
Saudi Arabia becomes India's second largest oil supplier, leaves Russia behind
रूस-युक्रेन के बीच जारी युद्ध के कारण दोनों ही देशों को कई मामलों में लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है। दोनों देशों के बीच जारी युद्ध के कारण पहले ही पूरी दुनिया वैश्विक खाद्य संकट के कगार पर आ गई है। इसी बीच ग्लोबल आर्थिक मंदी की भी आशंका जटाई जा रही है। हालांकि आज जो आकड़े सामने आए हैं वह रूस के लिए चिंताजनक हैं। वहीं अगर इन आकड़ों में लगातार गिरावट आती रही तो यह आकड़े रूस के लिए ज्यादा चिंताजनक बन सकते हैं। दरअसल पिछले अगस्त महीने में रूस के द्वारा भारत में प्रति दिन 855,950 बैरल कच्चा तेल निर्यात किया गया, जो जुलाई के मुकाबले 2.4% कम है। इसके कारण रूस को पीछे करते हुए सऊदी अरब भारत का दूसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर बन गया है।
वहीं अगस्त महीने में भी पहले स्थान पर बना हुआ है, जो भारत का पहला सबसे बड़ा तेल सप्लायर है। हालांकि सऊदी अरब और रूस के बीच कच्चे तेल की सप्लाई के मामले में अंतर ज्यादा बड़ा नहीं है।
OPEC देशों से पिछले 16 सालों में सबसे कम हुआ तेलों का आयात
सरकारी आकड़ों के अनुसार भारत ने अगस्त में सऊदी अरब से 8,63,950 बैरल प्रति दिन (bpd) तेल की खरीदी की है, जो जुलाई महीने की तुलना में 4.8% अधिक है, जबकि रूस के साथ खरीदी का यह आकड़ा 2.4% गिरकर 855,950 बैरल प्रति दिन (bpd) पहुंच गया है। इसके साथ ही एक आकड़ा यह भी बताता है कि भारत का OPEC देशों से तेल आयात कम होकर 59.8% आ गया है, जो पिछले 16 सालों में सबसे कम है। दरअसल OPEC पेट्रोलियम निर्यातक 13 देशों का एक संगठन है, जिसकी स्थापना 14 सितंबर 1960 को हुई है।
रूस के लिए भारत चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा तेल कंज्यूमर
चीन के बाद भारत रूस से सबसे ज्यादा कच्चा तेल खरीद रहा है। रूस-युक्रेन के बीच जारी युद्ध के कारण कई पश्चिमी देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। ऐसे में रूस ने अपनी अर्थव्यवस्था को चलाने के लिए कम दाम में तेल और दूसरे कच्चे माल की पेशकश की थी, जिसके बाद भारत ने रूस से तेल का आयात को बढ़ा दिया था। हालांकि जून में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद इसमें अब कमी देखी जा रही है। मार्केट एक्सपर्ट के मुताबिक रूस अब कच्चे तेल के निर्यात में डिस्काउंट घटा रहा है। वहीं सऊदी अरब और भारत के बीच तेल सप्लाई को लेकर कॉन्ट्रैक्ट की कुछ शर्तें हैं, जिसके कारण तेल के दाम में अंतर देखा जा रहा है। यह कारण रूस के साथ तेल आयात के आकड़े में कमी आ रही है।
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Published on:
15 Sept 2022 05:28 pm
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