीर होंगे। उन्होंने कहा कि अब रूस के लिए तेल निकालना भी फायदेमंद नहीं रहेगा। कुछ ही महीनों में हम भूख से मर जाएंगे। यह रूस की अर्थव्यवस्था के लिए चेकमेट है। उन्होंने आगे कहा कि वे (अमेरिका) तेल की कीमत को बिल्कुल नीचे गिरा देंगे और पूरे बाजार पर कब्जा कर लेंगे। अब, बाकी सब चीज़ों के अलावा उनके पास तेल भी होगा। यह पूरी तरह से एक भयानक आपदा है। अमेरिकियों ने अपने अस्तित्व को कई सदियों के लिए बढ़ा लिया है, जबकि हमारा अस्तित्व कुछ महीनों में खत्म हो जाएगा।

Venezuela के पास कितना तेल?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कहा था कि अमेरिका वेनेजुएला के बड़े तेल भंडार पर कंट्रोल करेगा और देश की बर्बाद हो चुकी तेल इंडस्ट्री को फिर से जीवित करने के लिए अमेरिकी कंपनियों को अरबों डॉलर निवेश करने के लिए कहेगा। इससे यह साफ है कि डोनाल्ड ट्रंप की नजर वेनेजुएला के तेल भंडार पर है। अमेरिकी एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) के अनुसार, वेनेजुएला के पास 303 अरब बैरल कच्चा तेल है, जो दुनिया के कुल भंडार का लगभग पांचवां हिस्सा है। वेनेजुएला में धरती पर तेल का सबसे बड़ा भंडार है, लेकिन वह क्षमता के अनुरूप उसका उत्पादन नहीं कर रहा है। वेनेजुएला हर दिन केवल 1 मिलियन बैरल तेल का उत्पादन करता है। यह 2013 में मादुरो के देश की सत्ता संभालने से पहले होने वाले उत्पादन से भी कम है।

कौन खरीदता रहा है वेनेजुएला से Oil?

वेनेजुएला के तेल का एक बड़ा हिस्सा चीन जाता रहा है। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में वेनेजुएला के कुल तेल उत्पादन का करीब 68% चीन गया था। यानी चीन वेनेजुएला क्रूड ऑयल का सबसे बड़ा खरीदार है। इसके बाद अमेरिका (23%), स्पेन (4%), क्यूबा (4%) का हिस्सा रहा। मलेशिया और रूस भी वेनेजुएला के कच्चे तेल के खरीदार रहे हैं। जानकार मानते हैं कि वेनेजुएला के तेल भंडार पर नियंत्रण के साथ ही अमेरिका तेल की कीमतों को अपने हिसाब से कंट्रोल कर पाएगा। ऐसे में रूस का चिंतित होना लाजमी है।