
निफ्टी की चार महीने की गिरावट कुछ थमी है। (PC: AI)
Stock Market Investment Tips: निफ्टी की पूरी हिस्ट्री में सिर्फ सात बार ऐसा हुआ है, जब बाजार लगातार चार महीने या उससे ज़्यादा गिरता रहा हो। इस बार निफ्टी की 4 महीने की गिरावट मार्च 2026 में थमी है। DSP Mutual Fund के आंकड़े बताते हैं कि ऐसे हर मौके के बाद अगले एक साल में औसतन 40.7 फीसदी की तेजी आई है। चार महीने की गिरावट के बाद 40 फीसदी की तेजी। यह कोई छोटी बात नहीं है।
Quant Mutual Fund ने अपनी ताजा रिपोर्ट में लिखा है कि आने वाली कुछ तिमाहियों में यह कोविड के बाद का सबसे बड़ा खरीदारी का मौका साबित हो सकता है। फंड ने निवेशकों से कहा है कि पोर्टफोलियो को आक्रामक तरीके से दोबारा संतुलित करें।
105 निगेटिव स्ट्रिक्स में से आधे से ज़्यादा सिर्फ एक महीने तक चले। सात ही ऐसे थे जो चार महीने या ज़्यादा खिंचे। और हर बार उसके बाद बाजार ने जबरदस्त वापसी की है। जनवरी 1991 में चार महीने की गिरावट के बाद निफ्टी अगले एक साल में 117.9 फीसदी चढ़ा था। अगस्त 1998 वाले दौर के बाद 65.6 फीसदी चढ़ा। फरवरी 2025 में खत्म हुए दौर के बाद भी 13.8 फीसदी का एक साल का रिटर्न रहा। तीन महीने में औसत रिटर्न 12.2 फीसदी, छह महीने में 22.4 फीसदी और एक साल में 40.7 फीसदी रहा है।
बड़े फंड हाउस पहले से हरकत में आ गए हैं। ICICI Prudential का Balanced Advantage Fund, जिसके पास 71,150 करोड़ रुपये की वेल्थ है, ने 31 मार्च तक अपनी इक्विटी हिस्सेदारी बढ़ाकर 61.9 फीसदी कर ली है। यह पांच साल में सबसे ऊंचा स्तर है। आखिरी बार इतनी इक्विटी जून 2020 में थी, यानी कोविड के ठीक बाद जब बाजार निचले स्तर से वापस आया था।
ICICI Prudential AMC के CIO एस नरेन ने कहा कि वैल्युएशन और सेंटीमेंट संकेतक अनुकूल हो रहे हैं, इसलिए यह धीरे-धीरे इक्विटी बढ़ाने का सही वक्त है।
क्वांट म्यूचुअल फंड ने कहा कि भारतीय बाजार में capitulation के संकेत दिख रहे हैं। मतलब जो बिकना था वो बिक चुका, सबसे बुरा शायद पीछे छूट गया है। फंड का कहना है कि नॉमिनल GDP के मामले में भारत चीन से दोगुनी तेज़ी से बढ़ रहा है। अर्निंग इंप्रूवमेंट सायकल की वापसी होगी। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को बाजार अभी कम आंक रहा है, यह आगे चलकर फायदा देगा। RBI की नरम ब्याज दर नीति बनी रहेगी।
Quant ने अपने पोर्टफोलियो में बड़े बदलाव किए हैं। कैश कम करके शेयर बढ़ाए हैं। बड़ी कंपनियों पर जोर है और कुछ मिड-स्मॉल कैप भी जोड़े गए हैं। मैन्युफैक्चरिंग में अभी सतर्क हैं, लेकिन एनर्जी, इंफ्रास्ट्रक्चर, NBFC, बीमा, प्राइवेट बैंक, होटल, फार्मा, टेलीकॉम और FMCG पर पॉजिटिव हैं। एक बात ध्यान देने वाली है। अगस्त 1998 के बाद छह महीने में सिर्फ 10 फीसदी मिला लेकिन एक साल में 65 फीसदी। इसलिए धैर्य जरूरी है।
Updated on:
04 Apr 2026 04:52 pm
Published on:
04 Apr 2026 04:47 pm
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