
शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखी जा रही है। (PC: AI)
Stock Market Today: भारतीय शेयर बाजार में आज हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को बड़ी गिरावट देखी जा रही है। घरेलू शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी-50 ने गुरुवार को 1% से ज्यादा की मजबूत बढ़त दर्ज करने के बाद आज फिर गिरावट का रुख अपना लिया। मुनाफावसूली, अमेरिका-ईरान युद्ध की चिंता, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के कारण बाजार दबाव में रहा।
सेंसेक्स लगभग 700 अंक यानी करीब 1% गिरकर 79,323 के निचले स्तर पर पहुंच गया। वहीं, निफ्टी 50 करीब 200 अंक यानी लगभग 1% गिरकर 24,572 पर आ गया। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 453 लाख करोड़ रुपये से घटकर 452 लाख करोड़ रुपये रह गया, जिससे निवेशकों को एक ही सत्र में लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
पिछले कारोबारी सत्र में बाजार में आई तेजी हालिया गिरावट के बाद शॉर्ट-कवरिंग रैली थी। उस समय खबरें आई थीं कि ईरान ने अमेरिका को कुछ शर्तों के साथ प्रस्ताव दिया है। बाद में मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि तेहरान ने वॉशिंगटन को कोई प्रस्ताव नहीं दिया, जिससे युद्ध लंबा चलने की आशंका बढ़ गई। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर संयुक्त हमले का सातवां दिन शुक्रवार को पूरा हो गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि युद्ध खत्म करने के लिए कोई समय सीमा तय नहीं है।
ब्रेंट क्रूड में शुक्रवार को हल्की गिरावट जरूर आई, लेकिन यह अभी भी 85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। इससे निवेशकों को भारत की वित्तीय स्थिति, महंगाई और ब्याज दरों में संभावित कटौती को लेकर चिंता हो रही है। भारत अपनी जरूरत का 90% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमत में हर 1 डॉलर की बढ़ोतरी से भारत का आयात बिल लगभग 16,000 करोड़ बढ़ जाता है।
ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म Morgan Stanley ने अपने ताजा आकलन में भारतीय शेयर बाजार की रेटिंग घटाकर 'Equal Weight' कर दी है। ब्रोकरेज के अनुसार, मिडिल ईस्ट का संघर्ष बढ़ने से सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है, खासकर अगर Hormuz Strait से तेल आपूर्ति बाधित होती है। इस बीच अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि वॉशिंगटन भारतीय रिफाइनरियों को समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीदने के लिए 30 दिन की छूट देगा।
मार्च के केवल तीन कारोबारी सत्रों में ही विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने कैश सेगमेंट में 15,800 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए हैं। यह लगातार नौवां महीना है जब एफआईआई भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली कर रहे हैं। अमेरिका-ईरान युद्ध, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और करेंसी में उतार-चढ़ाव ने उनकी बिकवाली को और बढ़ा दिया है।
तेजी से बदलते भू-राजनीतिक हालात ने भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि की कहानी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले एक साल से भारतीय बाजार में कंपनियों की कमाई अपेक्षाकृत कमजोर रही है और बेहतर ग्रोथ की उम्मीद ही निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत थी। अब वह उम्मीद भी कमजोर पड़ती दिख रही है।
ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 की दिसंबर तिमाही में निफ्टी कंपनियों का मुनाफा सालाना आधार पर 7% बढ़ा। हालांकि, यह लगातार सातवीं तिमाही है, जब महामारी (जून 2020) के बाद निफ्टी की कमाई सिंगल-डिजिट ग्रोथ में रही।
PTI की रिपोर्ट के अनुसार, Moody’s Ratings का मानना है कि मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से एनर्जी प्राइसेस बढ़ सकते हैं, जिससे भारतीय रुपये पर दबाव और चालू खाता घाटा बढ़ने की आशंका है।
बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर के भारी भरकम शेयरों में बिकवाली के कारण भी बाजार दबाव में रहा, क्योंकि इनका सूचकांकों में बड़ा वेटेज है।
Published on:
06 Mar 2026 03:01 pm
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